खाली घर से करें कमाई, 'बेड एंड ब्रेकफास्ट' स्कीम में सरकार दे रही है सब्सिडी

बाकी बिजनेस के मुकाबले इसमें बहुत ज्यादा भाग-दौड़ नहीं करनी पड़ती, खासकर तब जब आप सिर्फ कुछ ही कमरे किराए पर दे रहे हों. जैसे-जैसे लोग आपके काम की तारीफ करने लगते हैं और पुराने मेहमान दोबारा आने लगते हैं, आपकी कमाई का रास्ता और भी पक्का और साफ हो जाता है.

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होमस्टे बना रिटायर्ड लोगों और महिलाओं के लिए आय का नया जरिया (Photo-Pexels) होमस्टे बना रिटायर्ड लोगों और महिलाओं के लिए आय का नया जरिया (Photo-Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 21 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 3:08 PM IST

भारत का टूरिज्म सेक्टर अब बड़े होटलों के बजाय छोटे और अलग-अलग ठिकानों पर ठहरने के मॉडल की ओर बढ़ रहा है. इसमें सरकार की 'बेड एंड ब्रेकफास्ट' (B&B) और होमस्टे जैसी योजनाएं सबसे अहम भूमिका निभा रही हैं. केंद्र और राज्य सरकारों की इन कोशिशों का मकसद पर्यटकों को सस्ता आवास दिलाना है और साथ ही आम लोगों को अपने घरों के खाली कमरों से कमाई करने का मौका देना है.

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इन्वेस्टमेंट बैंकर और चार्टर्ड अकाउंटेंट सार्थक अहूजा बताते हैं कि यह मॉडल बनावट में सरल है, लेकिन आर्थिक रूप से काफी फायदेमंद है. वो बताते हैं, “कोई भी व्यक्ति जिसके पास अपने घर में 1 से 6 खाली कमरे हैं और जहां वह खुद भी रहता है, वह उन्हें होमस्टे यूनिट्स में बदलकर पर्यटकों को ठहरा सकता है. यह मूल रूप से घर से ही एक छोटा 'हॉस्पिटैलिटी बिजनेस' चलाने जैसा है.”

क्या है बेड एंड ब्रेकफास्ट (B&B)/होमस्टे योजना?

पंजाब के पर्यटन और सांस्कृतिक मामलों के विभाग जैसी सरकारी योजनाओं के तहत, घर के मालिक अपने पूरी तरह से तैयार कमरों को B&B या होमस्टे यूनिट के रूप में रजिस्टर करा सकते हैं. इसके दो मुख्य उद्देश्य हैं- पर्यटकों के ठहरने की कमी को दूर करना और उन्हें उस जगह की संस्कृति और रहन-सहन का असली अनुभव देना.

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आम तौर पर 'बेड एंड ब्रेकफास्ट' (B&B) में रहने के साथ नाश्ते की सुविधा मिलती है, जबकि होमस्टे में मेहमानों को मेजबान परिवार के साथ रहने का मौका मिलता है, जिससे सांस्कृतिक मेलजोल बढ़ता है. इसके लिए बुनियादी तौर पर सजे-धजे कमरे, साफ-सफाई और पानी जैसी जरूरी सुविधाओं का होना आवश्यक है. 

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हालांकि यह योजना मुख्य रूप से पहचान और पहुंच दिलाने का काम करती है, लेकिन इसका असली आर्थिक फायदा कई सरकारी प्रोत्साहनों को एक साथ जोड़कर उठाया जा सकता है. उदाहरण के लिए, पीएम मुद्रा योजना के तहत मकान मालिक अपनी सुविधाओं को आधुनिक बनाने या विस्तार करने के लिए ₹20 लाख तक का बिना गारंटी वाला ऋण ले सकते हैं, इसके अलावा, ग्रामीण होमस्टे रणनीति के जरिए 30% तक की पूंजीगत सब्सिडी (अधिकतम ₹1 लाख प्रति कमरा) मिलती है, जो 6 कमरों तक सीमित है. साथ ही, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) मार्जिन मनी की जरूरत को 15-35% तक कम कर देता है, जिससे इस छोटे व्यवसाय को शुरू करना और चलाना आर्थिक रूप से काफी आसान हो जाता है. 

राज्य स्तर पर मिलने वाले प्रोत्साहनों का विवरण

  • गोवा: प्रति होमस्टे यूनिट ₹2 लाख का एकमुश्त अनुदान
  • मध्य प्रदेश: ग्रामीण पर्यटन योजनाओं के तहत निर्माण पर 40% की सब्सिडी
  • मेघालय: ₹10 लाख से कम के प्रोजेक्ट्स के लिए कुल 70% तक की सब्सिडी 
  • उत्तराखंड: 25-33% कैपिटल सब्सिडी के साथ 5 वर्षों के लिए ब्याज सब्सिडी
  • असम और अरुणाचल प्रदेश: 30% तक कैपिटल सब्सिडी के साथ बिजली और स्टांप ड्यूटी में लाभ

अहूजा ने आगे बताते हैं, “सबसे प्रभावी रणनीति इन लाभों में कैपिटल सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी और कम लागत वाली फंडिंग को एक साथ जोड़ना है, ताकि शुरुआती निवेश कम हो सके और रिटर्न में सुधार हो.”

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पंजीकरण और विज़िबिलिटी

पर्यटन मंत्रालय का NIDHI (नेशनल इंटीग्रेटेड डेटाबेस ऑफ हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री) पोर्टल होमस्टे के स्वैच्छिक पंजीकरण की अनुमति देता है. हालांकि यह देश भर में अनिवार्य नहीं है, लेकिन लिस्टेड होने से विज़िबिलिटी बढ़ती है, खासकर सरकारी दौरों या पर्यटन के चरम सीजन के दौरान. हालांकि, गोवा, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और केरल जैसे कुछ राज्यों में अनुपालन और मानकीकरण के लिए पंजीकरण अनिवार्य है.

रिटायर्ड लोगों और हाउसवाइव्स के लिए होमस्टे चलाना कमाई का एक बेहतरीन जरिया है. इसमें काम शुरू करना बहुत आसान है और बिना किसी बड़ी दौड़-धूप के घर बैठे हर महीने बंधी-बधाई इनकम होने की अच्छी संभावना रहती है. मेजबान खुद तय कर सकते हैं कि उन्हें कब और कितने मेहमानों को रखना है. घरेलू पर्यटन और 'एक्सपीरियंस ट्रेवल' का चलन बढ़ रहा है.

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