पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता को पिछले कुछ सालों में कई उपनाम दिए गए हैं. इस महानगर के नागरिक इसे प्यार से "सिटी ऑफ जॉय" कहते हैं. वहीं, ब्रिटिश लेखक रुडयार्ड किपलिंग ने इस शहर के प्रति कम सहानुभूति दिखाते हुए इसे "द सिटी ऑफ ड्रेडफुल नाइट" कहा था.प
पश्चिम बंगाल के चुनाव के दौरान इस शहर को एक नया उपनाम मिला है. दूसरे चरण के अपने प्रचार अभियान के पहले दिन, बुधवार को उत्तर दमदम में एक रैली को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया कि माकपा (CPI-M) और सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के संरक्षण में कोलकाता "झोपड़पट्टी का शहर" बनकर रह गया है.
अमित शाह के इस बयान पर सियासी घमासान छिड़ना तय था और हुआ भी वही. तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने शाह के इस आरोप पर पलटवार करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए लिखा, "आपकी हिम्मत कैसे हुई? अमित शाह, कोलकाता को 'झोपड़पट्टियों का शहर' कहने की?"
यह भी पढ़ें: '152 में 110 सीटें जीत रहे हैं, भय जाने वाला है भरोसा आने वाला है...', बंगाल की वोटिंग पर अमित शाह का बड़ा दावा
लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या अमित शाह के इस दावे में वाकई कोई सच्चाई है?
इसमें कोई दोराय नहीं कि 'सिटी ऑफ जॉय' जैसा कि यहां के बाशिंदे इसे गर्व से पुकारते हैं. झुग्गी-झोपड़ियों से मुक्त कोई सपनों का शहर नहीं है. हकीकत इसके उलट है मुंबई, चेन्नई और नई दिल्ली जैसे महानगरों की तरह कोलकाता का नाम भी देश की सबसे बड़ी झुग्गी आबादी वाले शहरों की सूची में प्रमुखता से शुमार है.
यह एक कड़वी सच्चाई है कि भारत के सभी बड़े शहरों में झुग्गी-झोपड़ियों के समूह मौजूद हैं. यह वो स्याह पक्ष है जिसे महानगर अक्सर छिपाना पसंद करते हैं. इसलिए, केवल कोलकाता को अलग-थलग नहीं किया जा सकता. लेकिन जब बात झुग्गियों में रहने वाली आबादी के प्रतिशत की आती है, तो अन्य बड़े भारतीय शहरों की तुलना में कोलकाता कहां खड़ा है? हम इसी पर चर्चा करने जा रहे हैं.
लेकिन अमित शाह के दावे पर आंकड़े क्या कहते हैं? हमने उपलब्ध सबसे विश्वसनीय जानकारी की तुलना करने का फैसला किया, जो कि भारत की जनगणना 2011 का डेटा है. हम इस बात को स्वीकार करते हैं कि 2011 का डेटा 2026 की मौजूदा परिस्थितियों को पूरी तरह से नहीं दर्शाएगा, लेकिन अगली जनगणना के आंकड़ों में अभी देरी होने के कारण, यही सबसे व्यापक और सटीक डेटा उपलब्ध है. यह हमें कम से कम एक मोटा अनुमान लगाने में मदद करेगा.
कोलकाता की कितनी आबादी झुग्गियों में रहती है?
2011 की जनगणना के अनुसार, कोलकाता शहर में 2,011 पंजीकृत और 3,500 गैर-पंजीकृत झुग्गी बस्तियां थीं. कोलकाता की इन झुग्गियों के 300,755 घरों में लगभग 1.49 मिलियन (करीब 15 लाख) लोग निवास करते हैं. कोलकाता नगर निगम (KMC) द्वारा 2009 में प्रकाशित आंकड़े भी इसी तरह की तस्वीर पेश करते हैं, जिसके अनुसार शहर में 1.5 मिलियन लोग झुग्गियों में रहते थे.
चार मिलियन से अधिक निवासियों वाले शहर (2011 की जनगणना) में इसका मतलब यह है कि एक-तिहाई कोलकातावासी झुग्गियों या कच्ची बस्तियों में रहते हैं.
शहर की सबसे बड़ी झुग्गियों में तिलजला-तपसिया-टंगरा स्लम बेल्ट और उल्टाडांगा इलाके की बसंती कॉलोनी शामिल हैं. कुल मिलाकर, यह एक सकारात्मक रिपोर्ट कार्ड नहीं है. लेकिन जब झुग्गियों की बात आती है, तो कोलकाता भारत के अन्य बड़े महानगरीय शहरों की तुलना में कैसा प्रदर्शन करता है?
भारत में सबसे अधिक झुग्गियां किस शहर में हैं?
अब जब हमने उस शहर की तस्वीर देख ली है जिसे रुडयार्ड किपलिंग ने कभी 'द सिटी ऑफ डार्कनेस' (अंधेरे का शहर) कहा था, तो आइए अब यह भी जान लेते हैं कि देश के तीन अन्य प्रमुख महानगर मुंबई, चेन्नई और दिल्ली इस मामले में कहां खड़े हैं.
'सपनों का शहर' के नाम से मशहूर और भारत की चमकती आर्थिक राजधानी, मुंबई की आबादी 2011 की जनगणना के अनुसार 1.2 करोड़ (12 मिलियन) से अधिक है, जो इसे देश के सबसे अधिक आबादी वाले शहरों में से एक बनाती है. लेकिन इस 1.2 करोड़ की आबादी में से 52 लाख लोग (शहर की कुल आबादी का 41.84%) करीब 10 लाख से ज्यादा घरों में झुग्गी-झोपड़ियों और कच्ची बस्तियों में रहते हैं. यह शहर दुनिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्तियों में से एक, धारावी का भी ठिकाना है.
इसके बाद नंबर आता है चेन्नई का, जिसे ऑटोमोबाइल उद्योग के कारण अक्सर "भारत का डेट्रायट" कहा जाता है. 2011 की जनगणना के मुताबिक, चेन्नई की आबादी लगभग 67 लाख है. इनमें से करीब 13 लाख लोग या शहर की कुल आबादी का 28% हिस्सा 329,827 घरों में फैली झुग्गियों में रहता है. शहर की सबसे बड़ी झुग्गी बस्तियों में कन्नागी नगर और नोचिकुप्पम शामिल हैं.
यह भी पढ़ें: बंगाल में 10% बढ़ा मतदान... वोटों की ये सुनामी ममता या बीजेपी किसे पहुंचाएगी फायदा?
अब बात भारत की राजधानी की, 2011 की जनगणना के अनुसार, 1.6 करोड़ से अधिक लोग दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में रहते हैं, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े शहरों में से एक बनाता है. इनमें से 1.79 मिलियन लोग (शहर की आबादी का लगभग 15%) संजय कॉलोनी और कुसुमपुर पहाड़ी जैसी झुग्गी बस्तियों में रहते हैं.
तो आंकड़ों पर गौर करें तो, कोलकाता की लगभग 33% आबादी झुग्गियों में रहती है. इसकी तुलना में, दिल्ली की 15% और चेन्नई की 28% आबादी झुग्गियों में निवास करती है. वहीं, मुंबई की एक बड़ी आबादी, यानी 42% हिस्सा झुग्गी-झोपड़ियों में रहता है.
इसमें कोई शक नहीं कि कुल संख्या के लिहाज से कोलकाता में झुग्गियों की बड़ी आबादी है और शहर के आकार के अनुपात में भी यह काफी अधिक है. हालांकि, जैसा कि आंकड़े बताते हैं, जब हम भारत के अन्य बड़े महानगरों पर नजर डालते हैं, तो कोलकाता की स्थिति उनके समकक्ष ही है और कुछ मामलों में तो यह अन्य शहरों से बेहतर स्थिति में नजर आता है.
(रिपोर्ट: सुनक सान्याल)
शौनक सान्याल