इनकम टैक्स रिटर्न भरने की आखिरी तारीख नजदीक आ रही है. इस दौरान आईटीआर भरने के लिए फॉर्म 16 सबसे मुफीद दस्तावेज वेतनभोगियों के लिए होता है, लेकिन कई बार दो फॉर्म 16 हमारे पास हो जाते हैं.
जब आप एक ही वित्त वर्ष में दो नौकरियां बदलते हैं, तो आपको अपनी दोनों कंपनियों से फॉर्म 16 लेना होता है. लेकिन दो फॉर्म-16 होने की वजह से कई लोग आईटीआर भरते वक्त समझ नहीं पाते कि कैल्कुलेशन कैसे करें.
इस समस्या का समाधान कैसे करें? बैंकबजार डॉट कॉम के सीईओ आदिल शेट्टी बताते हैं कि दो फॉर्म 16 होने पर आईटीआर भरने के दौरान आप से किसी भी तरह की गलती न हो, इसके लिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा.
आदिल के मुताबिक जब कभी आप एक कंपनी छोड़कर दूसरी कंपनी में नौकरी करने पहुंचते हैं, तो यहां आपको पुरानी कंपनी में आपकी सैलरी, अलाउंस और टैक्स डिडक्शन की पूरी जानकारी देनी चाहिए.
इससे नई कंपनी को आपकी टैक्स देनदारी कैल्कुलेट करने में आसानी होगी. क्योंकि वे इस काम को फिर दोनों जगहों पर आपकी आय को ध्यान में रखकर पूरा करेंगे.
अगर आप ऐसा नहीं करते हैं, तो आपको खुद अपनी टैक्स देनदारी का हिसाब लगाना पड़ेगा. इससे आईटीआर भरने के दौरान आप से गलती होने की आशंका ज्यादा होती है.
मौजूदा नियोक्ता को ये सब जानकारी देने के लिए आप फॉर्म 12बी दे सकते हैं. इसमें आप सारी जानकारी दे सकते हैं. इससे आपकी मौजूदा कंपनी समेकित फॉर्म 16 तैयार कर सकेगी.
फॉर्म 26AS रखें:
फॉर्म 26एएस अपने पास जरूर रखिये. इससे आपको वित्त वर्ष के दौरान जितने भी टीडीएस कटे हैं, उनकी जानकारी मिल जाएगी. इससे आप दोनों नियक्ताओं की तरफ से काटे गए टीडीएस का मिलान आसानी से फॉर्म 16 से कर सकेंगे.
दो फॉर्म 16 होने की सूरत में आपको दोनों फॉर्म में दी गई जानकारी को जोड़ना होगा और उसके बाद ही इन्हें आईटीआर फॉर्म में एंटर करना होगा.
मान लीजिए फॉर्म 16 के Salary as per provisions contained in sec. 17(1) सेक्शन में एक फॉर्म में 2 लाख रुपये कुल आय दी गई है. वहीं, दूसरे में इस सेक्शन में 1.5 लाख रुपये है, तो आपको दोनों को जोड़ना होगा. जोड़ने के बाद इस सेक्शन में आपकी कुल आय 3.5 लाख रुपये हो जाएगी.
इसी तरह आपको अलाउंसेज से लेकर डिडक्शन समेत अन्य चीजों को भी दोनों फॉर्म में चेक करना होगा. इन्हें सही तरीके से कैल्कुलेट करने के बाद ही आईटीआर फॉर्म में दर्ज करना होगा. (सभी फोटो प्रतीकात्मक)