Hormuz Tension: तेल $110 के पार... दहशत में दुनिया, माना नहीं ईरान, तो होर्मुज में होगी नाटो की एंट्री!

NATO May Enter Hormuz: होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए ईरान तैयार नहीं और अमेरिका की नाकाबंदी जारी है. इससे बढ़ती ग्लोबल टेंशन को कम करने के लिए अब दुनिया के लिए जरूरी इस समुद्री रूट में NATO की एंट्री हो सकती है.

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होर्मुज को लेकर होने वाली है नाटो की बड़ी बैठक. (Photo: AP) होर्मुज को लेकर होने वाली है नाटो की बड़ी बैठक. (Photo: AP)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 20 मई 2026,
  • अपडेटेड 9:32 AM IST

अमेरिका-ईरान में कब बात बनेगी, दुनिया इसका इंतजार कर रही है. दूसरी ओर कच्चे तेल की कीमतें फिर से दहशत बढ़ाती हुई नजर आ रही हैं और ग्लोब टेंशन कम होने का नाम नहीं ले रही है. ये सब है US-Iran के बीच तेल-गैस आवाजाही के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रूट होर्मुज स्ट्रेट की वजह से, जिसे ईरान ने बंद कर रखा है, तो इसके आसपास अमेरिका की नाकाबंदी चल रही है. 

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इस सबसे बड़े संकट को कम करने के लिए अब होर्मुज में नाटो (NATO) की एंट्री हो सकती है. इसके कुछ सदस्य देशों का अब मानना ​​है कि अगर नाकाबंदी जारी रही और ईरान न माना, तो ऐसा करना जरूरी हो सकता है, जिससे इस समुद्री रूट से जहाजों की आवाजाही सुचारू करने में मदद मिलेगी. 

अचानक बदलने लगा नाटो का रुख
ब्लूमबर्ग ने अपनी नई रिपोर्ट में मंगलवार को NATO गठबंधन के वरिष्ठ अधिकारियों और राजनयिकों का हवाला देते हुए बताया कि नाटो इस बात पर चर्चा कर रहा है कि अगर ईरान जुलाई की शुरुआत तक स्ट्रेटिजिक समुद्री रूट होर्मुज स्ट्रेट को फिर से नहीं खोलता है, तो यहां से जहाजों को गुजरने में मदद कैसे की जाए. ये चर्चाएं ईरान से जुड़े अमेरिका-इजरायल संघर्ष में प्रत्यक्ष भागीदारी के प्रति कई यूरोपीय सदस्यों के महीनों के प्रतिरोध के बाद बड़े बदलाव का संकेत हैं, क्योंकि ट्रंप के अनुरोध को पहले कई नाटो देशों ने ठुकरा दिया था.

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अप्रैल में, नाटो के सहयोगियों ने सार्वजनिक रूप से क्षेत्र में नाकाबंदी  अभियान का समर्थन करने के लिए ट्रम्प की अपील को खारिज कर दिया था. रिपोर्ट की मानें, तो अब इस प्रस्ताव को कई नाटो देशों का समर्थन मिल चुका है, हालांकि अभी तक सर्वसम्मति से सभी का समर्थन नहीं मिला है.

'अंकारा' की बैठक में होगा फैसला
Hormuz Strait से होकर दुनिया की कुल जरूरत का करीब 20 फीसदी तेल और गैस की आवाजाही होती है और इसमें आई रुकावट के चलते तमाम देशों में तेल-गैस का संकट गहराया हुआ है. कच्चे तेल की कीमतों में इजाफे से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ रहे हैं, महंगाई भी कोहराम मचाती नजर आ रही है.

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा देश पर बमबारी शुरू करने के बाद से ईरान ने इस रूट को बंद कर दिया था. ताजा अपडेट और नाटो की एंट्री की बात करें, तो इस बड़े मुद्दे को लेकर नाटो नेताओं की 7-8 जुलाई को अंकारा में एक बैठक होने वाली है, जहां इस पर प्रमुखता से फैसला लिए जाने की उम्मीद है. 

नाटो के एक सीनियर अधिकारी ने कहा है कि हालांकि कई सहयोगी अभी भी होर्मुज में नाटो मिशन को अधिकृत करने का विरोध कर रहे हैं, लेकिन अगर आर्थिक नुकसान बढ़ता है, तो समर्थन बढ़ सकता है. नाटो सदस्य देश के एक राजनयिक ने कहा कि कई सदस्य देश होर्मुज को फिर से खोलने में मदद करने के पक्ष में हैं, हालांकि अन्य लोग संघर्ष में और अधिक उलझने को लेकर सतर्क बने हुए हैं.

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होर्मुज बंद से तेल की कीमतों में आग
होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही बाधित होने की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल जारी है. फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में Crude Oil Price 110 डॉलर प्रति बैरल के पार चल रहा है और महंगाई का जोखिम बढ़ने के लिए दुनिया दहशत में नजर आ रही है.

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध से शुरू हुई इस ग्लोबल टेंशन के बुरे असर का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि क्रूड ऑयस युद्ध-पूर्व स्तर से लगभग 50% अधिक महंगा हो गया है, जिससे न सिर्फ महंगाई का खतरा, बल्कि ग्लोबल ग्रोथ में मंदी को लेकर आशंकाएं बढ़ गई हैं.

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