Trump Tariff: टैरिफ का 'The End', जानिए क्या है वो कानून... जिसे इस्तेमाल कर ट्रंप ने दुनिया को डराया

Donald Trump का टैरिफ गैरकानूनी घोषित कर दिया गया है और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इसे लेकर ट्रंप को करारा झटका दिया है. उन्होंने IEEPA का इस्तेमाल करते बीते साल अप्रैल में टैरिफ अटैक शुरू किया था और दुनिया को डराया था.

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ट्रंप ने आईईईपीए के तहत टैरिफ लगाकर दुनिया को डराया था. (Photo: AP) ट्रंप ने आईईईपीए के तहत टैरिफ लगाकर दुनिया को डराया था. (Photo: AP)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 21 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:12 PM IST

अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ से खरबों डॉलर की कमाई के प्लान पर पानी फेर दिया है. शुक्रवार को अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए बीते साल अप्रैल में राष्ट्रपति द्वारा शुरू किए गए टैरिफ वॉर को गैरकानूनी बताते हुए इसे अवैध घोषित कर दिया है. कोर्ट ने साफ कहा है कि IEEPA राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा के तहत व्यापक वैश्विक टैरिफ लगाने का पूर्ण अधिकार नहीं देता है, जिसके जरिए उन्होंने दुनिया के तमाम देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ (Reciprocal Tariff) लगाया था. आइए जानते हैं कि ये आईईईपीए आखिर है क्या, कब अस्तित्व में आया और इसका टैरिफ कनेक्शन क्या है? 

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क्या है ये IEEPA?
इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट यानी IEEPA दरअसल, 1977 में लाया गया एक संघीय कानून है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करने के बाद कुछ ग्लोबल आर्थिक लेनदेन को विनियमित करने का अधिकार देता है. यह एक्ट उन मामलों में कार्रवाई की अनुमति देता है, जिन्हें कानून अमेरिका के लिए असामान्य और असाधारण खतरे के रूप में दर्शाता है और जो देश के बाहर से पैदा हो रहा होता है. इस कानून को पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर द्वारा कानून के रूप पेश किया गया था. 

इस कानून की जरूरत क्यों पड़ी? 
IEEPA को साल 1917 के ट्रेडिंग विद द एनिमी एक्ट के कुछ हिस्सों को बदलने के लिए डिजाइन किया गया था, व्यापक आपातकालीन शक्तियां मुहैया कराईं. अमेरिका में 1972-1974 के बीच हुए एक प्रमुख राजनीतिक घोटाले 'वाटरगेट कांड' के समय में कांग्रेस ने राष्ट्रपति के आपातकालीन अधिकार के लिए स्पष्ट सीमाएं तय करने का प्रयास किया था. 

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राष्ट्रपति IEEPA का इस्तेमाल कब करते हैं? 
आईईईपीए का इस्तेमाल अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा जिन मामलों में किया जाता है, उसके मुताबिक राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति, किसी असामान्य खतरे की पहचान और यह साबित होने पर कि इस खतरे का स्रोत विदेशी है. या फिर खतरा राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति या इकोनॉमी से जुड़ा हो सकता है. ऐसे मामलों में राष्ट्रपति उस खतरे से जुड़े खास आर्थिक लेन-देन को विनियमित या बैन कर सकते हैं. 

IEEPA के तहत क्या राष्ट्रपति को अधिकार 

  • US में विदेशी स्वामित्व वाली संपत्तियां फ्रीज करना 
  • फाइनेंशियल लेन-देन को बैन करना 
  • व्यापार और निवेश को प्रतिबंधित करना
  • करेंसी ट्रांसफर पर रोक लगाना 
  • व्यक्तियों, कंपनियों या विदेशी सरकारों पर बैन  

ये तमाम उपाय आमतौर पर कार्यकारी आदेशों के माध्यम से लागू किए जाते हैं और अमेरिकी वित्त विभाग द्वारा प्रवर्तित किए जाते हैं. सुप्रीम कोर्ट के अपने हालिया फैसले से यह स्पष्ट कर दिया है कि स्पष्ट वैधानिक समर्थन के बिना आपातकालीन शक्तियों का प्रयोग करके व्यापक ग्लोबल टैरिफ को उचित नहीं ठहराया जा सकता है. 
 
ट्रंप को आखिर कैसे मिली हार? 
US Supreme Court का ट्रंप टैरिफ के खिलाफ शुक्रवार को आया फैसला इस बात को उजागर करता है कि भले ही राष्ट्रपति IEEPA के तहत आर्थिक साधनों का उपयोग करके विदेशी खतरों का तेजी से जवाब दे सकते हैं, लेकिन व्यापार और टैक्सेशन पर प्राथमिक अधिकार कांग्रेस के पास ही रहता है. आईईईपीए एक शक्तिशाली प्रतिबंध कानून है, लेकिन कोर्ट ने संकेत दे दिया है कि इसका इस्तेमाल व्यापक टैरिफ नीति (Global Tariff Policy) के लिए एक खुली छूट के रूप में नहीं किया जा सकता है. यानी ये एक इमरजेंसी बैन एक्ट है, न कि एक सामान्य व्यापार कानून. 

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