Moody's On Trump Tariff: 'चीन फायदे में, लेकिन भारत...', मूडीज ने बताया ट्रंप के 15% टैरिफ से क्या बदलेगा

Donald Trump ने सुप्रीम कोर्ट में टैरिफ पर मिली हार के बाद पहले 10% और फिर इसे बढ़ाकर 15% Global Tariff लगा दिया. मूडीज ने कहा है कि अमेरिका में टैरिफ घमासान के चलते चीन को फायदा होगा, जबकि कोरिया और ताइवान के लिए भी अनुकूल है.

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ट्रंप के 15% टैरिफ पर मूडीज ने जारी की रिपोर्ट. (Photo: Reuters) ट्रंप के 15% टैरिफ पर मूडीज ने जारी की रिपोर्ट. (Photo: Reuters)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 24 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:52 PM IST

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप (US Supreme Court Ruling On Trump Tariff) के टैरिफ को गैरकानूनी करार देते हुए फैसला सुनाया. इसके साथ ही दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति पद पर काबिज होने के बाद अप्रैल 2025 में दुनिया के तमाम देशों पर IEEPA के तहत लगाए गए उनके Reciprocal Tariff रद्द हो गए. इसके बाद ट्रंप ने गुस्से में एक दूसरी धारा 122 का इस्तेमाल करते हुए पहले 10% और फिर 15% का ग्लोबल टैरिफ बम (Global Tariff Bomb) फोड़ दिया.

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अब इसके असर को लेकर ग्लोबल एजेंसी मूडीज ने रिपोर्ट जारी की है. Moody's ने इसमें बड़ी बात कहते हुए बताया कि इन घटनाक्रमों ने अमेरिकी व्यापार रणनीति में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिसमें भारत और इंडोनेशिया के साथ उसके समझौतों में कुछ बदलाव दिख सकता है. दरअसल, मूडीज के मुताबिक, India-Indonesia के साथ हुई डील के बाद अब इन देशों पर कितना टैरिफ लागू होगा, इसे लेकर अभी भी असमंजस है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अनिश्चितता
मूडीज़ एनालिटिक्स (Moody's Analytics) ने मंगलवार को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा कि ट्रंप द्वारा प्रस्तावित 15% का एकसमान टैरिफ (Trump 15% Tariff) कई एशिया-प्रशांत अर्थव्यवस्थाओं को अपेक्षाकृत राहत देने वाला साबित सकता है, जिन पर पहले से ही काफी अधिक टैरिफ लागू थे. इनमें चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के अधिकांश देश शामिल हैं. हालांकि, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने वाशिंगटन की व्यापार रणनीति में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिसमें भारत और इंडोनेशिया के साथ उसके बदलते व्यापार समझौते भी शामिल हैं.

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टैरिफ बढ़ाने के लिए कोशिश जरूर करेंगे ट्रंप!
मूडीज़ की मानें, तो 15% टैरिफ चीन और साउथ ईस्ट एशिया की तमाम इकोनॉमी के लिए अनुकूल होगा, जबकि इससे विपरीत जापान, साउथ कोरिया और ताइवान जैसे देशों पर इसका प्रभाव सीमित रहने की उम्मीद है, क्योंकि उन पर पहले से ही लगभग 15% का बेस टैरिफ लागू है. एजेंसी ने कहा, उम्मीद है कि Donald Trump टैरिफ बढ़ाने के लिए अन्य कानूनी रास्ते अपनाएंगे.

रिपोर्ट में कहा गया कि ये आश्चर्य की बात नहीं होगी, कि US Tariff बीते शुक्रवार यानी सु्प्रीम कोर्ट के फैसले से पहले के स्तर के करीब पहुंच जाएं. अपने आउटलुक में उसने चेतावनी देते हुए बताया है कि ट्रेड फ्लो बाधित रह सकता है. अनिश्चितता और परिचालन संबंधी अड़चनें बनी रह सकती हैं और कंपनियां पहले से भुगतान किए गए टैरिफ के रिफंड की मांग कर सकती हैं. 

India-US डील पर क्या असर
मूडीज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अमेरिका की तमाम व्यापारिक वार्ताओं में जटिलता देखने को मिल सकती है. खासतौर पर इससे भारत और इंडोनेशिया के साथ हुई हालिया ट्रेड डील में बदलाव की संभावना बन रही है. भारत से डील के तहत रूसी तेल (Russian Oil) की खरीद बंद करने की समयसीमा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे अभी तक तय नहीं हुए हैं.

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इस अनिश्चितता का तत्काल राजनयिक प्रभाव इस तरह दिखा है, कि भारतीय वार्ताकारों की टीम India-US Trade Deal के कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए 3 दिनों की बैठक के लिए अमेरिका जाने वाली थी, लेकिन बैठक SC के फैसले के बाद स्थगित कर दी गई, क्योंकि पॉलिसी मेकर अब बदलती US Tariff व्यवस्था के बीच भू-राजनीतिक विचारों, एनर्जी इंपोर्ट और निर्यात बाजारों में पहुंच को संतुलित करने का प्रयास कर रहे हैं.

Moody's के मुताबिक, तीन दिवसीय बैठक स्थगित करने को पीछे हटना नहीं, बल्कि एक रणनीतिक पुनर्समायोजन (Strategic Recalibration) बताया जा रहा है. दरअसल, भारत स्पष्ट करना चाहता है कि 15% Tariff एक अतिरिक्त शुल्क है या एक अस्थायी विकल्प, और क्या US Congress इसे 150 दिनों के बाद मंजूरी देगी, संशोधित करेगी या समाप्त होने देगी. 

अमेरिका का दबदबा हुआ कम
मूडीज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के ट्रंप टैरिफ पर आए फैसले से अमेरिका की किसी विशेष देश पर टैरिफ लगाने की क्षमता सीमित हो गई है, क्योंकि वह बातचीत में इसका इस्तेमाल नहीं कर सकता. इस प्रतिबंध से द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं में अमेरिका का प्रभाव कम हो सकता है, जिसमें Donald Trump और चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच आगामी हफ्तों में होने वाली संभावित महत्वपूर्ण बैठकें शामिल हैं. रिपोर्ट की मानें, तो कुछ सरकारें अमेरिका के साथ व्यापार समझौतों में देरी कर सकती हैं, लेकिन ये भी लग रहा है कि वे और अधिक दंडात्मक टैरिफ के डर से पूरी तरह से समझौता रद्द नहीं करेंगी.

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