सितंबर में 8 महीने की ऊंचाई पर पहुंची खुदरा महंगाई, अगस्त का IIP ने​गेटिव

खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने से खुदरा मुद्रास्फीति सितंबर महीने में बढ़कर 7.34 फीसदी रही. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर अगस्त में 6.69 फीसदी थी. अगस्त महीने के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP)  में 8 फीसदी की गिरावट देखी गई. 

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खाने-पीने के सामान के दाम बढ़े खाने-पीने के सामान के दाम बढ़े

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 13 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 8:59 AM IST
  • सितंबर में खुदरा महंगाई आठ महीने के उच्च स्तर पर
  • खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने से 7.34% हुई महंगाई
  • अगस्त में औद्योगिक उत्पादन 8 फीसदी गिरा

खाने-पीने के सामान का दाम बढ़ने से सितंबर महीने में खुदरा महंगाई की दर बढ़कर 7.34 फीसदी हो गई जो पिछले आठ महीने में सबसे ज्यादा है. दूसरी तरफ, अगस्त महीने के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP)  में 8 फीसदी की गिरावट देखी गई. 

खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने से खुदरा मुद्रास्फीति सितंबर महीने में बढ़कर 7.34 फीसदी रही. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर अगस्त में 6.69 फीसदी और सितंबर 2019 में यह 3.99 फीसदी थी. इसके पहले खुदरा महंगाई सबसे ज्यादा जनवरी 2020 में 7.59 फीसदी थी. 

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खाद्य वस्तुओं के दाम में तेजी 

सरकार द्वारा सोमवार को जारी आंकड़े के अनुसार खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर सितंबर में 10.68 फीसदी थी जो अगस्त में 9.05 फीसदी के स्तर पर थी. भारतीय रिजर्व बैंक नीतिगत दर पर विचार करते समय मुख्य रूप से खुदरा महंगाई पर गौर करता है. 

औद्योगिक उत्पादन अगस्त में 8% गिरा

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक विनिर्माण यानी मैन्युफैक्चरिंग, खनन और विद्युत क्षेत्र का उत्पादन कम रहने से अगस्त माह में औद्योगिक उत्पादन में 8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के मुताबिक अगस्त 2020 में विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादन में 8.6 फीसदी, खनन क्षेत्र के उत्पादन में 9.8 फीसदी और बिजली क्षेत्र के उत्पादन में 1.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. 

कोरोना संकट का असर 

अगस्त 2019 में आईआईपी में 1.4 फीसदी की गिरावट आई थी. सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘कोविड- 19 महामारी फैलने के बाद के आईआईपी आंकड़ों की महामारी से पहले के महीनों के आंकड़ों के साथ तुलना करना उचित नहीं होगा.'  इसमें कहा गया है, ‘प्रतिबंधों में धीरे.धीरे ढील दिये जाने के साथ ही आर्थिक गतिविधियों में उसी के अनुरूप सुधार देखा गया है. यह सुधार अलग स्तर पर और आंकड़ों की रिपोर्टिंग के स्तर पर भी देखा गया है. ’

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