फिर से तेल की कीमतें तेजी से ऊपर जाने लगी हैं, क्योंकि ग्लोबल 20 फीसदी एनर्जी फ्लो वाला रास्ता बंद है और किसी को भी वहां से गुजरने की अनुमति नहीं दी गई है. भारतीय जहाजों को भी रोका गया है. अमेरिका का दावा है कि उसने पूरी तरह से नाकाबंदी लगा रखी है. वहीं ईरान भी इसे खोलने को तैयार नहीं हो रहा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि अगर कोई जहाज उस रास्ते से होकर गुजरता है तो तुरंत ही उड़ा दो, पूछने की भी आवश्यकता नहीं है. इन सभी चीजों के बाद एक बार फिर से होर्मुज को लेकर ईरान-अमेरिका में जंग जैसे हालात बन रहे हैं. वहीं ग्लोबल तेल की सप्लाई बाधित होने से आयातक देश परेशान हैं, जिस कारण कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं.
लगातार पांचवें दिन से कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा देखा जा रह है. यह तेजी ईरान द्वारा होर्मुज में एक मालवाहक जहाज पर चढ़ते कमांडो के फुटेज जारी करने के बाद आया है, साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि इसकी एयर डिफेंस सिस्टम ने होर्मुज के पास दुश्मन के ठिकानों पर हमला किया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान ने दो सप्ताह के युद्धविराम के दौरान अपने हथियारों के भंडार को थोड़ा बढ़ाया होगा, लेकिन उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना इसे एक दिन के भीतर बेअसर कर सकती है.
कितनी बढ़ गई कच्चे तेल की कीमत
इस घटना के बाद ब्रेंट क्रूड फ्यचर 1.23 डॉलर या 1.17% चढ़कर, 0107 GMT तक 106.3 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि WTI क्रूड ऑयल 1.07 डॉलर, या 1.12% बढ़कर $96.92 प्रति बैरल हो गया. ईरान पर एयर डिफेंस गतिविधि की रिपोर्ट और ईरान के भीतर कट्टरपंथियों और नरमपंथियों के बीच सत्ता संघर्ष के संकेतों के बाद दोनों बेंचमार्क पहले ही गुरुवार को 3% से ज्यादा चढ़ गए थे, जो लगभग 5 डॉलर प्रति बैरल चढ़े थे.
फिर जंग की आहट
तेल की कीमतों में तेजी किसी बढ़े घटना का भी संकेत हो सकती है. क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता नहीं हो पा रही है, दोनों देश अपनी बातचीत की स्थिति को मजबूत करने के लिए आर्थिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं. ईरान इस बात पर जोर दे रहा है कि जहाज होर्मुज से गुजरने से पहले ईरान की अनुमति लें, जबकि ट्रंप का दावा है कि इस रास्ते पर अमेरिका ने पूरी तरह से कंट्रोल कर रखा है. साथ ही अमेरिकी नौसेना ने ईरानी पोर्ट्स और जहाजों को निशाना बनाकर नाकाबंदी कर रखी है.
अलग से, इज़राइल के रक्षा मंत्री ने कहा कि यरूशलेम ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू करने के लिए अमेरिकी मंजूरी का इंतजार कर रहा है. ट्रंप ने कहा है कि अभी इजरायल और लेबनान अपने संघर्ष विराम को तीन सप्ताह तक बढ़ाने पर सहमत हुए हैं. इन सभी अपडेट के बाद यह स्पष्ट तौर पर दिख रहा है कि हालात काफी तनावपूर्ण हैं.
कहां तक जा सकती है कच्चे तेल की कीमतें?
रॉयटर्स की रिपोर्ट में हाईटॉन्ग फ्यूचर्स नोट के हवाले से कहा गया है कि युद्धविराम अब फिर से नए जंग की ओर जा रहा है. इसमें कहा गया है कि अगर अप्रैल के अंत तक अमेरिका-ईरान वार्ता फेल रहती है और लड़ाई फिर से शुरू हो जाती है, तो तेल की कीमतें साल के लिए नई ऊंचाई पर पहुंच सकती हैं.
मैक्वेरी का अनुमान है कि निकट अवधि में कच्चे तेल की कीमतें $85 से $90 के बीच सपोर्ट बना सकता है. आपूर्ति की स्थिति में सुधार होने पर धीरे-धीरे $110 तक बढ़ोतरी हो सकती है. इसने यह भी चेतावनी दी कि अप्रैल के दौरान लंबे समय तक रुकावट से ब्रेंट की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं.
नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने कहा कि होर्मुज के ज्यादा समय तक बंद होने से कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर से 150 डॉलर के बीच हो सकती हैं.
आजतक बिजनेस डेस्क