इसे डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की मजबूरी कहें या कुछ और, जिस रूसी तेल की खरीद को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति भड़क जाते थे और भारत समेत Russian Oil खरीद करने वाले देशों पर टैरिफ बम (Tariff Bomb) फोड़ते हुए नजर आते थे, अब उनका रुख बदला-बदला नजर आ रहा है. न सिर्फ ट्रंप, बल्कि उनके मंत्रियों के भी सुर बदल चुके हैं. ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल के युद्ध से दुनिया में बड़ा तेल संकट खड़ा होने के बाद ये बदलाव देखने को मिला है. खासतौर पर भारत की रूसी तेल खरीद को अमेरिका अब जरूरी करार दे रहा है.
अमेरिकी राजदूत ने की भारत की तारीफ
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर (US Ambassador Sergio Gor) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) पर एक पोस्ट में लिखा, 'दुनिया भर में तेल की कीमतें स्थिर रखने में भारत एक बड़ा पार्टनर रहा है. US मानता है कि रूस से तेल की लगातार खरीद इसी कोशिश का एक हिस्सा है. भारत तेल के सबसे बड़े कंज्यूमर और रिफाइनर में से एक है. अमेरिकियों और भारतीयों के लिए मार्केट में स्थिरता लाने के लिए हमारा मिलकर काम करना जरूरी है.'
Trump ने भी दिये थे ये सिग्नल
मिडिल ईस्ट युद्ध और गहराए तेल संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ने दो दिन पहले ही बड़े संकेत दिए थे. उन्होने तेल की किल्लत को रोकने के लिए कहा था कि वे कुछ देशों पर लगे प्रतिबंध हटा रहे हैं. ऐसे में ये चर्चाएं भी तेज हो गईं हैं कि क्या रूसी तेल पर लगा बैन (US May Lifts Russian Oil Ban) भी अमेरिका हटा सकता है. ईरान युद्ध के चलते तेल की कीमतों में लगी आग के बीच रिपोर्ट आईं कि Donald Trump रूस पर लगे तेल प्रतिबंधों में अस्थाई रूप से ढील देने पर विचार कर रहे हैं. फ्लोरिडा में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा था कि उनका प्रशासन तेल बाजार (Oil Market) को स्थिर करने के प्रयास कर रहा है और इसके तहत कुछ देशों पर लगे प्रतिबंध हटा रहा है.
ट्रंप के बयान को देखें, तो उन्होंने कहा था कि, हमने कुछ देशों पर प्रतिबंध लगा रखे हैं, जिन्हें होर्मुज स्ट्रेट में शांति बहाल होने तक प्रतिबंध हटा रहे हैं. इस कदम का उद्देश्य Middle East War के कारण तेल आपूर्ति में आई बाधाओं के बीच Global Oil Supply को बढ़ावा देना है. दुनिया में तेल की कमी नहीं होने देंगे.'
रूसी तेल को लेकर भारत ने झेला था टैरिफ
गौरतलब है कि रूसी तेल का ही मुद्दा है, जिसे लेकर अमेरिका ने भारत पर 50% का हाई टैरिफ लगाया था और ट्रंप व उनके मंत्रियों ने भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद को यूक्रेन युद्ध में पुतिन की आर्थिक मदद करना करार दिया था. बता दें कि बीते अप्रैल 2025 में जब ट्रंप ने टैरिफ बम फोड़ना शुरू किया था, तो भारत पर 25% का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था, लेकिन अगस्त महीने में Russian Oil Import को मुद्दा बनाकर इस टैरिफ को दोगुना करते हुए 50% कर दिया था. हालांकि, अब स्थिति बिल्कुल बदली नजर आ रही है.
दीपक चतुर्वेदी