पीके से जनसुराज के तीन नेताओं का मोहभंग? आरसीपी सिंह क्या करेंगे घर वापसी

बिहार में फिर से सियासी हलचल तेज हो गई है. विधानसभा चुनाव के बाद प्रशांत किशोर से जन सुराज पार्टी के नेताओं का मोहभंग होने लगा है. इस कड़ी में आरसीपी सिंह का मन बदल रहा है और जेडीयू में फिर से वापसी के संकेत दे रहे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वे घर वापसी करेंगे?

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आरसीपी सिंह की क्या घर वापसी होगी (Photo-ANI) आरसीपी सिंह की क्या घर वापसी होगी (Photo-ANI)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 15 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:40 PM IST

बिहार विधानसभा चुनाव के बाद सियासी सीन पूरी तरह से बदल गया है. राज्य की सियासत में लालू यादव और नीतीश कुमार का विकल्प बनने के मकसद से उतरे प्रशांत किशोर पूरी तरह फेल रहे. बिहार की 243 सीटों में से पीके की जन सुराज पार्टी ने 238 सीट पर उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 235 उम्मीदवारों की जमानत जब्त गई थी.

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जन सुराज पार्टी का एक भी उम्मीदवार चुनाव जीत नहीं सका, जिसके चलते पार्टी नेताओं का अब प्रशांत किशोर से मोहभंग होने लगा है. जन सुराज के प्रमुख चेहरों में से एक भोजपुरी गायक रितेश पांडे ने पार्टी छोड़ दी है तो मनीष कश्यप फिर से यूट्यूबर बन गए हैं. इसके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह ने भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तारीफ करके 'घर वापसी' करने के संकेत दे दिए हैं.

आरसीपी सिंह के बदलते सियासी तेवर को देखते हुए नीतीश कुमार की अगुवाई वाली जेडीयू ने उनके लिए अपने दरवाजे भी खोल दिए हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या आरसीपी सिंह फिर से जेडीयू का दामन थामेंगे?

आरसीपी सिंह का मन बदल रहा है?

नौकरशाह से राजनेता बने आरसीपी सिंह कभी नीतीश कुमार के राइट हैंड और सबसे भरोसेमंद माने जाते थे. जेडीयू कोटे से दो बार राज्यसभा सदस्य रहे और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी संभाली, लेकिन राजनीतिक महात्वकांक्षा में उनके रिश्ते खराब हो गए. आरसीपी ने 2022 में जेडीयू छोड़कर बीजेपी में गए और उसके बाद अपनी पार्टी बनाई, लेकिन बाद में प्रशांत किशोर की जन सुराज का दामन थाम लिया.

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आरसीपी ने अपनी बेटी लता सिंह को जनसुराज पार्टी से नालंदा की अस्थावां विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़वाया, लेकिन जेडीयू से जीत नहीं सकीं. चुनाव के दो महीने के बाद आरसीपी सिंह का मन बदल रहा है. उन्होंने रविवार को बिहार के विकास के लिए सीएम नीतीश कुमार को दिल से धन्यवाद दिया. रविवार को पटना में कुर्मी समाज के द्वारा पटेल भवन में आयोजित 'चूड़ा-दही' भोज के दौरान आरसीपी सिंह ने कहा था, 'नीतीश जी मेरे अभिभावक हैं.

आरसीपी सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार ने राज्य में जिस तरह के विकास कार्य किए हैं, वह ऐतिहासिक है.' आरसीपी सिंह ने नीतीश कुमार के साथ अपनी 25 साल की दोस्ती का भी जिक्र किया तो उसके सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं. ऐसे में कहा जा रहा है कि आरसीपी का मन बदल रहा है और दोबारा के जेडीयू में आने की कोशिश में है.

आरसीपी सिंह क्या करेंगे 'घर वापसी'?

आरसीपी सिंह के फिर से जेडीयू में आने की अटकलें तेज हो गईं. ऐसे में आरसीपी सिंह से जेडीयू में वापसी को लेकर सीधा सवाल पूछा गया, तो उन्होंने साफ तौर पर न हां कहा, न ना. उनका जवाब था यह आपको जल्द ही पता चल जाएगा. ऐसे बयान अक्सर बड़े संकेत माने जाते हैं. अगर वापसी की कोई संभावना नहीं होती, तो वे सीधे इनकार भी कर सकते थे.

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वहीं, जेडीयू के विधायक श्याम रजक ने आरसीपी सिंह को घर वापसी का भी न्योता दे दिया. मकर संक्रांति के मौके पर पूर्व मंत्री और जेडीयू विधायक रत्नेश सदा ने दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया था, जिसमें श्याम रजक ने शिरकत किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि आरसीपी सिंह अगर जेडीयू में आते हैं तो उनका स्वागत है. उन्होंने कहा कि 'अगर वह वापस आना चाहें तो पार्टी के दरवाजे उनके लिए खुले हैं. आरसीपी सिंह गए ही कब थे? जेडीयू उनका घर है. वह जब चाहें आ सकते हैं.

आरसीपी सिंह के जेडीयू में शामिल होने पर जेडीयू नेताओं का साफ कहना है कि जो भी व्यक्ति नीतीश कुमार के नेतृत्व में आस्था रखता है, पार्टी के संविधान में विश्वास करता है और जेडीयू से जुड़ना चाहता है उसका स्वागत है. किसी एक व्यक्ति को लेकर पार्टी सार्वजनिक तौर पर टिप्पणी करने से बच रही है, लेकिन दरवाजे खुले होने का संदेश साफ है.

आरसीपी सिंह सारे दांव खेल चुके हैं?

आरसीपी सिंह एक समय नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद सहयोगी थे. आरसीपी सिंह को सियासत में नीतीश कुमार ही लेकर आए थे और उन्हें फर्श से अर्श तक पहुंचने का काम किया है. इसकी वजह यह थी कि आरसीपी सिंह और नीतीश कुमार एक ही जिले नालंदा से और एक ही जाति कुर्मी समुदाय से आते हैं. आरसीपी सिंह साल 2005 से लेकर 2010 तक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मुख्य सचिव भी रहे, उससे पहले नीतीश के रेल मंत्री रहते हुए काम किया.

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जातिगत समीकरण के चलते नीतीश कुमार ने आरसीपी सिंह को सियासी तौर पर भी आगे बढ़ाया. 2010 में आरसीपी आईएएस से इस्तीफा दिया तो नीतीश कुमार ने उन्हें राज्यसभा भेजा. इसके बाद दोबारा से 2016 में राज्यसभ भेजा तो उनका कार्यकाल 2022 तक रहे. इस दौरान जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रहे. नीतीश कुमार को चुनौती देने की कोशिश की तो अगस्त 2022 में आरसीपी सिंह को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.

जेडीयू से बाहर होते ही फेल हो गए

जेडीयू छोड़ने के बाद आरसीपी सिंह सारे सियासी दांव आजमाया, लेकिन सफल नहीं रहे. जेडीयू से अलग होने के बाद सबसे पहले बीजेपी का दामन थामा, लेकिन बीजेपी ने उन्हें बहुत ज्यादा सियासी तवज्जे नहीं दी. इसके बाद उन्होंने बीजेपी छोड़कर अपनी पार्टी बनाई, जिसे 'आप सबकी आवाज' नाम दिया. आरसीपी सिंह ने अपनी पार्टी बनकर भी कुछ हासिल नहीं कर सके तो उन्होंने मई 2025 को प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी में विलय कर दिया.

बता दें कि जेडीयू में निकाले जाने के बाद आरसीपी सिंह क्या बिहार की सियासत में नीतीश कुमार की तरह खुद को एक कुर्मी नेता के तौर पर स्थापित करने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन फेल रहे. आरसीपी भले ही जेडीयू के अध्यक्ष रहे हों या फिर केंद्र में मंत्री, लेकिन न तो कभी कुर्मी नेता के तौर पर उनकी पहचान थी औ न ही जनाधार वाले नेता नहीं की. ऐसे में नीतीश कुमार को उस तरह की चुनौती कभी नहीं दे पाए, जैसा कि कोई जनाधार वाला नेता दे सकता था.

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नीतीश कुमार समाजावदी आंदोलन से निकले हुए नेता हैं, जो जमीनी संघर्ष और अपनी राजनीतिक समझ बूझ के आधार पर आगे बढ़े हैं. नीतीश भले ही अपने दम पर सत्ता न हासिल कर सकें, लेकिन उनके बिना भी किसी की सरकार बनने वाली स्थिति नहीं है. आरसीपी सिंह कुर्मी समुदाय से जरूर हैं, लेकिन नीतीश कुमार की तरह अपनी सियासी जड़े नहीं जमा सके. यही वजह है कि अब अपनी घर वापसी के लिए संकेत दे रहे हैं तो जेडीयू भी उन्हें लेने के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं.

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