मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और नामांकन दाखिल करने के फैसले से जनता दल (यूनाइटेड) में भारी आक्रोश है. निर्णायक बैठक से ठीक पहले नीतीश कुमार आवास के बाहर सैकड़ों नेता, विधायक और कार्यकर्ता जुट गए हैं. बताया जा रहा है कि कई कार्यकर्ता फूट-फूटकर रो रहे हैं, जबकि कुछ कार्यकर्ता नीतीश के समर्थन में नारेबाजी कर रहे हैं.
नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद शुक्रवार शाम को पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है. पर इस निर्णायक बैठक से पहले प्रवक्ता और एमएलसी नीरज कुमार ने कहा, 'नीतीश कुमार ने अपने फैसले के बारे में जानकारी देने के लिए आज शाम बैठक बुलाई है. विधानमंडल दल की बैठक में वह अपने फैसले के पीछे के कारण बताएंगे, लेकिन इस फैसले से पार्टी में आक्रोश भी है और दुख भी है.'
'नीतीश को मिला था जनादेश'
जेडीयू प्रवक्ता ने कहा कि विधानमंडल दल की बैठक में नीतीश कुमार विधायक, सांसद और विधान परिषद सदस्य अपनी पीड़ा व्यक्त करेंगे. लेकिन पार्टी में उनके राज्यसभा जाने से आक्रोश है और दुख भी है.'
उन्होंने जोर देकर कहा, 'नीतीश कुमार को 5 साल का जनादेश मिला था और नारा था '2025 से 30 फिर से नीतीश'. उनका बीच में न होना एनडीए गठबंधन के लिए भी बड़ी चुनौती साबित हो सकता है.'
'मैं हूं न...'
उन्होंने नीतीश के फैसले पर बोलते हुए कहा कि नीतीश कुमार अपना फैसला बदलेंगे या नहीं यह तो वही तय करेंगे. पर नीतीश कुमार, जब बीच की अवधि में मुख्यमंत्री नहीं रहे तो उनके तरफ से कह गए तीन शब्द 'मैं हूं ना' ने बिहार को भरोसा दिया.
'तेजस्वी को गंभीरता से नहीं लेते'
जेडीयू प्रवक्ता ने दावा किया कि नीतीश कुमार ने बिहार का भरोसा जीता है. नीतीश कुमार पर कोई दबाव काम नहीं कर सकता. उन्होंने आरेजडी के ऑफर पर बोलते हुए कहा कि तेजस्वी यादव शैडो सीएम बनकर घूम रहे हैं. उनकी बातों को हम गंभीरता से नहीं लेते.
उन्होंने आरजेडी पर तंज करते हुए कहा कि भले ही आरजेडी सत्ता के सपने देख रही हो, लेकिन उनके साथ जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता.
शशि भूषण कुमार