मधेपुरा में जन्मे सिर से जुड़े जुड़वां बच्चे, एक की मौत, दूसरा जिंदगी से लड़ रहा जंग

बिहार के मधेपुरा में एक निजी अस्पताल में महिला ने सिर से जुड़े जुड़वां बच्चों को जन्म दिया, जिनमें से एक मृत पैदा हुआ और दूसरा जीवित है. डॉक्टरों के अनुसार यह 'कॉनजॉइन्ड ट्विन्स' का बेहद दुर्लभ मामला है. जन्म के बाद अस्पताल में लोगों की भारी भीड़ जुट गई. जीवित बच्चा डॉक्टरों की निगरानी में है और उसकी स्थिति स्थिर बनी हुई है.

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मधेपुरा में जन्मे सिर से जुड़े जुड़वां बच्चे मधेपुरा में जन्मे सिर से जुड़े जुड़वां बच्चे

aajtak.in

  • मधेपुरा,
  • 05 जुलाई 2025,
  • अपडेटेड 11:41 PM IST

बिहार के मधेपुरा से एक दुर्लभ और चौंकाने वाली घटना सामने आई है जिसने पूरे क्षेत्र को हैरत में डाल दिया है. जिले के नायडू मेडिकेयर एंड रिसर्च सेंटर में शुक्रवार को एक महिला ने सिर से जुड़े जुड़वां बच्चों (Conjoined Twins) को जन्म दिया, जिनमें से एक बच्चा मृत पैदा हुआ, जबकि दूसरा जीवित है.

जानकारी के अनुसार, सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज थाना क्षेत्र के परसाही गांव की रहने वाली एक गर्भवती महिला को अचानक तेज प्रसव पीड़ा हुई, जिसके बाद परिजनों ने उन्हें मधेपुरा स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया. अस्पताल की स्त्री-प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. नायडू कुमारी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत सर्जरी करने का फैसला किया.

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डिलीवरी के दौरान जब शिशुओं का जन्म हुआ तो डॉक्टर और स्टाफ स्तब्ध रह गए. महिला ने एक ही सिर से जुड़े दो बच्चों को जन्म दिया था, जिनके शरीर अलग-अलग थे. इस दुर्लभ स्थिति को मेडिकल की भाषा में "क्रैनियोपैगस ट्विन्स" (Craniopagus twins) कहा जाता है, जो लाखों में एक बार होता है.

डॉ. नायडू ने बताया कि 'ऐसे केस अत्यंत जटिल होते हैं और जन्म से पहले अल्ट्रासाउंड में अगर इसकी पुष्टि हो जाए तो विशेष तैयारी की जाती है, लेकिन यहां महिला अचानक दर्द के साथ आई और स्थिति गंभीर थी, जिससे तुरंत सर्जरी करनी पड़ी.'

दुर्भाग्यवश, जुड़वां बच्चों में से एक की जन्म के समय ही मृत्यु हो गई, जबकि दूसरा बच्चा जीवित है और डॉक्टरों की निगरानी में है. बच्चे की स्थिति अभी स्थिर बताई जा रही है. जैसे ही यह खबर फैली, अस्पताल में लोगों की भारी भीड़ जुट गई.

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हर कोई इस अनोखी जन्म की घटना को देखने के लिए उत्सुक नजर आया. मामले की जानकारी मेडिकल विशेषज्ञों तक भेजी गई है और भविष्य में जीवित शिशु की देखभाल तथा इलाज के लिए विशेष टीम को भी शामिल किया जा सकता है.

 

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इनपुट - मुरारी कुमार सिंह

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