क्या कुशवाहा को रिप्लेस करेंगे पवन सिंह? बिहार राज्यसभा चुनाव में किसकी लगेगी लॉटरी

बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर चुनाव का ऐलान होते ही एनडीए की सभी सीटों पर नजर है. विधानसभा चुनाव के चलते उपेंद्र कुशवाहा का गेम बिगड़ गया है, जिसके चलते उनकी वापसी पर ग्रहण लग सकता है और पवन सिंह की एंट्री मिल सकती है.

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उपेंद्र कुशवाहा की जगह पवन सिंह क्या जाएंगे राज्यसभा (Photo-ANI) उपेंद्र कुशवाहा की जगह पवन सिंह क्या जाएंगे राज्यसभा (Photo-ANI)

रोहित कुमार सिंह

  • पटना,
  • 20 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:13 PM IST

बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर 16 मार्च को होने वाला चुनाव इस बार काफी दिलचस्प हो गए हैं. राज्य में पांच राज्य सभा सीटें अप्रैल में खाली हो रही हैं, उनमें से फिलहाल तीन एनडीए और दो आरजेडी के पास है. विधानसभा चुनाव के गणित ने राज्यसभा चुनाव का सियासी गेम पूरी तरह से बदलकर रख दिया है.  

एनडीए के कोटे से जनता दल यूनाइटेड के दो राज्य सभा सांसद हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. हरिवंश नारायण सिंह 2018 से राज्यसभा के उपसभापति हैं. रामनाथ ठाकुर फिलहाल नरेंद्र मोदी सरकार में कृषि राज्य मंत्री हैं. 

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एनडीए से ही राष्ट्रीय लोक मोर्चा राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है. वहीं, महागठबंधन से आरजेडी नेता प्रेमचंद गुप्ता और अमृतधारी सिंह का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. ऐसे में कुशवाहा की दोबारा से राज्यसभा वापसी पर ग्रहण लग सकता है तो पवन सिंह की सांसद पहुंचने की लॉटरी लग सकती है? 

बिहार का बदला सियासी गेम
बिहार विधानसभा के मौजूदा सियासी अंकगणित ने राजनीतिक तस्वीर को पूरी तरह से बदल दिया है. खास बात यह है कि उपेंद्र कुशवाहा का दोबारा राज्यसभा पहुंचना लगभग असंभव माना जा रहा है, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) अपनी दो सीटें गंवा सकती है.वहीं, एनडीए पांचों राज्यसभा की सीटों पर कब्जा जमाने की कवायद की जा रही है, जिसके लिए दावेदारी के लिए मंथन तेज कर दिया है. संभावित उम्मीदवारों के नाम को लेकर मंथन शुरू हो चुका है.

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कुशवाहा की वापसी असंभव
राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा का दोबारा से राज्यसभा पहुंचना मुश्किल है. कुशवाहा का राज्यसभा का रास्ता इस बार लगभग बंद है. कारण बिल्कुल स्पष्ट है कि उनकी पार्टी का विधानसभा में संख्या बल बेहद कम है. राज्यसभा चुनाव के लिए एक उम्मीदवार को 41 विधायकों के वोट चाहिए. कुशवाहा की पार्टी के पास सिर्फ चार विधायक हैं, जिसमें दो विधायक फिलहाल बागी हो चुके हैं. ऐसे में उपेंद्र कुशवाहा अपने दम पर राज्यसभा पहुंच नहीं सकते हैं, क्योंकि नंबर गेम से बहुत दूर हैं. 

हालांकि, कुशवाहा एक ही सूरत में राज्यसभा पहुंच सकते हैं, जब उन्हें जदयू या बीजेपी अपने कोटे से राज्यसभा भेजे. इसके अलावा एनडीए गठबंधन विशेष समर्थन देता, लेकिन इस बार दोनों जगह संभावनाएं कमजोर हैं.इसकी वजह यह है कि एनडीए में पहले से ही बड़ी संख्या में दावेदार लाइन में हैं, और सहयोगी दलों के कोटा भी सीमित हैं. इसलिए उनके दोबारा चुने जाने के आसार बहुत कम माने जा रहे हैं.

आरजेडी को उठाना होगा नुकसान
विधानसभा चुनाव ने आरजेडी के लिए सियासी जमीन तंग कर दी है. आरजेडीय के लिए राज्यसभा चुनाव कठिन है. पिछली विधानसभा में  RJD के पास अधिक विधायक थे और उसने सीटें हथियाई थीं, लेकिन वर्तमान संख्या बल बदल चुका है.बिहार विधानसभा में आरजेडी के पास अब पर्याप्त संख्या नहीं है, जिसके दम पर राज्यसभा की सीटें बचा ले. ऐसे में उसे राज्यसभ चुनाव जीतने के लिए सिर्फ महागठबंधन का नहीं बल्कि पूरे विपक्ष का समर्थन पाना होगा. 
 
महागठबंधन के भीतर समर्थन भी सीमित है.एक भी सीट जीतने के लिए विपक्ष को AIMIM, निर्दलीयों और छोटे दलों का समर्थन चाहिए, जो फिलहाल अनिश्चित है.इसलिए राजनीतिक आकलन कहता है कि आरजेडी इस बार अपनी दो राज्यसभा सीट खो देगा.

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एनडीए से कौन होगा उम्मीदवार
राज्यसभा चुनाव में एनडीए का सियासी पलड़ा भारी रह सकता है. एनडीए अपने विधायकों के दम पर चार राज्यसभ सीटें आसानी से जीत लेगी और 5वीं सीट के लिए अपना दावा मजबूत कर रही है. एनडीए के भीतर भाजपा, जदयू, लोजपा और सहयोगी दलों के बीच सीटों को लेकर संवाद अंतिम चरण में है.

बीजेपी राज्यसभा चुनाव के जरिए इस बार जातीय संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और हाई-प्रोफाइल चेहरों के मिश्रण पर काम कर रही है. ऐसे में माना जा रहा है कि भोजपुरी एक्टर और गायक पवन सिंह को राज्यसभा भेजा जा सकता है. वो बड़े जनाधार और लोकप्रियता के कारण चर्चा में है. बीजेपी उन्हें सांस्कृतिक और युवा आउटरीच के रूप में देख सकती है.

पवन सिंह के अलावा बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय मायुख को राज्यसभा भेजा जा सकता है. वो संगठन में काफी समय से सक्रिय हैं. केंद्रीय नेतृत्व का भरोसेमंद चेहरा माने जाते हैं. इसके अलाव बिहार से किसी बड़े ब्राह्मण/राजपूत नेता का नाम पर मंथन चल रहा है. जातीय प्रतिनिधित्व को बैलेंस करने की तैयारी.पार्टी आंतरिक समीकरणों के अनुसार अंतिम नाम तय करेगी.उद्योग/प्रोफेशनल बैकग्राउंड से एक बाहरी चेहरा. बीजेपी अक्सर एक सीट प्रोफेशनल्स को भी देती है.इस बार भी संभावना है.

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जेडीयू किसे भेजेगी राज्यसभा 
जेडीयू अपने कोटे से दो राज्यसभा सदस्य बना सकती है. ऐसे में रामनाथ ठाकुर का एक बार फिर से राज्यसभा में जाना तय माना जा रहा है. अतिपिछड़े समाज से आने वाले रामनाथ ठाकुर जेडीयू के सामाजिक समीकरण को सूट करता है, इसी कारण से उनका फिर से राज्यसभा जाना लगभग तय है. 

वहीं, हरिवंश नारायण सिंह को लेकर जनता दल यूनाइटेड में संशय की स्थिति है. आमतौर पर देखा गया है कि नीतीश कुमार किसी भी नेता को केवल दो बार ही राज्यसभा भेजते हैं. इसी को लेकर हरिवंश नारायण सिंह को लेकर कंफ्यूजन है, क्योंकि वह दूसरी बार राज्यसभा में है और उनका कार्यकाल समाप्त होने वाला है. 

जेडीयू उनकी जगह पर किसी नए चेहरे पर दांव खेल सकती है. माना जा रहा है है कि अल्पसंख्यक समाज से एक नाम हो सकता है. जदयू की पुरानी रणनीति सोशल बैलेंस को ध्यान में रखते हुए किसी ऐसे नाम को भेज सकती है, जो उसके सियासी समीकरण में फिट बैठता हो. 

चिराग के अरमान कैसे होंगे पूरे 
चिराग पासवान एक सीट अपने कोटे से फाइनल करने की कोशिश में हैं. चिराग पासवान की मां रीना पासवान को राज्यसभा में भेजने की चर्चा है लेकिन ऐसा तभी संभव होगा अगर विपक्ष के कुछ विधायक उनका समर्थन करें. चिराग अपने दम पर राज्यसभा सीट नहीं जीत सकते हैं. 

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5वीं सीट पर सबसे बड़ा खेल कहां है?
बिहार की पांचवी राज्यसभा सीट पर सबसे ज्यादा पेच फंसा हुआ है. NDA संख्या बल के हिसाब से 5वीं सीट भी जीत सकता है, लेकिन उसे विपक्ष के 3 विधायकों को समर्थन मिल जाता है? विपक्ष, AIMIM और निर्दलीय साथ आते हैं तो मुकाबला कड़ा हो सकता है. यहां AIMIM का रोल बेहद महत्वपूर्ण है.

AIMIM के पास 5 विधायक का प्रभावी समर्थन है. पांचवीं सीट की राजनीति में उनका समर्थन निर्णायक हो सकता है. पार्टी ने संकेत दिया है कि वह अपना उम्मीदवार भी उतार सकती है. यदि AIMIM NDA का समर्थन करती है तो NDA पांचों सीट जीत सकता है. ऐसे में बसपा और आईपी गुप्ता पर नजर है.

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