बिहार में सत्ता के नेतृत्व परिवर्तन के साथ राजनीतिक तौर-तरीके भी बदल गए हैं. इन दिनों एक नई गूंज सुनाई दे रही है, वह किसी भाषण की नहीं बल्कि 'बुलडोजर एक्शन'की. एक्शन सिर्फ अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि एक राजनीतिक संदेश है.ऐसे में सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाने के लिए बुलडोजर एक्शन होगा.
सम्राट चौधरी बुलडोकर एक्शन के जरिए बताना चाहते हैं कि बिहार में अब 'राज' बदल चुका है और शासन करने का तरीका भी. ऐसे में सवाल उठता है कि सीएम सम्राट चौधरी क्या योगी आदित्यनाथ के 'बुलडोजर मॉडल' को अपनाकर नीतीश कुमार की दशकों पुरानी 'सुशासन बाबू' वाली छवि को ओवरटेक करना चाहते हैं?
बिहार की कमान दो दशक तक नीतीश कुमार वाली रही है, लेकिन अब सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री हैं. ऐसे में सत्ता की कमान संभालने के बाद से सम्राट एक्टिव हैं और एक के बाद एक बड़ा फैसला ले रहे हैं. इस तरह नीतीश कुमार के साये से निकलकर बिहार में अपनी अलग छवि गणना चाहते हैं, जिसके लिए सीएम योगी के नक्शेकदम पर चल पड़े हैं?
बिहार में 'यूपी मॉडल' की झलक
मुख्यमंत्री बनते ही सम्राट चौधरी ने उत्तर प्रदेश की तर्ज पर बिहार में बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी है. हाल ही में पटना के कंगन घाट और अन्य इलाकों में अवैध निर्माणों पर बड़े पैमाने पर बुलडोजर चलाया गया. यह संकेत है कि वे अपनी छवि एक 'कठोर प्रशासक' के रूप में बनाना चाहते हैं,जो नीतीश कुमार के 'सुशासन बाबू' वाली छवि से काफी अलग है.
नीतीश कुमार ने 2005 से लेकर अप्रैल 2026 तक बिहार की सत्ता अपने हाथ में रखी, इस दौरान उन्होंने अपनी एक अलग छवि बनाई. नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद 15 अप्रैल 2026 को सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की कुर्सी संभाली. इसके बाद से ही एक्शन में है, जिसके लिए उन्होंने यूपी के योगी मॉडल को अपनाकर अपनी छवि गढ़ने में जुट गए हैं.
हालांकि, सम्राट ने बुलडोजर एक्शन का आगाज गृहमंत्री बनने के साथ ही शुरू कर दिया था. सम्राट चौधरी ने 31 जनवरी 2026 तक पूरे राज्य में विशेष ड्राइव चलाकर सड़कों को अतिक्रमण मुक्त बनाने का निर्देश दिया था और इसके लिए कार्रवाई भी शुरू हो गई थी. साथ ही प्रशासन ने सरकारी भूमि से अवैध कब्जे हटाने के लिए 1 अप्रैल 2026 से व्यापक और योजनाबद्ध तरीके से बुलडोजर एक्शन करने के निर्देश तक दे दिए हैं, जिसके लिए उन्होंने कहा कि किसी भी रूप में अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है.
नीतीश का 'संयम' बनाम सम्राट का 'प्रहार'
बिहार में पिछले दो दशकों से बिहार में नीतीश कुमार सुशासन वाली राजनीति रही है. नीतीश का सुशासन फाइलों, नियमों और सामाजिक सुधारों (जैसे शराबबंदी) पर टिका था. नीतीश की राजनीति आमतौर पर 'गठबंधन' और मध्यमार्गी रुख के इर्द-गिर्द रही है,लेकिन सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते ही गियर बदल दिया है. पद संभालते ही उन्होंने साफ कर दिया कि अपराधियों और भू-माफियाओं के लिए बिहार में अब 'जेल या पाताल' का रास्ता ही बचा है.
हाल ही में पटना के पॉश इलाकों से लेकर गंगा के कछार तक जिस तरह अवैध कब्जों पर बुलडोजर चला है, उसने जनता को सीधे तौर पर लखनऊ की याद दिला दी, सम्राट चौधरी यह बात जानते हैं कि बिहार की जनता अब केवल 'सुशासन' के वादे से संतुष्ट नहीं है,उसे 'त्वरित न्याय'की भूख है,ऐसे में उस नक्शेकदम पर चल रहे, जिस तरह से पिछले दिनों बीजेपी शासित राज्यों के सीएम ने योगी के बुलडोजर एक्शन को अपनाकर अपनी छवि को मजबूत नेता के तौर पर गढ़ने की कोशिश की है.
योगी के नक्शेकदम पर सीएम सम्राट
सम्राट चौधरी लंबे समय तक नीतीश कुमार के साथ रहे हैं. मुख्यमंत्री बनने के बाद से सम्राट के सामने सबसे बड़ी चुनौती नीतीश के राजनीतिक साये से बाहर निकलना था. ऐसे में योगी के बुलडोजर मॉडल को चलाकर उन्होंने यह संदेश दिया है कि यह 'एनडीए 2.0' नहीं, बल्कि 'सम्राट का बिहार' है. वे अपराधियों और भू-माफियाओं के खिलाफ सीधी कार्रवाई का संदेश दे रहे हैं.
यूपी में योगी आदित्यनाथ ने बुलडोजर को 'भ्रष्टाचार और अपराध के खिलाफ लड़ाई' का प्रतीक बनाया, जिससे उन्हें भारी जनसमर्थन मिला. सम्राट चौधरी इसी 'सक्सेस फॉर्मूले' को बिहार में दोहराकर युवाओं और कानून-पसंद मतदाताओं के बीच अपनी पैठ मजबूत करना चाहते हैं. बुलडोजर की कार्रवाई से सम्राट प्रशासन को बताना चाहते हैं कि अब फाइलों पर नहीं, बल्कि जमीन पर काम दिखना चाहिए.उन्होंने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि जो अधिकारी एक महीने से ज्यादा फाइल रोकेंगे, उन पर सख्त कार्रवाई होगी.
सुशासन की नई परिभाषा लिख रहे सम्राट
बिहार में सम्राट चौधरी का लक्ष्य केवल अतिक्रमण हटाना नहीं है, बल्कि यह साबित करना है कि वे नीतीश कुमार से कहीं अधिक प्रभावी और निर्णायक नेता हैं. वे 5 लाख करोड़ के निवेश का दावा कर रहे हैं, और उनका मानना है कि निवेश तभी आएगा जब राज्य में माफिया राज का खात्मा होगा, चाहे इसके लिए बुलडोजर का ही सहारा क्यों न लेना पड़े,
बिहार की राजनीति में 'पगड़ी' को मान-सम्मान का प्रतीक मानने वाले सम्राट चौधरी ने अब बुलडोजर को अपनी नई पहचान बना लिया है, आने वाले कुछ महीने यह तय करेंगे कि क्या यह बुलडोजर मॉडल उन्हें बिहार का नया 'सुशासन पुरुष' बनाएगा, या फिर जनता इसे महज एक चुनावी स्टंट मानकर नकार देगी. फिलहाल, पटना की सड़कों पर चलते बुलडोजर की आवाज ने बिहार की सियासत को गरमा दिया है.
कुबूल अहमद