पैसे जमा करने वाले बैंक तो आप जानते ही हैं. इसके अलावा आपने ब्लड बैंक, स्पर्म बैंक या स्टेम सेल बैंक के बारे में भी सुना होगा. लेकिन क्या आपने कभी Poop Bank के बारे में सुना है?
पूप यानी मल. मल बैंक सुनने में ज़रा अजीब लगता है, लेकिन वैज्ञानिकों की मानें तो ये बैंक बड़े काम के हो सकते हैं. हाल ही में जर्नल में प्रकाशित एक ओपिनियन आर्टिकल में शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि जब हम युवा और स्वस्थ होते हैं, तो हम सभी को 'पूप-बैंक' जरूर जाना चाहिए और वहां अपनी आंत के माइक्रोबायोटा का सैंपल जमा कराना चाहिए. बूढ़े और अस्वस्थ होने पर हमें इस सैंपल की ज़रूरत पड़ सकती है.

ज़ाहिर है कि आप सोच रहे होंगे कि मल आखिर हमारी किस तरह मदद कर सकता है. तो आपको बता दें कि जीवन में आगे चलकर आपको कभी फीकल ट्रांसप्लांट की ज़रूरत पड़ी, तो आपका मल ही आपके काम आ सकता है.
कई रोगों के इलाज के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. शोधकर्ताओं का कहना है कि ऑटोलॉगस (फीकल माइक्रोबायोटा ट्रांसप्लांट) में अस्थमा, मल्टीपल स्केलेरोसिस, मल से जुड़े रोग, मधुमेह, मोटापा जैसी ऑटोइम्यून बीमारियों, यहां तक कि हृदय रोग और एजिंग का इलाज करने की क्षमता होती है.
फीकल ट्रांसप्लांट (Fecal transplant) में आम तौर पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फीकल माइक्रोबायोटा को ट्रांसफर किया जाता है. इसमें मौजूद स्वस्थ माइक्रोब्स से, व्यक्ति की आंत में माइक्रोबायोम को फिर से जीवंत किया जा सकता है.
Imagine it’s a sunny Saturday and you’re on your way to the bank to make a deposit. So far so normal, except this is no ordinary bank, and no ordinary deposit – the bank is actually a poop bank, and the deposit? Well, it’s your poop.
— IFLScience (@IFLScience)
इससे COVID-19 का इलाज किया जा चुका है. बच्चों में ऑटिज़्म के लक्षणों को कम करने और मानसिक स्वास्थ्य का इलाज करने में भी इसका इस्तेमाल किया जा चुका है. शोध यह भी बताते हैं कि फीकल ट्रांसप्लांट से एजिंग के कुछ लक्षणों को भी पलटा जा सकता है. इंसानों में इसका इस्तेमाल खास तौर पर क्लॉस्ट्रिडियोइड्स डिफिसाइल (Clostridioides difficile) इन्फेक्शन के इलाज के लिए किया जाता है.