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Budget: ब्याज-मुक्त कर्ज, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में ज्यादा भागीदारी... क्या कम होगी राज्यों और केंद्र के बीच तल्खी?

Budget 2022 के बाद क्या राज्यों और केंद्र के बीच की तल्खी कम हो सकेगी? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यों के लिए ब्याज-मुक्त कर्ज, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में ज्यादा भागीदारी की बात कही है.

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (फाइल फोटो) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को बजट 2022 पेश किया
  • राज्यों को 1 लाख करोड़ के कर्ज देने की बात कही गई

Budget 2022: केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच चलने वाली तल्खी आम है. विभिन्न मुद्दों पर केंद्र और गैर बीजेपी शासित राज्यों की सरकारें आमने-सामने हुई हैं. अब बजट 2022 से केंद्र ने राज्यों के लिए ब्याज-मुक्त कर्ज की व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में ज्यादा भागीदारी का दांव चला है, जिससे ये तल्खी शायद कुछ कम हो.

इसके साथ-साथ Budget 2022 में केंद्र ने पूंजीगत व्यय, परिसंपत्ति निर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास में मदद का हाथ बढ़ाने की बात भी कही है.

बजट में सरकार ने ‘Scheme for Financial Assistance to States for Capital Investment’ की लागत को बढ़ाया है.  इसके साथ-साथ कहा गया कि किफायती आवासों के निर्माण के लिए मिलने वाला अप्रूवल राज्यों को कम समय में दिया जाएगा. इसके साथ-साथ राज्य द्वारा किए जा रहे इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण को पीएम गतिशक्ति नैशनल मास्टर प्लान में शामिल करने की बात कही गई.

निर्मला सीतारमण बोलीं - राज्यों को मिलता रहेगा सहयोग

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा कि उत्पादक संपत्ति और लाभकारी रोजगार पैदा करने के राज्य के प्रयासों को केंद्र का सहयोग मिलेगा. बताया  गया कि Financial Assistance to States for Capital Investment स्कीम के बजट को 10 हजार करोड़ से बढ़ाकर चालू वित्त वर्ष में 15 हजार करोड़ किया गया.

इसके साथ-साथ नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में विकास कार्य तेज करने के लिए प्रधानमंत्री की विकास पहल (PM-DevINE) को लॉन्च किया गया है. इसमें इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण के लिए शुरुआती तौर पर 1,500 करोड़ रुपये का फंड मिलेगा. 

वहीं वर्ष 2022-23 के लिए अर्थव्यवस्था में सभी निवेशों को प्रेरित करने के लिए राज्यों की मदद करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है. ये पचास वर्षीय ब्याज मुक्त ऋण के रूप में दिया जाएगा.

केंद्र और राज्य सरकार दोनों के कर्मचारियों के प्रति समान व्यवहार करने के लिए राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए भी एनपीएस खाते में नियोक्ता के योगदान पर कर कटौती सीमा को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत करने का प्रस्ताव दिया गया है. वित्त मंत्री ने कहा है कि इससे राज्य सरकार के कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा हितलाभों को बढ़ाने और उन्हें केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के समान लाने में मदद मिलेगी.

 

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