हिंद महासागर में ईरान के वॉरशिप IRIS डेना पर अमेरिकी सबमरीन के हमले को लेकर एक नया दावा सामने आया है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, जहाज पर सवार एक ईरानी नाविक ने हमले से ठीक पहले अपने पिता को फोन कर बताया था कि अमेरिकी सेना ने क्रू मेंबर्स को जहाज छोड़ने की दो बार चेतावनी दी थी.
ये जानकारी उस नाविक ने अपने पिता को हमले से कुछ देर पहले दी थी. इससे श्रीलंका के पास हुए अमेरिकी सबमरीन हमले से पहले के पलों की एक नई तस्वीर सामने आई है. यह दावा ईरान के पहले के आधिकारिक बयान से अलग है. ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका पर आरोप लगाया था.
उन्होंने कहा था कि उनके जंगी जहाज IRIS डेना पर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बिना किसी चेतावनी के हमला किया गया. सैयद अब्बास अराघची ने इस हमले को ज़ुल्म करार देते हुए कहा था कि अमेरिकी कार्रवाई बिना किसी पूर्व सूचना के की गई. लेकिन ईरानी नाविक के पिता के हालिया बयान ने पूरी कहानी पलट दी है.
रिपोर्ट के मुताबिक, नाविक ने अपने पिता को बताया था कि अमेरिकी सेना की ओर से दो बार चेतावनी दी गई थी कि क्रू मेंबर्स जहाज छोड़ दे. हालांकि, वॉरशिप के कमांडर ने आने वाले खतरे के बावजूद क्रू को जहाज छोड़ने की अनुमति नहीं दी. हमले से पहले कुछ क्रू मेंबर्स ने कमांडर से इस फैसले को लेकर बहस भी की थी.
बीते बुधवार को हिंद महासागर में अमेरिकी सबमरीन ने वॉरशिप IRIS डेना पर टॉरपीडो से हमला किया था. यह हमला श्रीलंका के दक्षिणी बंदरगाह गाले से करीब 19 नॉटिकल मील दूर हुआ था. इस हमले में दर्जनों नाविकों की मौत हो गई. श्रीलंकाई अधिकारियों ने डिस्ट्रेस सिग्नल मिलने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन किया था.
इस दौरान 87 शव बरामद किए गए, जबकि 32 लोगों को जिंदा बचाया गया. रिपोर्ट में कहा गया है कि बचाए गए लोगों में कई नाविक ऐसे थे जो लाइफबोट का इस्तेमाल कर जहाज से निकलने में कामयाब रहे थे. इसी वजह से वे हमले से बच सके. IRIS डेना के डूबने को अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष में बड़ा मोड़ माना जा रहा है.
अमेरिकी वॉर सेक्रेटरी पीट हेगसेथ ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है जब अमेरिका ने किसी दुश्मन के वॉरशिप को डुबाने के लिए सबमरीन का इस्तेमाल किया है. बताया जा रहा है कि IRIS डेना इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) 2026 और इंडियन नेवी द्वारा आयोजित मल्टीनेशनल नेवल एक्सरसाइज में हिस्सा लेने के लिए आया था.
हमले के बाद इंडियन नेवी को ईरानी वॉरशिप से एक डिस्ट्रेस कॉल मिला, जिसके तुरंत बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया. श्रीलंका की ओर से पहले से चल रहे ऑपरेशन को तेज करने के लिए एक लंबी दूरी का मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट भेजा गया. इसके अलावा एयर-ड्रॉपेबल लाइफ राफ्ट से लैस एक विमान को स्टैंडबाय पर रखा गया.
इस बीच एक अहम जानकारी सामने आई है. अमेरिका ने श्रीलंकाई अधिकारियों से कहा है कि वे इस घटना के बाद बचाए गए ईरानी नाविकों को वापस ईरान न भेजे. रिपोर्ट में 6 मार्च के अमेरिकी विदेश विभाग के एक इंटरनल केबल का हवाला दिया गया है. इसमें कहा गया है कि श्रीलंका से ईरानी नाविकों को वापस नहीं भेजने का आग्रह किया गया था.
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