अमेरिका-ईरान युद्ध का वैश्विक तेल बाजार पर बुरा असर, ब्रेंट क्रूड के दाम में आया 11% उछाल

अमेरिका-ईरान युद्ध ने वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मचा दी है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से कच्चे तेल की आपूर्ति पर संकट गहरा गया है और ब्रेंट क्रूड की कीमतें 28 फरवरी के बाद करीब 11% बढ़ चुकी हैं. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक 2026 में तेल की मांग और बढ़ने से कीमतों पर दबाव और तेज हो सकता है.

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अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल. (Photo: AP) अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल. (Photo: AP)

मयंक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 05 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 8:59 PM IST

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध ने वैश्विक तेल बाजार को गंभीर रूप से झकझोर दिया है. बीते शुक्रवार के बाद से कच्चे तेल की शिपिंग लागत लगभग दोगुनी हो चुकी है, जबकि ब्रेंट क्रूड की कीमतें 28 फरवरी से अब तक करीब 11 प्रतिशत बढ़ चुकी हैं. मध्य पूर्व में संघर्ष तेज होने के साथ ही जहाजों के इंश्योरेंस प्रीमियम में भी तेज उछाल आया है. बाजार में इस उछाल की सबसे बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना है, जिसके रास्ते दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आवाजाही होती है.
 
इसके अलावा चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि एक और बड़ा तेल उत्पादक देश संकट में घिर गया है. करीब 208 अरब बैरल के तेल भंडार के साथ ईरान दुनिया में तीसरे स्थान पर है. इस सूची में वेनेजुएला (303 अरब बैरल) पहले और सऊदी अरब (267 अरब बैरल) दूसरे स्थान पर हैं. रूस करीब 80 अरब बैरल के साथ आठवें स्थान पर है. आंकड़ों के मुताबिक, वैश्विक तेल भंडार में वेनेजुएला की हिस्सेदारी करीब 17 प्रतिशत, ईरान की लगभग 13 प्रतिशत और रूस की 5-6 प्रतिशत है.

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तीनों देश मिलकर दुनिया के एक-तिहाई से अधिक तेल भंडार रखते हैं. हालांकि रूस पहले से यूक्रेन युद्ध के चलते प्रतिबंधों में घिरा है और वेनेजुएला का कच्चा तेल वैश्विक मांग का एक प्रतिशत से भी कम हिस्सा है. वहां उत्पादन बढ़ाने में सालों लग सकते हैं. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, 2026 में वैश्विक कच्चे तेल की मांग 10 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है. इसके उलट, जनवरी में आपूर्ति घटकर 1.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गई, क्योंकि उत्तरी अमेरिका में भीषण सर्दी और कजाखस्तान, रूस व वेनेजुएला से निर्यात बाधित हुआ.

जनवरी 2026 तक ईरान की आपूर्ति करीब 3.45 मिलियन बैरल प्रतिदिन थी, जो वैश्विक आपूर्ति का लगभग 3 प्रतिशत है. इराक से 4.34 मिलियन और संयुक्त अरब अमीरात से करीब 3.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन उत्पादन हो रहा था. युद्ध लंबा खिंचने पर इन आपूर्तियों पर असर पड़ सकता है. फिलहाल बाजार को कुछ राहत मौजूदा तेल भंडार से मिल रही है. IEA के मुताबिक, दिसंबर में वैश्विक तेल भंडार में 37 मिलियन बैरल की बढ़ोतरी हुई और 2025 में कुल स्टॉक 477 मिलियन बैरल तक पहुंच गया, जो 2020 के बाद सबसे उच्चतम स्तर है. हालांकि, मौजूदा संकट के बीच कच्चे तेल की कीमतें फिर से तेजी से चढ़ने लगी हैं.

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