रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से सोमवार को मुलाकात की. इस मुलाकात में पुतिन ने ईरान को पूरा समर्थन देने का वादा किया. उन्होंने कहा कि रूस हर वो काम करेगा जो ईरान और इस इलाके के दूसरे देशों के हित में हो. यह मुलाकात ऐसे वक्त हुई है जब ईरान अमेरिका के साथ जंग लड़ रहा है और इस्लामाबाद में शांति वार्ता पर कोई बात नहीं बनी.
ईरान के विदेश मंत्री अराघची रूस पहुंचे और उन्होंने सीधे रूस के राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात की. यह बहुत अहम है क्योंकि आमतौर पर विदेश मंत्री किसी देश के विदेश मंत्री से मिलते हैं, राष्ट्रपति से नहीं. लेकिन पुतिन ने खुद उनसे मिलने का वक्त दिया जो दिखाता है कि रूस इस मुलाकात को कितनी अहमियत दे रहा है.
इस मुलाकात के बाद ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने पुतिन का शुक्रिया किया है और कहा है कि रूस और ईरान के बीच संबंध और मजबूत होंगे.
ईरान के सुप्रीम लीडर का संदेश
राष्ट्रपति पुतिन ने बताया कि उन्हें ईरान के सुप्रीम लीडर यानी सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की तरफ से एक खास संदेश मिला है. पुतिन ने अराघची से कहा कि वो वापस जाकर सुप्रीम लीडर को उनकी शुभकामनाएं और अच्छे स्वास्थ्य की दुआएं पहुंचाएं. यह एक कूटनीतिक तरीका है जिसमें दो देशों के सबसे बड़े नेता एक दूसरे तक अपनी बात पहुंचाते हैं. इससे साफ है कि दोनों देशों के बीच सबसे ऊंचे स्तर पर बातचीत हो रही है.
पुतिन ने ईरान को क्या भरोसा दिया?
राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि रूस को उम्मीद है कि ईरान की जनता इस मुश्किल दौर से निकल जाएगी और शांति कायम होगी. इसके बाद पुतिन ने सबसे बड़ी बात कही. उन्होंने कहा कि रूस हर वो काम करेगा जो ईरान के हित में हो और इस पूरे इलाके के दूसरे देशों के हित में हो.
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रणनीतिक रिश्ते जारी रखने का वादा
रूसी राष्ट्रपति ने यह भी साफ किया कि मॉस्को तेहरान के साथ अपने रणनीतिक रिश्ते आगे भी जारी रखेगा. रणनीतिक रिश्ते का मतलब है कि दोनों देश सिर्फ व्यापार नहीं बल्कि सैन्य, राजनीतिक और दूसरे अहम मामलों में भी एक दूसरे का साथ देते हैं.
इस मुलाकात का असर क्या होगा?
यह मुलाकात दुनिया को एक साफ संदेश देती है कि ईरान अकेला नहीं है. अमेरिका और उसके साथी देश एक तरफ हैं और रूस ने ईरान के साथ खड़े होने का ऐलान कर दिया है. इससे ईरान को मनोबल मिलेगा और बातचीत में ईरान थोड़ा और मजबूत स्थिति में रहेगा क्योंकि उसके पीछे रूस जैसी बड़ी ताकत खड़ी है.
यह दुनिया को दो हिस्सों में बंटते हुए भी दिखाता है. एक तरफ अमेरिका और उसके यूरोपीय और मध्य पूर्व के साथी हैं. दूसरी तरफ रूस और ईरान जैसे देश हैं जो अमेरिका की नीतियों के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं.
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