समंदर उगल रहा 'सोना'... मादुरो के जाते ही इस छोटे से देश की लगी 'लॉटरी'

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के हटने के बाद गुयाना के समुद्री तेल क्षेत्र में विदेशी निवेशकों की रुचि बढ़ गई है. अमेरिकी कंपनी ExxonMobil और शेवरॉन जैसी बड़ी कंपनियां गुयाना में तेल खोज और उत्पादन में तेजी ला रही हैं.

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गुयाना में अमेरिकी कंपनियों ने अब अपना निवेश बढ़ा दिया है (Photo: Exxon mobil) गुयाना में अमेरिकी कंपनियों ने अब अपना निवेश बढ़ा दिया है (Photo: Exxon mobil)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:57 AM IST

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कार्रवाई से एक छोटे से देश को बहुत फायदा हुआ है. मादुरो के सत्ता से हटने के बाद वेनेजुएला के पूरब में स्थित उसके पड़ोसी देश गुयाना की जैसे लॉटरी लग गई है क्योंकि उसके नए खोजे गए कच्चे तेल क्षेत्र में निवेश करने के लिए बड़ी कंपनियों की लाइन लग गई है. 

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अमेरिकी कंपनी ExxonMobil ने एक दशक पहले गुयाना के स्टैब्रोक ब्लॉक समुद्री क्षेत्र में तेल के विशाल भंडार की खोज की थी. तेल की खोज से पहले गुयाना दक्षिण अमेरिका का एक बेहद ही गरीब देश था.

10 लाख से भी कम आबादी वाले गुयाना ने तेल बेचकर और रॉयल्टी से मिले पैसों से अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत किया और 2019 में यह दो अंकों वाली अर्थव्यवस्था के साथ एक आर्थिक ताकत बन गया.

मादुरो से परेशान था गुयाना, जाते ही लग गई लॉटरी

लेकिन इन सबके बीच गुयाना को वेनेजुएला से लगातार धमकियों और क्षेत्रीय विवाद का सामना करना पड़ा. गुयाना और वेनेजुएला के बीच एक सदी पुराना क्षेत्रीय विवाद चला आ रहा है. निकोलस मादुरो गुयाना के एसेक्विबो क्षेत्र को अपने में मिलाने की धमकी देते रहे थे और उन्होंने इस क्षेत्र में सैन्य और नौसैनिक मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश की थी. ये सारी रुकावटें गुयाना को परेशान कर रही थीं.

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गुयाना के तट के पास जब अरबों बैरल तेल मिलने की खबर सामने आई तब एसेक्विबो पर मादुरो के दावे और तेज हो गए थे. लेकिन अब गुयाना के रास्ते का कांटा मादुरो हट गए हैं.

इस साल की शुरुआत में ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक सैन्य ऑपरेशन के जरिए मादुरो को अगवा करा लिया था. फिलहाल वो अमेरिका की कैद में हैं और उनके खिलाफ ड्रग्स और भ्रष्टाचार से जुड़े मामले चल रहे हैं.  मादुरो के जाने से गुयाना की सारी टेंशन ही खत्म हो गई है.

बात करें एसेक्विबो क्षेत्र की तो, इसका विवाद अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में चल रहा है, जिसका अंतिम फैसला आने में वर्षों लग सकते हैं.

मादुरो के जाने से खुश हैं गुयाना में निवेश करने वाली कंपनियां

एक्सॉन के सीईओ डैरेन वुड्स ने मादुरो के अगवा किए जाने के बाद कहा कि मादुरो के जाने से विवादित क्षेत्र में वेनेजुएला की नौसैनिक पेट्रोलिंग कम होगी और माहौल अधिक सही होगा.

वुड्स ने कहा कि कंपनी को अब अतिरिक्त क्षेत्रों में जाकर तेल खोजने का भी मौका मिलेगा.

अमेरिकी कंपनी शेवरॉन (Chevron) भी अब गुयाना के तेल क्षेत्र का हिस्सा बन गई है. कंपनी ने पिछले साल एक्सॉन के साझेदार हेस कॉर्पोरेशन (Hess Corp.) का अधिग्रहण पूरा कर लिया, जिसके पास स्टैब्रोक ब्लॉक में 30% हिस्सेदारी थी.

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गुयाना का समुद्री तेल कंपनियों के लिए 'सोना' है

गुयाना का समुद्री तेल क्षेत्र बहुत फायदेमंद संपत्ति माना जा रहा है जो साझेदार कंपनियों के लिए अरबों डॉलर का राजस्व दे सकता है. यहां तेल उत्पादन की लागत लगभग 30 डॉलर प्रति बैरल आंकी गई है जो कि काफी कम है. इससे तेल उत्पादक कंपनियों को भारी फायदा होगा.

पड़ोसी वेनेजुएला के साथ तनाव कम होने से गुयाना को भी फायदा होगा, क्योंकि विदेशी निवेशकों को अब गुयाना में निवेश को लेकर कम रिस्क दिखेगा.

सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के हेनरी जीमर ने ऊर्जा की कीमतों पर नजर रखने वाली वेबसाइट ऑयल प्राइस से बात करते हुए कहा कि मादुरो के हटने से अगर किसी देश को सबसे ज्यादा फायदा होगा, तो वो गुयाना है.

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