'भारत से लौट रहे जहाज पर अचानक...' IRIS डेना के डूबने पर ईरान ने क्या कहा?

अमेरिका ने श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास ईरानी युद्धपोत IRIS डेना को बिना चेतावनी के टॉरपीडो से डुबो दिया. यह जहाज हाल ही में भारतीय नौसेना के सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेकर अपने देश लौट रहा था. ईरानी विदेश मंत्री और महावाणिज्यदूत ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और इसे अमेरिका की बड़ी गलती बताया है.

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ईरान का जहाज भारत से सैन्य अभ्यास के बाद लौट रहा था, तभी अमेरिका ने उसे डुबो दिया (Photo: X/@araghchi) ईरान का जहाज भारत से सैन्य अभ्यास के बाद लौट रहा था, तभी अमेरिका ने उसे डुबो दिया (Photo: X/@araghchi)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:37 PM IST

ईरान के साथ चल रही जंग के बीच अमेरिका ने उसके एक युद्धपोत को बुधवार तड़के श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास डुबो दिया. ईरानी युद्धपोत फ्रिगेट IRIS डेना (Frigate Dena) पिछले महीने भारतीय नौसेना की तरफ से आयोजित सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद विशाखापत्तनम से वापस ईरान लौट रहा था. इस जहाज को डुबोए जाने पर ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने कहा था कि डेना 'इंडियन नेवी का मेहमान' था जिसे डुबोकर अमेरिका ने बहुत बड़ी गलती की है.

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अब मुंबई में ईरान के महावाणिज्यदूत सईद रजा मोसायब मोटलग ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है. एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा, 'ये जहाज भारत में एक नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेने आया था और उसी अभ्यास से लौट रहा था. यह वापस अपने देश जा रहा था. स्वाभाविक है कि जब कोई जहाज ऐसे अभ्यास में हिस्सा लेने आता है तो वो अपने साथ भारी युद्धक गोला-बारूद नहीं लाता. इसलिए कहा जा सकता है कि जहाज पर सैन्य गोला-बारूद मौजूद नहीं था.'

उन्होंने आगे लिखा, 'दूसरी बात, अमेरिकी पनडुब्बी ने इस जहाज को कोई पूर्व चेतावनी नहीं दी और अचानक हमला कर दिया, जिससे जहाज में विस्फोट हो गया. दुर्भाग्य से इस घटना में करीब सौ लोग, शायद इससे भी अधिक, जिनमें हमारे देशवासी और बहादुर ईरानी सैनिक शामिल हैं, शहीद हो गए. अन्य लोग घायल हुए हैं और उन्हें ईरान ले जाने के लिए जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं.'

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ईरानी विदेश मंत्री ने क्या कहा था?

जहाज को डुबोए जाने पर ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची की प्रतिक्रिया सामने आई है. अरागची ने कहा कि डेना 'इंडियन नेवी का मेहमान' था जिसे डुबोकर अमेरिका ने बहुत बड़ी गलती की है.

अमेरिका ने यह हमला ईरान से करीब 2000 समुद्री मील दूर किया गया जिसमें लगभग 87 लोगों की मौत हो गई. ईरानी युद्धपोत पर करीब 130 लोग सवार थे. श्रीलंका सरकार के मुताबिक, तलाशी अभियान के दौरान 32 लोगों को बचा लिया गया, जबकि कई अन्य अभी भी समुद्र में लापता हैं और उन्हें मृत मान लिया गया है.

जहाज पर हमले को लेकर गुरुवार को एक्स पर एक पोस्ट में अरागची ने कहा, 'अमेरिका ने समुद्र में, ईरान के तट से 2000 मील दूर, एक जघन्य घटना को अंजाम दिया है. फ्रिगेट डेना, जो भारतीय नौसेना का मेहमान था और जिसमें लगभग 130 नाविक सवार थे, अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बिना किसी चेतावनी के निशाना बनाया गया. मेरी बात याद रखिए, अमेरिका को इस मिसाल के लिए बहुत पछतावा होगा.'

 

इस पोस्ट को ईरान के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक हैंडल ने भी रीपोस्ट किया.

जहाज डुबोने के बाद अमेरिका ने क्या कहा?

पेंटागन में आयोजित एक ब्रीफिंग में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार है जब किसी दुश्मन के युद्धपोत पर इस तरह का हमला किया गया है. उन्होंने कहा, 'एक अमेरिकी पनडुब्बी ने एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया, जिसे लगा था कि वो अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सुरक्षित है. लेकिन उसे टॉरपीडो से निशाना बनाया गया. शांत लेकिन घातक मौत दी गई उसे.'

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अमेरिका ने शनिवार को इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर भीषण हमले शुरू किए थे. हमले के साथ ही मिडिल ईस्ट एक व्यापक युद्ध की चपेट में आ गया है जिसमें ईरान इजरायल और खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले कर रहा है. 

इस जंग के बीच अमेरिका ने ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया. IRIS डेना ईरानी नौसेना के दक्षिणी बेड़े का माउज-क्लास का फ्रिगेट है. युद्धपोत ने स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 5:30 बजे डिस्ट्रेस कॉल भेजा. उस समय यह जहाज श्रीलंका के तटीय शहर गाले से लगभग 40 समुद्री मील दूर समुद्र में था.

यह युद्धपोत पिछले महीने भारतीय नौसेना की तरफ से आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) और बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास मिलन-2026 में शामिल हुआ था. फरवरी के तीसरे हफ्ते में जब यह विशाखापत्तनम पहुंचा था, तब भारतीय नौसेना ने उसका गर्मजोशी से स्वागत किया था.

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