होर्मुज तो पार कर लिया, लेकिन ट्रंप की 'लक्ष्मण रेखा' नहीं लांघ पाए ईरान के 8 जहाज

अमेरिका ने खाड़ी में नाकाबंदी के तहत ईरान से जुड़े 8 तेल टैंकरों को रोका है. इन जहाजों को बीच समुद्र में इंटरसेप्ट कर वापस लौटने के लिए कहा गया. अमेरिकी रणनीति के तहत जहाजों की निगरानी कर उन्हें रोका जा रहा है.

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समंदर के बीच रुके जहाज, बढ़ते तनाव की खामोश तस्वीर. (Photo: AP) समंदर के बीच रुके जहाज, बढ़ते तनाव की खामोश तस्वीर. (Photo: AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:30 AM IST

खाड़ी के समंदर में अमेरिका ने ईरान की ऐसी घेराबंदी की है जिसे तोड़ना नामुमकिन साबित हो रहा है. ईरान के 8 तेल टैंकरों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की लहरों को तो पार कर लिया, लेकिन वे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की खींची हुई 'लक्ष्मण रेखा' नहीं लांघ पाए. अमेरिकी नौसेना ने इन सभी 8 जहाजों को बीच समंदर में ही घेर कर रोक लिया है. अमेरिका का मकसद एकदम साफ है कि ईरान के तेल की सप्लाई को पूरी तरह ठप कर देना ताकि वह समझौते के लिए मजबूर हो जाए.

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खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जो समुद्री नाकाबंदी की है, वह अब बेहद सख्त हो चुकी है. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कार्रवाई के शुरू होने के बाद से अमेरिकी नौसेना ने अब तक ईरान से जुड़े 8 तेल टैंकरों को बीच समुद्र में ही रोक दिया है.

अब आपके मन में सवाल उठा होगा कि आखिर ये 'लक्ष्मण रेखा' कहां है और कैसे काम कर रही है? तो इसे ऐसे समझिए, ये जहाज ईरान के बंदरगाहों से निकलकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तो पार कर ले रहे हैं, लेकिन असली घेराबंदी ओमान की खाड़ी में है. जैसे ही कोई जहाज ईरान से बाहर निकलता है, अमेरिकी सैनिक सैटेलाइट और ड्रोन के जरिए उस पर नजर रखना शुरू कर देती है. इसके बाद जैसे ही ये जहाज ओमान की खाड़ी की ओर बढ़ते हैं, अमेरिकी युद्धपोत इन्हें बीच रास्ते में ही इंटरसेप्ट कर लेते हैं और इन्हें वापस लौटने पर मजबूर कर दिया जाता है. यानी जहाज होर्मुज तो पार कर पा रहे हैं, लेकिन ओमान की खाड़ी में बनी अमेरिकी 'लक्ष्मण रेखा' को पार करना उनके लिए नामुमकिन साबित हो रहा है.  न्यूज एजेंसी एपी के हवाले से एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि यह पूरी रणनीति 'पकड़ो और वापस भेजो' पर आधारित है
 

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महज 36 घंटे में ईरान का 90% व्यापार ठप

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने इस पूरी कार्रवाई को लेकर बड़ा दावा किया है. उन्होंने साफ कहा है कि मिडिल ईस्ट के समंदर पर अब सिर्फ और सिर्फ अमेरिका का राज है और उनकी 'मैरीटाइम सुपीरियरिटी' यानी समुद्री बादशाहत बरकरार है. कूपर के अनुसार, नाकाबंदी लागू होने के 36 घंटे के भीतर ही ईरान के समुद्र के जरिए होने वाले व्यापार को पूरी तरह रोक दिया गया. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की करीब 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्था समुद्री अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर निर्भर है, ऐसे में इस कार्रवाई का सीधा असर उसकी आर्थिक गतिविधियों पर पड़ा है.

उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख दोहराया है. उन्होंने कहा है कि ईरान के पास परमाणु बम होना स्वीकार नहीं किया जा सकता. ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि वह फिलहाल युद्धविराम बढ़ाने के बारे में नहीं सोच रहे हैं. फिलहाल, होर्मुज और ओमान की खाड़ी में अमेरिकी गतिविधियां बढ़ी हुई हैं. जहाजों की आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और हर गतिविधि पर नजर बनाए रखी जा रही है. यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब क्षेत्र में पहले से ही तनाव बना हुआ है और कूटनीतिक स्तर पर भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है.
 

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