मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच की जंग को अब एक पूरा हो चुका है. पिछले सात दिनों में हालात इतनी तेजी से बदले हैं कि यह टकराव अब सिर्फ दो-तीन देशों तक सीमित नहीं रहा. कई क्षेत्रीय ताकतें भी अलग-अलग तरीके से इस जंग में शामिल होती दिख रही हैं.
28 फरवरी की सुबह शुरू हुई जंग को सबसे पहले ईरान के सैन्य और परमाणु ढांचे को तबाह करने के लिए शुरू किया गया था, लेकिन कुछ ही दिनों में इसका असर पूरे इलाके में दिखाई देने लगा. मिसाइल हमले, ड्रोन और हवाई कार्रवाई के बीच मिडिल ईस्ट के कई देश इसकी चपेट में आ चुके हैं.
इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई समेत उनके नेतृत्व के कई प्रमुख लोगों की मौत हो गई. इसके बाद ईरान ने भी कई जगहों पर जबरदस्त जवाबी हमले किए. खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया और कई शहरों में एयर डिफेंस सिस्टम चौबीसों घंटे सक्रिय हो गए हैं.
पिछले एक हफ्ते में यह संघर्ष कई मोर्चों पर फैल गया है. ईरान के सहयोगी माने जाने वाले संगठन भी एक्टिव हो गए और इजरायल पर हमले शुरू कर दिए, जिसके जवाब में इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत में बड़ी हवाई कार्रवाई की.
इस दौरान आम लोगों पर भी भारी असर पड़ा है. ईरान में अब तक करीब 1200 लोगों की मौत की खबर है, जिनमें 165 स्कूली छात्राएं भी शामिल बताई गई हैं. इसके अलावा हिंद महासागर में एक अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी युद्धपोत को डुबोने की घटना भी सामने आई, जिसमें 87 नाविकों की मौत हुई.
युद्ध का असर सिर्फ बॉर्डर तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर भी इसका बुरा असर पड़ने लगा है. होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं.
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ईरान युद्ध: पहला दिन
संघर्ष की शुरुआत अमेरिका और इजरायल के एक साझा और सोचे-समझे हमले से हुई. अमेरिका ने अपने इस अभियान को 'एपिक फ्यूरी' नाम दिया, जबकि इजरायल ने इसे 'रोरिंग लायन' कहा. इस कार्रवाई में 100 से ज्यादा लड़ाकू विमानों और भारी मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया. हमलों का मुख्य निशाना सरकारी इमारतें, राष्ट्रपति का आवास और सुप्रीम लीडर का दफ्तर था. इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर आई. इसी दौरान ईरान के मीनाब इलाके में एक प्राइमरी स्कूल पर हमले में 165 लड़कियों की मौत हो गई, जिसे इस संघर्ष की अब तक की सबसे बड़ी त्रासदी माना जा रहा है. इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और खाड़ी क्षेत्र के अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें और ड्रोन दागे. इस हमले की चपेट में दुबई के कुछ प्रमुख टूरिस्ट स्पॉट्स भी आ गए, जिन्हें निशाना बनाया गया.
ईरान युद्ध: दूसरा दिन
जंग के दूसरे दिन संघर्ष की आग और भड़क उठी. अमेरिका ने ईरान की नौसेना पर जबरदस्त प्रहार करते हुए उसके नौ जहाजों को समंदर में डुबोने का दावा किया, साथ ही नौसेना मुख्यालय को भी मलबे में तब्दील कर दिया. यही नहीं, ईरान की सबसे ताकतवर मिलिट्री यूनिट 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) के हेडक्वार्टर को भी निशाना बनाया गया. दूसरी ओर, ईरान ने भी अपना पलटवार जारी रखा. कुवैत में एक अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हुए ईरानी ड्रोन हमले में छह सैनिकों की मौत हो गई, जबकि इजरायल के बीत शेमेश शहर पर हुई मिसाइल बारी में नौ लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी.
ईरान युद्ध: तीसरा दिन
जंग के तीसरे दिन हालात और बिगड़ गए और कई नए मोर्चे खुलते नजर आए. लेबनान के संगठन हिज्बुल्लाह ने सीमा पार से इजरायल की ओर मिसाइलों की बरसात शुरू कर दी, जिसके जवाब में इजरायल ने बेरूत पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए. इन हमलों में 31 लोगों की जान जाने की खबर सामने आई. इधर, ईरान ने भी खाड़ी क्षेत्र के एनर्जी सिस्टम को निशाना बनाया और सऊदी अरब की रास तनुरा रिफाइनरी पर हमला बोल दिया. इसी बीच, कुवैत में तीन अमेरिकी सैन्य विमानों के क्रैश होने की खबर भी आई, जिसे अमेरिका ने फ्रेंडली फायर यानी अपनी ही गलती से हुई दुर्घटना बताया. राहत की बात यह रही कि इस हादसे में पायलट सुरक्षित बच गए.
ईरान युद्ध: चौथा दिन
जंग के चौथे दिन अमेरिका ने अपने हमले और भी ज्यादा तेज कर दिए. बी-2 बमवर्षक विमानों के जरिए उन बंकर बस्टर बमों का इस्तेमाल किया गया, जो जमीन के काफी नीचे बने अभेद्य ठिकानों को भी तबाह करने की ताकत रखते हैं. इधर, इजरायल ने भी ईरानी सैन्य ठिकानों और हिज्बुल्लाह पर अपने हमले जारी रखे. इन हमलों के पलटवार में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का बड़ा एलान कर दिया, जो कि वही रास्ता है जहां से दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई होती है. यही नहीं, ईरान ने रियाद और कुवैत में अमेरिकी दूतावासों पर भी ड्रोन हमले किए, जिसके चलते दोनों ही जगहों पर एम्बेसी को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा. इस दौरान दोहा, दुबई, अबू धाबी और बहरीन जैसे शहरों में लगातार धमाकों की आवाजें गूंजती रहीं, क्योंकि वहां का एयर डिफेंस सिस्टम ईरानी मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने में जुटा था.
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ईरान युद्ध: पांचवां दिन
जंग के पांचवें दिन युद्ध का असर अब और भी दूर तक जा पहुंचा. तुर्की की ओर बढ़ रही एक ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल को तभी नाटो (NATO) के एयर डिफेंस सिस्टम ने बीच हवा में ही मार गिराया. इसी दौरान, हिंद महासागर में एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के युद्धपोत 'आईआरआईएस डेना' (IRIS Dena) को टॉरपीडो से निशाना बनाकर समंदर में डुबो दिया. हैरानी की बात यह रही कि यह जहाज भारत में हुए एक नौसैनिक अभ्यास से वापस लौट रहा था, जिसमें 87 ईरानी नाविकों की मौत हो गई. इस बढ़ते खतरे को देखते हुए, कई यूरोपीय देशों ने भी अपनी सुरक्षा के लिए इस पूरे इलाके में अपनी सैन्य संसाधन भेजने शुरू कर दिए.
ईरान युद्ध: छठा दिन
जंग के छठे दिन पहली बार आसमान में दो देशों के लड़ाकू विमानों के बीच सीधी भिड़ंत देखने को मिली. इजरायल के अत्याधुनिक एफ-35 (F-35) विमान ने तेहरान के ठीक ऊपर ईरान के एसयू-35 विमान (Su-35) को मार गिराया. इस कार्रवाई के जवाब में ईरान ने भी पलटवार किया और फारस की खाड़ी में एक अमेरिकी तेल टैंकर को निशाना बनाया.
इसी कड़ी में, अजरबैजान काकेशस क्षेत्र का वह पहला देश बन गया जिसे इस जंग की तपिश झेलनी पड़ी. नखचिवान हवाई अड्डे की एक इमारत पर हुए ड्रोन हमले में चार लोग घायल हो गए. हालांकि, ईरान ने इस हमले में अपना हाथ होने से साफ इनकार कर दिया और खुद को इससे अलग कर लिया.
ईरान युद्ध: सातवां दिन
सातवें दिन भी हमलों का सिलसिला थमा नहीं. इजरायल ने साफ कर दिया कि उसने तेहरान और लेबनान में व्यापक हवाई हमले शुरू कर दिए हैं. दूसरी ओर ईरान ने भी अपना पूरा जोर लगाते हुए इजरायल के मुख्य शहर तेल अवीव के रिहायशी और महत्वपूर्ण इलाकों को निशाना बनाया और वहां ड्रोन तथा मिसाइलें दागीं.
युद्ध का दुनिया पर क्या पड़ा असर?
इस संघर्ष का असर अब पूरी दुनिया महसूस कर रही है. सबसे ज्यादा असर फ्लाइट्स और सफर पर पड़ा है. 28 फरवरी से अब तक इस पूरे इलाके में 11 हजार से ज्यादा उड़ानें रद्द की जा चुकी हैं क्योंकि कई देशों ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है. दुबई जैसे बड़े ट्रांजिट हब के प्रभावित होने से इंटरनेशनल ट्रैवलर परेशान हैं. वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से तेल की सप्लाई रुक गई है और कच्चे तेल की कीमतें 10 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गई हैं, जिसका सीधा असर सबकी जेब पर पड़ेगा.
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फिलहाल क्या है स्थिति और कब थमेगी जंग?
28 फरवरी से शुरू हुआ यह संघर्ष अब तक 14 देशों को प्रभावित कर चुका है. हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि पिछले एक-दो दिनों में ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों की तीव्रता में कुछ कमी आई है. इजरायल ने दावा किया है कि उसने हवाई मोर्चे पर बढ़त बना ली है और ईरान की एयर डिफेंस प्रणाली को काफी नुकसान पहुंचाया है. फिर भी, ईरान अपने कम लागत वाले ड्रोन के जरिए इजरायल के महंगे डिफेंस सिस्टम को उलझाने की कोशिश कर रहा है.
रही बात युद्ध के खत्म होने की, तो फिलहाल कोई स्पष्ट समय सीमा नजर नहीं आ रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुरुआत में कहा था कि यह जल्दी खत्म हो सकता है, लेकिन अब वे भी इसे कई हफ्तों तक चलने की बात कह रहे हैं. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के मुताबिक, ऐसे युद्धों की कोई निश्चित समय सीमा नहीं हो सकती. अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि क्या यह संघर्ष जल्द थमेगा या किसी बड़े विश्व युद्ध का रूप ले लेगा.
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