ईरान के पलटवार से छूटे ट्रंप के पसीने, मोजतबा खामेनेई ने कहा- मंजूर नहीं सीजफायर!

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी जंग के 18वें दिन हालात और गंभीर हो गए हैं. ईरान ने सीजफायर से इनकार कर दिया है और लगातार पलटवार जारी रखा है. खाड़ी देशों की अलग राय और होर्मुज के बंद होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर बढ़ रहा है. इस संघर्ष के लंबा खिंचने की आशंका जताई जा रही है.

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ईरान ने सीजफायर से इनकार किया (Photo: Representational) ईरान ने सीजफायर से इनकार किया (Photo: Representational)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:53 PM IST

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव अब एक बड़े संघर्ष का रूप ले चुका है. जंग के 18वें दिन हालात और ज्यादा गंभीर हो गए हैं. जहां एक तरफ अमेरिका और इजरायल को उम्मीद थी कि ईरान को जल्दी कमजोर किया जा सकेगा, वहीं दूसरी तरफ ईरान के लगातार पलटवार ने इस आकलन को गलत साबित कर दिया है.

इजरायल ने दावा किया है कि उसके एयरस्ट्राइक में ईरान के शीर्ष कमांडर अली लारीजानी मारे गए हैं. हालांकि इस दावे को लेकर ईरान की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. इस बीच इजरायल की ओर से एक तस्वीर भी जारी की गई है, जिसमें प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को ईरान के शीर्ष नेताओं और कमांडरों को निशाना बनाने के आदेश देते हुए दिखाया गया है.

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इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी तरह के सीजफायर के पक्ष में नहीं हैं. उन्होंने कहा कि अभी शांति का समय नहीं है और अमेरिका व इजरायल को जवाब देना जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि इन दोनों देशों को हराने के बाद ही उनसे कीमत वसूली जाएगी.

जंग के 18वें दिन भी जारी ईरान का पलटवार

सूत्रों के अनुसार, दो मध्यस्थ देशों के जरिए भेजे गए सीजफायर प्रस्ताव को भी ईरान ने ठुकरा दिया है. इससे साफ है कि आने वाले समय में यह संघर्ष और लंबा खिंच सकता है. इस बीच ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अपने हमले तेज कर दिए हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने बहरीन और यूएई में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है. इसके अलावा कतर की ओर भी मिसाइल दागी गई है. बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर ईरान समर्थित गुटों द्वारा ड्रोन हमला भी किया गया है.

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खाड़ी देशों का मानना है कि अगर इस समय जंग को रोका गया तो ईरान भविष्य में और ज्यादा मजबूत होकर सामने आ सकता है. इसलिए वो चाहते हैं कि अमेरिका इस जंग को निर्णायक रूप से खत्म करे. दूसरी ओर अमेरिका चाहता है कि अरब देश भी इस संघर्ष में खुलकर शामिल हों, ताकि उसे अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिल सके.

इस संघर्ष के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी दबाव में नजर आ रहे हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक अमेरिका के करीब 200 सैनिक इस युद्ध में घायल हो चुके हैं, जिनमें से 10 की हालत गंभीर बताई जा रही है. ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के प्रवक्ता ने भी अमेरिका को सीधी चुनौती दी है. उन्होंने कहा कि अमेरिका को जमीन पर युद्ध करने का साहस दिखाना चाहिए और उसे इस संघर्ष को लेकर डरना नहीं चाहिए.

खामेनेई ने सीजफायर प्रस्ताव ठुकराया

इस बीच एक और बड़ा मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना है. यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है और इसके बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ा है. इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं. होर्मुज के बंद होने का असर सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो दुनिया आर्थिक संकट की ओर बढ़ सकती है.

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ट्रंप प्रशासन के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बन गई है. एक तरफ वह इस जंग को जल्द खत्म करना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ उसे अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दबाव का सामना करना पड़ रहा है. फिलहाल स्थिति यह है कि न तो ईरान पीछे हटने को तैयार है और न ही अमेरिका और उसके सहयोगी देश. खाड़ी देशों की रणनीति भी इस संघर्ष को और जटिल बना रही है.

होर्मुज बंद, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बढ़ा खतरा

कुल मिलाकर यह जंग अब सिर्फ क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गई है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ने लगा है. आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या बातचीत के जरिए कोई समाधान निकलता है या फिर यह संघर्ष और ज्यादा खतरनाक मोड़ लेता है.
 

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