पाकिस्तान में ईरान जंग पर बातचीत शुरू होने वाली है, लेकिन उससे पहले की तकरार शुरू हो गई है. इजरायल लेबनान में ताबड़तोड़ हमले कर रहा है और लेबनान मामले को सीजफायर से अलग बता रहा है, लेकिन ईरान इसे नहीं मान रहा और अमेरिका से मांग कर दी है कि लेबनान में इजरायली हमले नहीं रुके तो वह सीजफायर से पीछे हट जाएगा. उधर, अमेरिका भी फिर धमकियों पर उतर आया है और प्रेसिडेंट ट्रंप ने कहा कि सीजफायर असल में लागू होने तक हमारी सेनाएं ईरान के आसपास तैनात रहेंगी.
आज ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचने वाला है, लेकिन उससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि लेबनान का मुद्दा ईरान के साथ सीजफायर की शर्तों में शामिल नहीं था. लेकिन पाकिस्तान ने अमेरिका के इस दावे को झूठा करार दिया है.
अमेरिकी न्यूज एसेंजी सीएनएन से बात करते हुए अब अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत रिजवान सईद शेख ने दावा किया कि ईरान के साथ हुए सीजफायर समझौते में लेबनान वाली बात शामिल थी. इससे पहले कल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी बोल चुके हैं कि लेबनान में शांति भी सीजफायर का हिस्सा है, लेकिन लेबनान में हमले जारी रखते हुए इजरायल ने कहा कि वो सीजफायर सिर्फ ईरान को लेकर हुआ है.
ट्रंप की ईरान को चेतावनी
पाकिस्तानी राजदूत के बयान से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट साझा कर ईरान को चेतावनी दी थी और कहा था कि जब तक असली समझौता पूरी तरह लागू नहीं होता, अमेरिकी सेना, जहाज और हथियार ईरान के आसपास ही तैनात रहेंगे. अगर समझौता टूटा तो ईरान पर पहले से भी ज्यादा बड़ी और ताकतवर कार्रवाई होगी.
ट्रंप ने दोहराया कि वह ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु बम नहीं बनाने देंगे. उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर पूरी तरह लगाम लगाना उनकी प्राथमिकता है. अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अपनी रणनीति भी साफ कर दी है. उन्होंने कहा कि ये महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग हर हाल में खुला और सुरक्षित रहना चाहिए. वैश्विक अर्थव्यवस्था की सुरक्षा के लिए इस रास्ते पर किसी भी तरह का ईरानी नियंत्रण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अमेरिकी नौसेना के जहाज वहां मौजूद रहेंगे, ताकि तेल की आपूर्ति में कोई बाधा न आए.
उन्होंने अंत में दावा किया कि अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार है और आगे की कार्रवाई के लिए तैयार बैठी है. उन्हें बस आगे बढ़ने के आदेश का इंतजार है. ट्रंप ने ईरान को सलाह दी कि वह इस कूटनीतिक मौके का फायदा उठाए, क्योंकि अमेरिका की सहनशक्ति अब खत्म हो चुकी है. ये संदेश ईरान के लिए अंतिम चेतावनी की तरह देखा जा रहा है.
जेडी वेंस ने खारिज किया दावा
ट्रंप से पहले अमेरिका उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बुधवार को हंगरी के बुडापेस्ट में मीडिया से बात करते कहा, 'मुझे लगता है कि ये एक तथ्य गलतफहमी (legitimate misunderstanding) की वजह से आया है. ईरानियों ने सोचा कि सीजफायर में लेबनान भी शामिल है, लेकिन ऐसा नहीं था. हमने कभी ऐसा वादा नहीं किया. हमने कभी ये संकेत भी नहीं दिया कि ऐसा होगा.'
वेंस ने ये भी कहा कि सीजफायर मुख्य रूप से ईरान और अमेरिका के सहयोगियों- इजरायल तथा खाड़ी के अरब देशों पर केंद्रित है. इजरायली नेतृत्व ने लेबनान में थोड़ी संयम बरतने की पेशकश की है, लेकिन ये सीजफायर का हिस्सा नहीं है, बल्कि बातचीत को सफल बनाने के लिए है.
विवादों के घेरे में Pak की मध्यस्थता
आपको बता दें मंगलवार को ट्रंप ने मंगलवार को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि पाकिस्तान की मध्यस्तता से ईरान-अमेरिका के बीच अस्थायीय सीजफायर पर सहमति बन गई है. इसके कुछ देर बाद पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने एक्स पर पोस्ट साझा कर घोषणा की कि पाकिस्तान की मध्यस्थता सफल रही है और सीजफायर लेबनान में भी लागू होगा.
उन्होंने इसे एक बड़ी कूटनीतिक जीत की तरह पेश किया. शरीफ ने यहां तक कहा कि आगामी 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता में इन सभी पहलुओं पर अंतिम मुहर लगेगी. हालांकि, पाक के ऐलान के बाद इजरायली पीएम ने घोषणा करते हुए कहा कि इस सीजफायर की शर्ते में लेबनान शामिल नहीं है और अब अमेरिका भी यही बात कह रहा है. इसके बाद से पाकिस्तान की मध्यस्थता अब खुद विवादों के घेरे में है. एक ओर वह खुद को शांतिदूत बता रहा है, दूसरी ओर अमेरिका और इजरायल उसके दावों को खारिज कर रहे हैं.
अमेरिका मैसेंजर था PAK
उधर, फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान को व्हाइट हाउस ने खुद सीजफायर का प्रस्ताव ईरान तक पहुंचाने के लिए कहा था. यानी पाकिस्तान स्वतंत्र मध्यस्थ नहीं, बल्कि अमेरिका का संदेशवाहक बनकर काम कर रहा था. रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख असिम मुनीर ने ट्रंप, वेंस और अन्य अमेरिकी अधिकारियों से सीधे बात की, जबकि शहबाज शरीफ ने जल्दबाजी में क्रेडिट लेने की कोशिश की.
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