ट्रंप की धमकी का असर! होर्मुज जा रहे पाकिस्तानी तेल टैंकर रास्ते से ही वापस लौटे

हॉर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का साया गहराने लगा है. रणनीतिक वार्ता की विफलता और अनिश्चितता के बीच पाकिस्तान के दो बड़े तेल टैंकरों को बीच रास्ते से ही वापस लौटना पड़ा है. हालांकि, 'एमवी सेलेन' के कराची पहुंचने से थोड़ी राहत जरूर मिली है.

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अमेरिका-ईरान की जिद में फंसा पाकिस्तान, इस्लामाबाद में करा रहा था शांति समझौता. (File Photo: ITG) अमेरिका-ईरान की जिद में फंसा पाकिस्तान, इस्लामाबाद में करा रहा था शांति समझौता. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 9:56 PM IST

दुनिया की 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति के मुख्य द्वार होर्मुज स्ट्रेट में जारी तनाव का वैश्विक असर दिख रहा है. ताजा घटनाक्रम में हॉर्मुज की ओर बढ़ रहे पाकिस्तान के दो तेल टैंकरों को बीच रास्ते से ही बैकरॉक (वापस) होना पड़ा है. यह घटना ऐसे समय में हुई है जब इस्लामाबाद में हुई अमेरिका-ईरान शांति वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई.

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ईरान की 'फ़ार्स' न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी झंडा लगाए दो तेल टैंकर होर्मुज स्ट्रेट पहुंचने से पहले ही वापस लौट गए हैं. इन तेल टैंकरों के नाम 'खैरपुर' और 'शालिमार' हैं. वहीं दूसरी तरफ शनिवार रात यूएई के जेबेल अली से चला कंटेनर जहाज 'MV Selen' कराची बंदरगाह पहुंचने में सफल रहा. कराची पोर्ट ट्रस्ट ने इसकी पुष्टि की है.

NLC (AP Line) द्वारा संचालित इस जहाज के आने से समुद्री आपूर्ति श्रृंखला में मामूली विश्वास जरूर लौटा है. हालांकि, रणनीतिकारों का मानना है कि यह राहत अस्थायी हो सकती है. 8 अप्रैल को ईरान और अमेरिका के बीच एक शर्तिया संघर्ष विराम हुआ था, जिसके तहत होर्मुज स्ट्रेट को खोला जाना था. लेकिन इस्लामाबाद शांति वार्ता विफल हो गई.

ईरान इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपना पूर्ण नियंत्रण चाहता है, जो अमेरिका को मंजूर नहीं है. समझौते पर आम सहमति न बन पाना इस 15 दिन पुराने नाजुक संघर्ष विराम की प्रभावशीलता पर बड़ा सवालिया निशान लगा रहा है. होर्मुज सिर्फ एक जलमार्ग नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है. यह फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित है.

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इस रास्ते से दुनिया की लगभग एक-तिहाई गैस और 20 फीसदी तेल गुजरता है. यदि बातचीत का दौर इसी तरह बेनतीजा रहा, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में कोहराम मच सकता है. फिलहाल, पाकिस्तानी अधिकारियों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अमेरिका और ईरान अपने रुख में कोई नरमी लाएंगे. सभी होर्मुज को लेकर स्थायी समाधान निकालने के पक्ष में हैं.

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