ट्रंप के यू-टर्न और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा गारंटी पर पूर्व डिप्लोमैट्स ने जताई चिंता, भारत को दिए ये सुझाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भारत-अमेरिका संबंधों में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखे गए हैं. ट्रंप ने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया और पाकिस्तान के साथ अपने रिश्तों को प्राथमिकता दी है. ट्रंप के इस यू-टर्न पर पूर्व डिप्लोमैट्स ने भारत को अहम सुझाव दिए हैं.

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भारत के पूर्व राजनयिकों ने भारत-अमेरिका के बदलते रिश्तों पर बात की (Photo: India Today) भारत के पूर्व राजनयिकों ने भारत-अमेरिका के बदलते रिश्तों पर बात की (Photo: India Today)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 सितंबर 2025,
  • अपडेटेड 2:53 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दूसरा कार्यकाल भारत के लिए बेहद उतार-चढ़ाव वाला रहा है जिसमें ट्रंप ने पहले भारत पर अतिरिक्त 25% का टैरिफ लगा दिया और वो पाकिस्तान के साथ अपने रिश्तों को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं. वीजा नीतियों में भी उन्होंने बड़े बदलाव किए हैं और प्रवासियों को लेकर बेहद सख्त हैं जिससे भारत को बहुत नुकसान हो रहा है.

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अमेरिका में भारत की पूर्व राजदूत मीरा शंकर और फ्रांस, मोनाको में भारत के पूर्व राजदूत जावेद अशरफ ने India Today Conclave, Mumbai में ट्रंप के कार्यकाल में भारत-अमेरिका के बदलते रिश्तों के कई पहलुओं पर बात की.

पूर्व राजदूत मीरा शंकर ने कहा है कि अमेरिका की विदेश नीति बदल रही है जिसमें दोस्तों और दुश्मनों के बीच की रेखा धुंधली हो गई है.

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव मुंबई में बोलते हुए मीरा शंकर ने कहा, 'ट्रंप अपने पहले कार्यकाल में पाकिस्तान, चीन को लेकर टफ थे और भारत के साथ अमेरिका के रिश्ते अच्छे थे. माना गया कि दूसरे में भी वो भारत के साथ ऐसा ही रिश्ता रखेंगे लेकिन मैंने पहले ही कहा था कि वो प्रवासियों को लेकर सख्त रहेंगे, हाई टैरिफ लगाएंगे और दोस्तों, दुश्मनों के बीच की उनकी रेखा धुंधली पड़ जाएगी. इस बार वो अपने दुश्मनों के साथ भी डील कर रहे हैं और दोस्तों को भी निशाने पर ले रहे हैं.'

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इंडो-पैसिफिक को लेकर बदल गई है ट्रंप की स्ट्रैटजी

मीरा शंकर ने आगे कहा कि ट्रंप चीन को अपना आर्थिक प्रतिद्वंद्वी मानते हैं न कि पिछले सभी प्रशासनों की तरह रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी.

उन्होंने कहा कि ट्रंप अमेरिका में नौकरियों की आउटसोर्सिंग को समझ रहे हैं. भले ही अमेरिका में बेरोजगारी 4% के आसपास है लेकिन वहां लोगों की सैलरी कम हुई है. मीरा शंकर ने कहा कि अमेरिका में ये आउटसोर्सिंग अधिकतर भारत और चीन से हो रहा है और ट्रंप इससे निपटना चाहते हैं.

भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर वार्ता जारी है और वो इसे लेकर आशान्वित हैं. मीरा शंकर कहती हैं, 'मुझे लगता है कि अंततः भारत-अमेरिका के बीच कुछ डील होगा. 

मीरा शंकर ने अमेरिकी रक्षा मंत्री की अपने चीनी समकक्ष से मुलाकात के दौरान की गई टिप्पणी का भी प्रमुखता से जिक्र किया. उन्होंने कहा, 'पीट हेगसेथ ने अपने चीनी समकक्ष से मुलाकात के दौरान कहा था कि अमेरिका-चीन से युद्ध नहीं चाहता, चीन में सत्ता परिवर्तन नहीं चाहता, और तीसरी बात कि अमेरिका चीन का ट्राइंगुलेशन भी नहीं चाहता. इस दौरान उन्होंने इंडो-पैसिफिक की जगह एशिया-पैसिफिक शब्द का इस्तेमाल किया. यह अमेरिका की विदेश नीति में बड़ा बदलाव है.'

भारत को नए बाजार तलाशने होंगे

मीरा शंकर ने कहा कि भारत के लिए अमेरिका अभी भी सबसे बड़ा बाजार है और टैरिफ ने हमें बता दिया है कि हमें दूसरे विकल्पों की तलाश करनी होगी.

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वो कहती हैं, 'अमेरिका के साथ व्यापार में हम बहुत अधिक सरप्लस में हैं. अब टैरिफ के बाद हमें नए विकल्प तलाशने होंगे. यूरोप हमारे लिए विकल्प हो सकता है लेकिन वो अमेरिका के कहने पर हमारे साथ मुक्त व्यापार समझौता रोके हुए है. ऐसे में हमें अब मिडिल ईस्ट, अफ्रीका जाना चाहिए, उन देशों में अपना सामान ज्यादा बेचना चाहिए जिनके साथ हमारा मुक्त व्यापार समझौता है. हमें उन देशों के साथ व्यापार को आसान बनाने के लिए कदम उठाने होंगे.'

'हथियारों के लिए अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता'

अमेरिका रूस से तेल और रक्षा हथियारों की खरीद सीमित करने के लिए भारत पर लगातार दबाव डाल रहा है. अमेरिका चाहता है कि भारत रूस के बजाए उससे अधिक हथियार खरीदे लेकिन मीरा शंकर कहती हैं कि हथियारों के लिए अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता.

उन्होंने कहा, 'हथियारों के मामले में हम अमेरिका पर भरोसा नहीं कर सकते क्योंकि उनका इतिहास रहा है, प्रतिबंध लगाने का. अमेरिका को अगर कुछ पसंद नहीं आया, हमारी कोई बात पसंद नहीं आती तो हम पर प्रतिबंध लगा देंगे फिर हमें बहुत नुकसान होगा. इसका एक ही रास्ता है कि हम जल्द से जल्द अपना डिफेंस मैन्यूफेक्चरिंग हब मजबूत करें. हमें उन देशों के साथ काम करना होगा जो टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए राजी हैं जैसे कि फ्रांस और रूस.' 

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'ट्रंप ने अपने दोस्तों को भी नहीं छोड़ा'

पूर्व राजदूत जावेद अशरफ कहते हैं हैं कि ट्रंप पहले कार्यकाल में भी कुछ समय के लिए पाकिस्तान की तरफ झुके थे लेकिन फिर उन्होंने भारत के साथ अपने रिश्तों पर फोकस किया.

वो कहते हैं, 'अपने पहले कार्यकाल के दौरान ट्रंप इमरान खान से मिले थे. कश्मीर मुद्दे सुलझाने को लेकर बोले, रूस से एस-400 खरीद को लेकर भी भारत से थोड़े नाराज थे लेकिन फिर मान गए और पीएम मोदी को ह्यूस्टन बुलाया. लेकिन अब उन्होंने खुद को पूरी तरह से MAGA (Make America Great Again) आइडियोलॉजी से घेर लिया है और वो उसी तरह के लोगों से घिर गए हैं.'

पूर्व राजदूत कहते हैं कि दुनिया को लेकर ट्रंप का अप्रोज इकोनॉमिक है, उनकी फॉरेन पॉलिसी अलग है. उनके गोल्स, स्ट्रैजी अलग हैं.

वो कहते हैं, 'अमेरिका अपने प्रतिद्वंद्वियों को टार्गेट करने के लिए दो पिलर यूज करता था- टेक्नोलॉजी और अपने सहयोगी. लेकिन अब ट्रंप के लिए दूसरा पिलर अस्तित्व में ही नहीं है...देखिए कैसे उन्होंने अपने अहम सहयोगियों दक्षिण कोरिया और जापान को ही सबसे पहले टैरिफ के लिए टार्गेट किया.'

जावेद अशरफ कहते हैं कि विदेश नीति में इतने बड़े उलटफेर से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में ट्रंप का प्रभाव कम होगा. वो कहते हैं, 'अब इस बात कि गारंटी नहीं है कि अमेरिकी इंडो-पैसिफिक के सुरक्षा की गारंटी लेगा. अमेरिकी प्रभाव के कम होने से क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे.' 

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