कार्नी ने पूरी दुनिया के सामने खोली ट्रंप की पोल, फिर अमेरिकी राष्ट्रपति ने कनाडा पर यूं उतारा गुस्सा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का न्योता वापस ले लिया है. ट्रंप ने यह फैसला प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस में दिए गए भाषण के बाद लिया है. कार्नी ने अपने भाषण में अमेरिका की टैरिफ नीति की आलोचना की थी.

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ट्रंप ने बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का कनाडा को भेजा निमंत्रण वापस ले लिया है (Photo: Reuters) ट्रंप ने बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का कनाडा को भेजा निमंत्रण वापस ले लिया है (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:15 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को अपने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का दिया गया न्योता वापस ले लिया है. यह फैसला प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस में दिए गए उस भाषण के कुछ ही दिनों बाद आया है, जिसमें उन्होंने बिना ट्रंप का नाम लिए उन्हें खूब सुनाया था. उन्होंने अमेरिका के टैरिफ स्ट्रैटजी के खिलाफ चेतावनी दी थी.

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उनके भाषण से नाराज ट्रंप ने गुरुवार रात (अमेरिकी समयानुसार) ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'प्रिय प्रधानमंत्री कार्नी, कृपया इस पत्र को इस बात की सूचना के रूप में स्वीकार करें कि बोर्ड ऑफ पीस कनाडा के शामिल होने को लेकर दिया गया निमंत्रण वापस ले रहा है.'

पिछले हफ्ते कार्नी ने कहा था कि वो बोर्ड में शामिल होना चाहते हैं लेकिन इसकी फीस की शर्तों को लेकर अभी वो फैसला नहीं ले पाए हैं. बोर्ड में स्थायी सीट पाने के लिए देशों को एक अरब डॉलर की फीस देनी होगी.

दावोस में कार्नी ने ट्रंप को लपेटा था

इस हफ्ते स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए कार्नी ने कहा था कि दुनिया की ‘मिडिल पावर्स’ को एकजुट होकर बड़ी ताकतों के प्रेशर का मुकाबला करना चाहिए.

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उन्होंने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा था, 'सुपरपावर्स अब व्यापार को हथियार की तरह इस्तेमाल करने लगी हैं. टैरिफ को दबाव डालने के हथियार के रूप में, फाइनेंशियल सिस्टम को जबरदस्ती करने के लिए और सप्लाई चेन की कमजोरियों का गलत फायदा उठाया जा रहा है.'

इस दौरान कार्नी ने हालांकि, किसी देश का नाम नहीं लिया लेकिन ट्रंप उन्हें कहां छोड़ने वाले थे. उन्होंने बाद में फोरम के दौरान प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'कनाडा अमेरिका की वजह से ही जिंदा है. मार्क, अगली बार बयान देते वक्त यह याद रखना.'

कार्नी के भाषण से कुछ घंटे पहले ही ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक डिजिटल रूप से बदली गई मैप की तस्वीर पोस्ट की थी, जिसमें ग्रीनलैंड, वेनेजुएला और कनाडा को अमेरिकी झंडे से ढका हुआ दिखाया गया था.

कार्नी ने अपने भाषण में यह भी कहा कि 'नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था' अब व्यावहारिक रूप से खत्म हो चुकी है. दुनिया की महाशक्तियां अपने हितों को आगे बढ़ाने के लिए व्यापार को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही हैं.

इस दौरान कार्नी ने यूरोप पर भी निशाना साधा और कहा, 'अमेरिका के वर्चस्व के दौर में सबको फायदा होता रहे, इसलिए पश्चिमी देश कथनी और करनी के फर्क पर आंखें मूंदे रहे.'

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कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य कह चुके हैं ट्रंप

ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका और कनाडा के बीच रिश्तों में काफी तनाव आया है. ट्रंप कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य कह चुके हैं और उस पर टैरिफ भी लगाए हैं.

‘बोर्ड ऑफ पीस’ इजरायल-हमास युद्ध में बर्बाद हुए गाजा के पुनर्निर्माण और उसके शासन की देखरेख के लिए बनाया गया है. इस बोर्ड की अध्यक्षता ट्रंप कर रहे हैं. ट्रंप ने कह दिया है कि यह बोर्ड भविष्य में संयुक्त राष्ट्र का विकल्प साबित हो सकता है. इसी वजह से अमेरिका के कई सहयोगी देश चिंतित हैं.

ट्रंप को तुर्की, मिस्र, सऊदी अरब और कतर जैसे मध्य-पूर्वी देशों के साथ-साथ इंडोनेशिया जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समर्थन मिला है. वहीं ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे अमेरिका के सहयोगी देशों ने सतर्क रुख अपनाया है और कुछ ने प्रस्ताव को खारिज भी कर दिया है. भारत ने भी प्रस्ताव पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

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