ईरान संग 'सीजफायर' के मूड में नहीं ट्रंप, बोले- जब दुश्मन खत्म रहा हो तो जंग क्यों रोकें?

अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि मौजूदा हालात में लड़ाई रोकने का सवाल ही नहीं उठता. उन्होंने संकेत दिया कि सैन्य दबाव जारी रखते हुए आगे की रणनीति तय होगी, जबकि कूटनीतिक विकल्प खुले रहेंगे. बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक बाजार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर गहराता दिख रहा है.

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ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास न नेवी बची और न एयरफोर्स. (Photo-AP) ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास न नेवी बची और न एयरफोर्स. (Photo-AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:07 AM IST

अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वे फिलहाल किसी भी तरह के युद्धविराम (Ceasefire) के पक्ष में नहीं हैं. शुक्रवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि अमेरिकी और इजरायली सैन्य अभियान तब तक जारी रहेंगे जब तक ईरान की सैन्य क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हो जाती.

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ट्रंप ने दावा किया कि पिछले कुछ हफ्तों के हमलों ने ईरान को बेहद कमजोर कर दिया है. उन्होंने कहा, "हम दूसरी तरफ (ईरान) को पूरी तरह मिटा रहे हैं, ऐसे में सीजफायर का कोई मतलब नहीं है. उनके पास अब न तो नौसेना बची है, न वायुसेना और न ही कोई सैन्य उपकरण." 

ट्रंप का मानना है कि मौजूदा दबाव बनाए रखने से तेहरान की रणनीतिक स्थिति और कमजोर होगी. हालांकि उन्होंने बातचीत के दरवाजे खुले रखने की बात कही, लेकिन स्पष्ट किया कि कूटनीति के लिए बमबारी नहीं रोकी जाएगी.

इस बीच, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी ट्रंप ने बयान दिया. उन्होंने कहा कि यह वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम मार्ग है और इसे खुला रखने के लिए कई देशों के सहयोग की जरूरत होगी. उन्होंने चीन जैसे देशों की भूमिका का भी जिक्र किया और संकेत दिया कि अंतरराष्ट्रीय भागीदारी इस संकट के समाधान में अहम हो सकती है.

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यह भी पढ़ें: होर्मुज में महायुद्ध की आहट! जंग के बीच ब्रिटेन का बड़ा फैसला, US को हमले के लिए दिए अपने सैन्य बेस

ट्रंप ने युद्ध में देरी से शामिल होने के लिए ब्रिटेन की आलोचना करते हुए इसे 'बेहद सुस्त प्रतिक्रिया' बताया. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसमें चीन को भी शामिल होना चाहिए, क्योंकि यह वैश्विक व्यापार के लिए जरूरी है. ट्रंप के इस सख्त लहजे से साफ है कि आने वाले दिनों में मध्य पूर्व में जंग और तेज हो सकती है. गौरतलब है कि यह युद्ध 28 फरवरी से शुरू हुआ था और अब एक बड़े क्षेत्रीय संकट का रूप ले चुका है.

आपको बता दें कि यह जंग 28 फरवरी को शुरू हुई थी जो अब एक व्यापक क्षेत्रीय संकट में तब्दील हो चुकी है. लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाई के चलते मध्य-पूर्व में अस्थिरता बढ़ रही है और इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और बाजारों पर भी पड़ रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष और लंबा खिंच सकता है, जिससे न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं.

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