'युद्ध नहीं रुका तो हथियार नहीं देंगे', ईरान से जंग के बीच करीबी दोस्त ने छोड़ा अमेरिका का साथ

ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच अमेरिका के सहयोगी उससे किनारा कर रहे हैं. होर्मुज के मुद्दे पर भी कई यूरोपीय सहयोगी पीछे हट रहे हैं. इस बीच स्विटजरलैंड ने अमेरिका को लेकर एक बड़ा फैसला किया है.

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स्विटजरलैंड ने अमेरिका को हथियार देने से मना किया है (Photo: Reuters) स्विटजरलैंड ने अमेरिका को हथियार देने से मना किया है (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 8:00 PM IST

ईरान से जंग के बीच अमेरिका के एक बेहद करीबी सहयोगी ने उससे किनारा कर लिया है. यूरोपीय देश स्विट्जरलैंड ने कहा है कि वो ईरान पर जारी हमलों के चलते अमेरिका को हथियार निर्यात करने के लिए कंपनियों को लाइसेंस जारी नहीं करेगा. 

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, स्विट्जरलैंड ने कहा है कि वो किसी भी तरह से युद्ध को बढ़ावा नहीं दे रहा बल्कि वो तटस्थ है. ऐसे में वो अमेरिका को हथियारों का निर्यात जारी नहीं रख सकता.

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स्विटजरलैंड की सरकार ने एक बयान में कहा, 'ईरान के साथ चल रहे अंतरराष्ट्रीय सशस्त्र संघर्ष में शामिल देशों को युद्ध सामग्री के निर्यात की अनुमति संघर्ष चलने तक नहीं दी जा सकती. फिलहाल अमेरिका को युद्ध सामग्री के निर्यात की अनुमति नहीं दी जाएगी.'

होर्मुज स्ट्रेट के मुद्दे पर भी ट्रंप का साथ छोड़ चुके हैं कई सहयोगी

अमेरिका और इजरायल के युद्ध के बीच ईरान ने वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम समुद्री रास्ते होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है. इस स्ट्रेट के बंद होने से दुनियभर में तेल की सप्लाई बाधित हुई है क्योंकि मध्य-पूर्व के देश होर्मुज के जरिए ही अपना तेल बेचते हैं. होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से सप्लाई की किल्लत हो गई है और तेल-गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं. होर्मुज के जरिए दुनिया के करीब 20% तेल की ढुलाई होती है.

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इसे देखते हुए ट्रंप ने अपने यूरोपीय सहयोगियों से होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने में मदद मांगी है लेकिन कई सहयोगी पीछे हट रहे हैं.

ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड और जापान ने हाल ही में कहा कि वो होर्मुज के जरिए आवाजाही बहाल करने के मकसद से एक मिशन की प्लानिंग के लिए तैयार हैं. हालांकि, जर्मनी और नीदरलैंड ने साफ कर दिया है कि वो इस मिशन का हिस्सा नहीं बनेंगे. दोनों देशों ने कहा कि जब तक युद्धविराम नहीं होता या कम से कम संघर्ष नहीं रुकता, वो ट्रंप के मिशन में शामिल नहीं होंगे. 

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