'हिम्मत है तो...', स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान का ट्रंप को खुला चैलेंज

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान ने अमेरिका और इजरायल को खुली चुनौती दी है. ईरानी सैन्य अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगर हिम्मत रखते हैं तो तेल टैंकरों को अमेरिकी युद्धपोतों की सुरक्षा में इस रास्ते से निकालकर दिखाएं. दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग पर बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंता बढ़ा दी है.

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होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट की सैटेलाइट इमेज (फोटो- AFP) होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट की सैटेलाइट इमेज (फोटो- AFP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:25 AM IST

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान ने अमेरिका और इजरायल को नई चेतावनी दी है. इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चैलेंज दिया गया है कि वो तेल टैंकर्स की रक्षा करके दिखाएं.

दरअसल, होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण गलियारा है. जंग शुरू होने के बाद ईरान ने चेतावनी दी थी कि अगर उसके हितों को नुकसान पहुंचा तो वह होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को रोक सकता है. इसके बाद सैंकड़ों जहाज होर्मुज में अटक गए, इसकी वजह से कच्चे तेल की सप्लाई भी प्रभावित हुई. 

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अब ईरान के एक सीनियर मिलिट्री अफसर ने साफ किया है कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद नहीं किया है. लेकिन इजरायल और अमेरिका से जुड़े जहाज वहां से नहीं गुजर सकते. इसके अलावा ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रवक्ता की तरफ से कहा गया, 'हम ट्रंप को चुनौती देते हैं कि वो होर्मुज से तेल टैंकरों को निकालने के लिए अमेरिकी जहाजों को एस्कॉर्ट पर लगाकर दिखाए.'

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट का भी होर्मुज पर बयान आया है. उन्होंने कहा कि उस रास्ते से जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए अमेरिका कोशिशों में लगा है, इसका जल्द समाधान निकाला जाएगा.

क्यों खास है होर्मुज स्ट्रेट

यह संकरा समुद्री रास्ता फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है. दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल और लगभग 25% प्राकृतिक गैस की आपूर्ति इसी मार्ग से होकर गुजरती है. सऊदी अरब, इराक, यूएई और ईरान जैसे देशों के ऊर्जा निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते पर निर्भर है. फिलहाल हमलों के कारण यहां गतिविधियां लगभग ठप हो गई हैं.

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ईरान के लिए यह सिर्फ आर्थिक जीवनरेखा नहीं, बल्कि नौसैनिक ताकत दिखाने का अहम साधन भी है. उसकी तटीय मिसाइलें, ड्रोन और तेज रफ्तार छोटी नौकाएं इस इलाके में लगातार तैनात रहती हैं, जो क्षेत्र में उसकी समुद्री क्षमता को मजबूत बनाती हैं.

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