अमेरिका की लगाई 'आग' में कैसे जल उठे दो मुस्लिम देश, सऊदी-UAE दोस्त से बन गए दुश्मन

सऊदी अरब और यूएई के बीच यमन में अलगाववादी ताकतों के समर्थन को लेकर तनाव चल रहा है. इसकी वजह अमेरिका की तरफ से फैलाई गई एक झूठी खबर है. इस गलतफहमी ने दोनों अरब मित्र देशों को एक-दूसरे का विरोधी बना दिया है.

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 सऊदी अरब और यूएई के बीच अमेरिका की तरफ से फैले एक झूठ से दुश्मनी पैदा हो गई है (Photo: X) सऊदी अरब और यूएई के बीच अमेरिका की तरफ से फैले एक झूठ से दुश्मनी पैदा हो गई है (Photo: X)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:48 PM IST

खाड़ी की दो बड़ी शक्तियां सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) इस वक्त आमने-सामने हैं. दोनों देशों के बीच यमन में अलगाववादी ताकतों को समर्थन देने के मुद्दे पर तनाव बढ़ा तो बढ़ता ही चला गया. इस तनाव ने दो अरब मित्र देशों को एक-दूसरे का दुश्मन बना दिया है. अब खबर आ रही है कि ये दुश्मनी जिस वजह से हुई वो वजह अमेरिका से फैली एक झूठी खबर है.

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यमन में यूएई समर्थित साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) ने सऊदी के समर्थन वाले बलों से दक्षिणी यमन के दो प्रांतों पर कब्जा कर लिया. इसके बाद से ही दोनों इस्लामिक देश आमने-सामने हैं. दो प्रांतों पर STC के कब्जे के बाद सऊदी बलों ने यमन में हवाई हमला किया जिसमें यूएई से आए हथियारों और सेना की गाड़ियों को निशाना बनाया गया.

हालांकि, अमेरिकी ब्रॉडकास्टर सीएनएन की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दोनों देशों के बीच तनाव की जड़ वो गलत जानकारी थी, जो उसे अपने सूत्रों से मिली थी.

इन सूत्रों के अनुसार, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने नवंबर में व्हाइट हाउस यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सूडान को लेकर बात की थी. कथित तौर पर उन्होंने ट्रंप से कहा था कि वो यूएई पर प्रतिबंध लगाएं क्योंकि उसने सूडान के गृहयुद्ध में एक पक्ष को समर्थन दिया है.

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और यह झूठी खबर जब यूएई तक पहुंची तो देश के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल-नाहयान बौखला गए और उन्होंने यमन में सऊदी को सबक सिखाने की ठान ली.

गलत जानकारी की वजह से सऊदी-यूएई के बीच पैदा हुई गलतफहमी

सीएनएन के मुताबिक, सऊदी अरब अब मानता है कि इसी गलत जानकारी के चलते यूएई ने सऊदी सीमा से लगे प्रांतों में STC फोर्सेज को सक्रिय किया. बाद में सऊदी को यूएई से संपर्क कर यह बताना पड़ा कि उसने ट्रंप से ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया था.

नवंबर में MBS के अमेरिका दौरे के दौरान ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने क्राउन प्रिंस के अनुरोध पर सूडान के संघर्ष को सुलझाने के लिए अपने प्रशासन को हस्तक्षेप के निर्देश दिए. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने ओवल ऑफिस में एमबीएस से मुलाकात के 30 मिनट बाद ही सूडान से जुड़े मामले पर काम शुरू कर दिया था. 

ट्रंप ने क्राउन प्रिंस के शब्दों को याद करते हुए कहा, 'एमबीएस ने कहा था- यह सबसे बड़ा काम होगा जो आप कर सकते हैं; यह आपका अब तक का सबसे बड़ा काम होगा.'

दिलचस्प बात यह है कि उस समय न तो ट्रंप और न ही एमबीएस ने यूएई का कोई जिक्र किया था. लेकिन खबर फैली और उस झूठी खबर ने सऊदी-यूएई को आमने-सामने ला दिया.

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यमन और सूडान में यूएई की भूमिका को लेकर चिंतित है सऊदी

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब यमन और सूडान में यूएई की भूमिका को लेकर चिंतित है. सऊदी अधिकारियों को आशंका है कि इन दोनों देशों में अस्थिरता या राज्य व्यवस्था के टूटने से उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है, क्योंकि यमन सऊदी अरब की सीमा से सटा है, जबकि सूडान लाल सागर के उस पार, सऊदी अरब के पश्चिमी तट के सामने स्थित है. 

इसके अलावा, सऊदी अरब को हॉर्न ऑफ अफ्रीका और सीरिया में यूएई की नीतियों को लेकर भी चिंता है. सऊदी का मानना है कि यूएई ने द्रूज समुदाय के कुछ लोगों से संबंध विकसित किए हैं जो उसके लिए खतरनाक साबित हो सकता है. 

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