होर्मुज संकट के बीच अमेरिका का U-टर्न, रूसी तेल खरीद पर ट्रंप प्रशासन ने फिर दी छूट

अमेरिका ने बड़ा यू-टर्न लेते हुए रूसी तेल खरीद पर फिर से अस्थायी छूट दे दी है. पहले रूसी तेल खरीद छूट को 11 अप्रैल से आगे बढ़़ाने से इनकार किया गया था. अब नए नोटिफिकेशन के बाद इस छूट को 16 मई तक के लिए बढ़ा दिया गया है.

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पहले 11 अप्रैल तक रूसी तेल खरीद पर अमेरिका ने छूट दी थी. (Photo- ITG) पहले 11 अप्रैल तक रूसी तेल खरीद पर अमेरिका ने छूट दी थी. (Photo- ITG)

आजतक इंटरनेशनल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 18 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 7:41 AM IST

ईरान युद्ध के बीच दुनिया भर में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और इसी दबाव में अब अमेरिका ने बड़ा फैसला लिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने रूसी तेल खरीदने पर एक बार फिर अस्थायी छूट दे दी है. खास बात ये है कि यह फैसला ठीक दो दिन बाद आया है, जब खुद अमेरिकी ट्रेजरी से कहा गया था कि इस छूट को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा.

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अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने 17 अप्रैल से छूट के लिए नया नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसके तहत देशों को रूसी तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स खरीदने की अनुमति 16 मई तक दी गई है. यानी करीब एक महीने तक समुद्र में लोड किए गए रूसी तेल की खरीद पर कोई अमेरिकी प्रतिबंध लागू नहीं होगा.

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इससे पहले 30 दिन की जो छूट दी गई थी वो 11 अप्रैल को खत्म हो गई थी. तब संकेत मिल रहे थे कि अब अमेरिका सख्ती दिखाएगा, लेकिन हालात बदलते ही फैसला भी बदल गया.

यू-टर्न क्यों लेना पड़ा?

ईरान के साथ चल रहे युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर भारी असर पड़ा है. दुनिया के करीब 20% तेल और गैस की सप्लाई इसी रूट से होती है. जैसे ही इस रास्ते पर खतरा बढ़ा, तेल की कीमतें तेजी से ऊपर चली गईं. अमेरिका के सामने चुनौती ये थी कि अगर सप्लाई और कम हुई, तो कीमतें और बढ़ेंगी, जिसका असर सीधे आम लोगों पर पड़ेगा. इसलिए ट्रंप प्रशासन ने बाजार में सप्लाई बनाए रखने के लिए यह अस्थायी राहत दी.

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रूस के राष्ट्रपति के दूत किरिल दिमित्रिएव के मुताबिक, पहले छूट से करीब 100 मिलियन बैरल रूसी कच्चा तेल बाजार में आ सकता था, जो लगभग एक दिन की वैश्विक खपत के बराबर है. ऐसे में नई छूट से भी सप्लाई को सहारा मिलने की उम्मीद है.

सहयोगी देशों में नाराजगी

अमेरिका के इस फैसले से उसके सहयोगी देशों में नाराजगी भी बढ़ सकती है. यूरोप लंबे समय से रूस पर सख्त प्रतिबंध बनाए रखने की बात करता रहा है. यूरोपीय यूनियन की तरफ से उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने साफ कहा है कि अभी रूस पर ढील देने का सही समय नहीं है. ऐसे में अमेरिका का यह कदम पश्चिमी देशों की एकजुट रणनीति को कमजोर कर सकता है और यूक्रेन युद्ध को लेकर बनी पॉलिसी पर सवाल खड़े कर सकता है.

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तेल कीमतों पर क्या असर पड़ा?

दिलचस्प बात यह है कि इस ऐलान के साथ ही तेल बाजार में थोड़ी राहत भी देखने को मिली. ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 9% गिरकर 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई, जो पिछले एक महीने का निचला स्तर है. इस गिरावट की एक वजह यह भी रही कि ईरान की तरफ कहा गया है कि सीजफायर के दौरान होर्मुज स्ट्रेट को कमर्शियल जहाजों के लिए खोल दिया गया है.

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