'हमारे बिना कोई...', तेल पर ट्रंप के फैसले के बाद अमेरिका से बोला रूस

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि दुनिया इस समय गंभीर ऊर्जा संकट का सामना कर रही है और ऐसे हालात में रूसी तेल की बड़ी मात्रा के बिना बाजार को स्थिर करना असंभव है.

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ट्रंप के फैसले का रूस ने स्वागत किया है (File Photo- ITG) ट्रंप के फैसले का रूस ने स्वागत किया है (File Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 4:31 PM IST

ईरान के साथ बढ़ते युद्ध और उससे पैदा हुए ऊर्जा संकट के बीच रूस ने अमेरिका के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसमें समुद्र में फंसे रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद की अनुमति दी गई है. रूस ने साफ कहा है कि उसके तेल के बिना वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करना संभव नहीं है.

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि दुनिया इस समय गंभीर ऊर्जा संकट का सामना कर रही है और ऐसे हालात में रूसी तेल की बड़ी मात्रा के बिना बाजार को स्थिर करना असंभव है. उन्होंने कहा, 'बाजार को स्थिर करना रूसी तेल की महत्वपूर्ण मात्रा के बिना संभव नहीं है. हम देख रहे हैं कि अमेरिका ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने की कोशिश कर रहा है, और इस मामले में हमारे हित भी उससे मेल खाते हैं.'

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इसके अलावा रूस का कहना है कि उसे नहीं लगता कि ईरान संकट की वजह से यूक्रेन शांति वार्ता में अमेरिका की दिलचस्पी कम होगी. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि इस समय रूस को इस बात की कोई चिंता नहीं है कि ईरान संकट के कारण यूक्रेन में शांति स्थापित करने की मध्यस्थता में अमेरिका की दिलचस्पी कम हो जाएगी.

बता दें कि रूस का यह बयान उस समय आया है जब अमेरिकी प्रशासन ने समुद्र में फंसे रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद के लिए देशों को 30 दिनों का विशेष लाइसेंस जारी किया है.

अमेरिका के इस कदम को वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल के बीच एक बड़ा राहत कदम माना जा रहा है. अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह फैसला वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने और अचानक बढ़ती तेल कीमतों को नियंत्रित करने के लिए लिया गया है.

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उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि यह निर्णय उस समय लिया गया जब अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं, जो लगभग चार साल में सबसे ऊंचा स्तर है. बेसेंट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस अस्थायी अनुमति से रूसी सरकार को कोई बड़ा वित्तीय फायदा नहीं होने दिया जाएगा.

ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों और उसके बाद तेहरान की प्रतिक्रिया से मध्य-पूर्व में तनाव तेजी से बढ़ गया है. इस तनाव का सीधा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले समुद्री व्यापार पर पड़ा है, जो दुनिया की तेल और गैस आपूर्ति का अहम मार्ग माना जाता है.

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