अमेरिका के साथ जिनेवा में होने वाली नई परमाणु वार्ता से पहले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान युद्ध और शांति दोनों के लिए तैयार है. क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य जमावड़े के बीच तनाव बढ़ने के समय उन्होंने यह बयान दिया. इस हफ्ते India Today TV को दिए इंटरव्यू में अराघची ने चेतावनी दी कि कोई भी टकराव जल्दी ही ईरान और अमेरिका से आगे बढ़कर पूरे क्षेत्र में 'विनाशकारी' युद्ध में बदल सकता है, जिसमें मध्य पूर्व के कई देश शामिल हो सकते हैं.
तीसरे दौर की वार्ता पर नजर
अराघची ने कहा, 'हम दोनों विकल्पों युद्ध (ईश्वर न करे) और शांति के लिए पूरी तरह तैयार हैं. मैं आज दोपहर जिनेवा जा रहा हूं, जहां अमेरिकी टीम के साथ तीसरे दौर की बातचीत होगी. पिछली बार हमने कुछ प्रगति की थी.' ईरान-अमेरिका वार्ता का तीसरा दौर गुरुवार को जिनेवा में ओमान की मध्यस्थता में तय है. पिछली बातचीत में संभावित समझौते के लिए 'सामान्य मार्गदर्शक सिद्धांत' तय हुए थे, हालांकि यूरेनियम संवर्धन और मिसाइल सीमाओं पर बड़े मतभेद अब भी बाकी हैं.
समझौते की उम्मीद, लेकिन भरोसा कम
ईरानी मंत्री ने कहा कि तेहरान को अब भी समझौते की उम्मीद है. उन्होंने कहा, 'पिछली समझ के आधार पर हम एक उचित, संतुलित और न्यायसंगत समझौता कर सकते हैं.' हालांकि उन्होंने अविश्वास भी जताया और कहा, 'हम पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं कि उनकी वास्तविक इच्छा है. उन्होंने पहले हमसे बातचीत की और फिर हमला कर दिया.' उन्होंने जोड़ा कि अगर वाशिंगटन सच्ची मंशा दिखाता है तो ईरान समझौते के लिए तैयार है.
यूरेनियम संवर्धन छोड़ने से इनकार
वार्ता में सबसे बड़ा विवाद ईरान का परमाणु संवर्धन कार्यक्रम है. अमेरिका चाहता है कि तेहरान इसे पूरी तरह छोड़ दे, जबकि ईरान नागरिक ऊर्जा के लिए सीमित संवर्धन बनाए रखना चाहता है. अराघची ने दोहराया, 'बातचीत और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है. हम चिंताओं पर बात करने को तैयार हैं, लेकिन शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक के अपने अधिकार से पीछे नहीं हटेंगे.'
मिसाइल क्षमता पर सफाई
उन्होंने यह भी खारिज किया कि ईरान लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित कर रहा है. उनके मुताबिक, 'हम जानबूझकर अपनी मिसाइलों की सीमा 2,000 किमी से कम रखते हैं. हम वैश्विक खतरा नहीं बनना चाहते. ये केवल आत्मरक्षा और प्रतिरोध के लिए हैं.'
अमेरिकी सैन्य जमावड़े पर चेतावनी
ईरानी मंत्री ने कहा कि ईरान के आसपास अमेरिका की बड़ी सैन्य मौजूदगी से संघर्ष का खतरा बढ़ रहा है. उन्होंने कहा, 'अगर मकसद हमें धमकाकर झुकाने का है तो ऐसा नहीं होगा.' उन्होंने चेताया कि अमेरिकी ठिकाने पूरे क्षेत्र में फैले हैं, इसलिए कोई भी टकराव पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले सकता है और यह 'भयानक परिदृश्य' होगा.
ईरान की तैयारी का दावा
अराघची ने कहा कि पिछली जंग से ईरान ने कई सबक सीखे हैं और अब वह ज्यादा तैयार है. उन्होंने कहा, 'किसी की जीत नहीं होगी, यह एक विनाशकारी युद्ध होगा.'
प्रदर्शन मौतों के आंकड़े पर विवाद
विदेश मंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को भी खारिज किया, जिसमें विरोध प्रदर्शनों में मौतों की संख्या ज्यादा बताई गई थी. उन्होंने कहा, 'यह एक और फेक न्यूज है. उन्होंने 32,000 मौतों की बात कही, जबकि हमने नामों की सूची जारी की है और संख्या 3,117 है.' हालांकि Human Rights Activists News Agency (HRNA) ने जनवरी में 7,000 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की रिपोर्ट दी है.
भारत को दोस्त बताया
अराघची ने गाजा में इजरायल की कार्रवाई की आलोचना की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान भारत से फिलिस्तीन मुद्दा उठाने की अपील की. उन्होंने कहा कि इजरायल ने 'पूरा गाजा तबाह कर दिया' और हजारों लोग मारे गए. साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान 'जनसंहार करने वाले शासन' से बातचीत उचित नहीं मानता, लेकिन भारत अपने फैसले खुद ले.
उन्होंने भारत-ईरान संबंधों पर जोर देते हुए कहा, 'हमारे भारत के साथ हमेशा बहुत अच्छे रिश्ते रहे हैं. भारत हमारा दोस्त है.' उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देश आगे भी दोस्ताना संबंध बनाए रखेंगे और भारत क्षेत्र में शांति व स्थिरता स्थापित करने में सकारात्मक भूमिका निभाएगा.
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