'घरेलू मसला है, दखल मत दो', PoK पर ब्रिटेन की फटकार से बौखलाया PAK!

ब्रिटेन के 30 से अधिक सांसदों ने पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) में संचार सेवाओं पर रोक, गिरफ्तारियों और बढ़ते तनाव को लेकर चिंता जताई है. सांसदों ने ब्रिटेन की विदेश मंत्री को पत्र लिखकर स्थिति साफ करने और तनाव कम करने के लिए कदम उठाने का आग्रह किया है.

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पीओके में प्रदर्शनों को पाकिस्तान की सरकार दबा रही है (Photo: Reuters/File) पीओके में प्रदर्शनों को पाकिस्तान की सरकार दबा रही है (Photo: Reuters/File)

आजतक इंटरनेशनल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 08 जून 2026,
  • अपडेटेड 7:20 PM IST

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में मानवाधिकार उल्लंघनों की बात कोई नई नहीं है. अब पाकिस्तानी सरकार ने पीओके में कुछ ऐसा किया है जिसकी आलोचना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है. ब्रिटेन के 30 से अधिक सांसदों के एक समूह ने, जिसकी अगुवाई लेबर पार्टी के सांसद इमरान हुसैन कर रहे हैं, ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर को पत्र लिखकर पीओके में संचार सेवाओं पर रोक, गिरफ्तारियों और बढ़ते तनाव पर चिंता जताई है. 

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मानवाधिकार उल्लंघनों पर ब्रिटेन की ओर से निंदा को लेकर पाकिस्तान बिफर पड़ा है. पाकिस्तान ने सोमवार को ब्रिटेन से कहा कि वो अपने सांसदों और ब्रिटेन में रहने वाले पाकिस्तानी मूल के लोगों को ऐसा करने से रोके. पाकिस्तान का दावा है कि इस मुद्दे पर दिए गए उनके बयान क्षेत्र के ऐतिहासिक संदर्भ की अनदेखी करते हैं.

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा, 'हमने ब्रिटेन में प्रवासी समुदाय के कुछ लोगों की जम्मू-कश्मीर को लेकर की गई गैर-जिम्मेदाराना और अधूरी जानकारी पर आधारित टिप्पणियों को गंभीर चिंता के साथ नोट किया है.'

विदेश मंत्रालय ने संबंधित लोगों को पाकिस्तान और पीओके के मामलों को अपना 'अंदरूनी मामला' बताया और कहा कि इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तानी मूल के लोग जहां रह रहे हैं, उन्हें वहां के विकास पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए.

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सांसदों ने की पाकिस्तान की कड़ी निंदा

ब्रिटिश विदेश मंत्री को लिखे पत्र में सांसदों ने आग्रह किया है कि वो इस मामले में पाकिस्तान से स्थिति स्पष्ट करने को कहें और तनाव कम करने के लिए कदम उठाने का दबाव बनाए.

पत्र में कहा गया है कि पीओके से आ रही खबरों में संचार सेवाओं के बाधित होने, लोगों की गिरफ्तारियों और क्षेत्र में बिगड़ती स्थिति का उल्लेख किया गया है, जिसे लेकर ब्रिटेन में रहने वाले कश्मीरी मूल के लोगों और मानवाधिकार समर्थकों के बीच चिंता बढ़ रही है.

सांसदों ने ब्रिटिश सरकार से अनुरोध किया कि वो पाकिस्तान सरकार के सामने इस मुद्दे को उठाए, स्थिति की वास्तविक जानकारी हासिल करे और सभी पक्षों को शांतिपूर्ण संवाद के जरिए विवाद सुलझाने के लिए प्रोत्साहित करे.

यह पत्र ऐसे समय भेजा गया है जब पीओके में सरकार और जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के बीच टकराव बढ़ गया है. हाल ही में क्षेत्रीय प्रशासन ने JAAC को आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित किया था, जिसके बाद पीओके में सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज हो गए हैं.

ब्रिटेन के सांसद ने एक्स पर वीडियो जारी कर पीओके की स्थिति पर जताई चिंता

ब्रिटेन के एक सांसद इकबाल मोहम्मद ने भी पीओके में पाकिस्तान सरकार की ज्यादतियों की निंदा की है. एक्स पर जारी एक वीडियो संदेश में इकबाल मोहम्मद ने कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र के कई लोगों ने शिकायत की है कि वो पीओके में रह रहे अपने परिवार से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं.

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उन्होंने कहा, 'मुझे गिरफ्तारियों की खबरों को लेकर चिंता है, जिनमें कुछ ब्रिटिश नागरिक भी शामिल हैं. इसके अलावा संचार सेवाओं पर प्रतिबंध और पाकिस्तान के अधिकारियों तथा JAAC के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत रुकने की स्थिति भी चिंताजनक है.'

बैन किए जाने के बाद JAAC ने अपना आंदोलन जारी रखा और मंगलवार को पूरे क्षेत्र में हड़ताल का आह्वान किया है. JAAC की प्रमुख मांगों में क्षेत्रीय विधानसभा में उन 12 सीटों को समाप्त करना शामिल है, जो 1947 के बाद जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के मुख्य भूभाग में जाकर बसे शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं. संगठन का आरोप है कि पाकिस्तान की राजनीतिक पार्टियां अक्सर इन सीटों का इस्तेमाल पीओके में सरकार गठन को प्रभावित करने के लिए करती हैं.

इकबाल मोहम्मद ने आगे कहा, 'शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संचार सेवाओं तक पहुंच ऐसे महत्वपूर्ण सिद्धांत हैं जो खासकर तनावपूर्ण परिस्थितियों में स्थिरता और जनता के भरोसे को बनाए रखने में मदद करते हैं. इसलिए मैं पाकिस्तान के अधिकारियों से आग्रह करता हूं कि वे संचार सेवाएं बहाल करें, सभी प्रतिबंध हटाएं और शांतिपूर्ण संवाद, संयम तथा शिकायतें उठाने वाले लोगों और प्रभावित नागरिकों के साथ सार्थक बातचीत के जरिए इस स्थिति का समाधान निकालें.'

पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, अब तक कम से कम चार पुलिसकर्मियों की मौत हो चुकी है, 20 अन्य घायल हुए हैं और दर्जनों प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है.

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