प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 मई को स्वीडन के गोथेनबर्ग दौरे पर जाएंगे. पिछले 8 वर्षों में यह उनकी पहली स्वीडन यात्रा होगी. इससे पहले उन्होंने 2018 में पहले इंडिया-नॉर्डिक समिट के दौरान स्वीडन का दौरा किया था. इस बार का दौरा भारत और स्वीडन के बीच ट्रेड, टेक्नोलॉजी, ग्रीन ट्रांजिशन और डिफेंस सहयोग को नई रफ्तार देने के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है.
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे. दोनों नेता व्यापार और निवेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उभरती तकनीकों, सप्लाई चेन, रक्षा सहयोग, अंतरिक्ष, जलवायु परिवर्तन और लोगों के बीच संबंधों जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे.
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पीएम मोदी यूरोपियन राउंडटेबल फॉर इंडस्ट्री कार्यक्रम में चीफ गेस्ट के तौर पर भी शामिल होंगे. इस मंच पर यूरोप की बड़ी कंपनियों के CEO मौजूद रहेंगे. यहां पीएम मोदी के साथ यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लियेन भी संबोधित कर सकती हैं.
भारत-स्वीडन के बीच 7.7 अरब डॉलर का व्यापार
भारत और स्वीडन के आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं. दोनों देशों के बीच 2025 में व्यापार 7.75 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है. फिलहाल 280 से ज्यादा स्वीडिश कंपनियां भारत में काम कर रही हैं, जबकि 75 से अधिक भारतीय कंपनियां स्वीडन में सक्रिय हैं.
डिफेंस सेक्टर में भी दोनों देशों की साझेदारी तेजी से बढ़ रही है. स्वीडन की डिफेंस कंपनी Saab हरियाणा के झज्जर में कार्ल-गुस्ताफ हथियार सिस्टम का मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित कर रही है. यह स्वीडन के बाहर कंपनी का पहला ऐसा प्लांट होगा और भारत में 100 प्रतिशत FDI आधारित पहला डिफेंस प्रोजेक्ट माना जा रहा है.
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भारत-स्वीडन कई क्षेत्र में कर रहे काम
टेक्नोलॉजी और AI के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने हाल में स्वीडन-इंडिया टेक्नोलॉजी एंड एआई कॉरिडोर यानी SITAC शुरू करने पर सहमति जताई है. इसमें 6G, क्वांटम कंप्यूटिंग, हेल्थकेयर और लाइफ साइंस जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की योजना है. इसके अलावा भारत और स्वीडन ग्रीन एनर्जी और क्लाइमेट एक्शन पर भी साथ काम कर रहे हैं. दोनों देश LeadIT पहल के जरिए भारी उद्योगों में कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं.
करीब 90 हजार भारतीय मूल के लोग स्वीडन में रहते हैं, जो दोनों देशों के रिश्तों में अहम कड़ी माने जाते हैं. माना जा रहा है कि पीएम मोदी की यह यात्रा "ट्रेड, टेक्नोलॉजी और टैलेंट" के तीन बड़े स्तंभों पर भारत-स्वीडन साझेदारी को और मजबूत करेगी.
प्रणय उपाध्याय / आजतक इंटरनेशनल डेस्क