नीदरलैंड्स ने PM मोदी को लौटाई भारत की ऐतिहासिक धरोहर, चोल वंश से है नाता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान नीदरलैंड्स ने 11वीं सदी की चोल वंशकालीन ऐतिहासिक तांबे की पट्टिकाएं भारत को लौटा दी हैं, जिन्हें भारत पिछले 14 वर्षों से वापस लाने की कोशिश कर रहा था.

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प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति में नीदरलैंड्स ने चोल वंश से जुड़ीं ऐतिहासिक तांबे की प्लेटें भारत को सौंपीं. (Photo: X/@PMOIndia) प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति में नीदरलैंड्स ने चोल वंश से जुड़ीं ऐतिहासिक तांबे की प्लेटें भारत को सौंपीं. (Photo: X/@PMOIndia)

aajtak.in

  • एम्स्टर्डम,
  • 16 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:21 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड्स यात्रा के दौरान भारत को बड़ी सांस्कृतिक और कूटनीतिक सफलता मिली है. नीदरलैंड्स ने 11वीं सदी की चोल वंश से जुड़ीं ऐतिहासिक तांबे की पट्टिकाएं भारत को लौटा दी हैं. भारत 2012 से इन ऐतिहासिक धरोहरों की वापसी की मांग कर रहा था.

'अनैमंगलम कॉपर प्लेट्स' या 'लेडेन प्लेट्स' के नाम से मशहूर ये 21 तांबे की पट्टिकाएं चोल साम्राज्य के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक अभिलेखों में गिनी जाती हैं. इनका संबंध राजा राजराजा चोल प्रथम और राजेंद्र चोल प्रथम के शासनकाल से है. लगभग 30 किलोग्राम वजनी इन पट्टिकाओं पर संस्कृत और तमिल दोनों भाषाओं में शिलालेख अंकित हैं. 

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ये पट्टिकाएं 18वीं सदी में डच नियंत्रण वाले नागपट्टिनम क्षेत्र से नीदरलैंड्स ले जाई गई थीं. यूनेस्को की इंटर-गवर्नमेंटल कमेटी ने भी माना था कि इन पट्टिकाओं पर भारत का वैध दावा है और नीदरलैंड्स को इन्हें लौटाने के लिए भारत के साथ रचनात्मक बातचीत करने की सलाह दी थी. नीदरलैंड्स सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान इन्हें पट्टिकाओं को भारत को सौंपने का फैसला लिया.

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नीदरलैंड्स के रॉयल पैलेस में किंग विलेम-अलेक्जेंडर और क्वीन मैक्सिमा से मुलाकात की. इस दौरान दोनों पक्षों के बीच डिजिटल टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, फिनटेक, ब्लू इकोनॉमी, सस्टेनेबल डेवलपमेंट और वाटर रिसोर्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई. प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के संक्षिप्त दौरे के बाद अपने पांच देशों के दौरे के दूसरे चरण में नीदरलैंड्स पहुंचे थे. उनके इस दौरे में स्वीडन, नॉर्वे और इटली भी शामिल हैं.

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प्रधानमंत्री मोदी ने मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, 'किंग विलेम-अलेक्जेंडर और क्वीन मैक्सिमा से मुलाकात कर बेहद खुशी हुई. टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, सस्टेनेबल डेवलपमेंट, ट्रेड और वाटर रिसोर्स जैसे अहम क्षेत्रों में भारत-नीदरलैंड्स दोस्ती को और मजबूत करने पर सार्थक चर्चा हुई.' उन्होंने कहा कि भारत और नीदरलैंड्स साझा हितों और भविष्य के लिए तैयार दुनिया बनाने की सोच से जुड़े हुए हैं.

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने हेग में भारतीय समुदाय को संबोधित किया. उन्होंने भारत को 'अवसरों की धरती' बताते हुए कहा कि देश अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है. प्रधानमंत्री मोदी की नीदरलैंड्स की यह दूसरी यात्रा है. हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, जल, कृषि और स्वास्थ्य जैसे पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर तकनीक, रक्षा, सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा और समुद्री क्षेत्र में भी सहयोग तेजी से बढ़ा है.

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नीदरलैंड्स यूरोप में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है. वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 27.8 अरब डॉलर का रहा, जबकि नीदरलैंड्स भारत का चौथा सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है. अब तक वहां से भारत में 55.6 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आ चुका है. 
 

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