अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ के रूप में उभरा पाकिस्तान शायद समझ नहीं पा रहा कि मीडिएटर को दोनों पक्षों के साथ न्याय करना होता है. उसने सऊदी अरब के खाड़ी तट पर स्थित एक एयरबेस पर अपनी वायुसेना तैनात कर दी है. और ये तैनाती भी ऐसे वक्त में हुई है जब बीते वीकेंड पाकिस्तान ने शांति वार्ता के लिए ईरान और अमेरिका की मेजबानी की है.
पाकिस्तान का कहना है कि सऊदी अरब में यह तैनाती पूरी तरह से रक्षात्मक है लेकिन पाकिस्तान वायुसेना (PAF) की मौजूदगी ईरान के सामने एक अहम सवाल खड़ा करती है: सीजफायर खत्म होने के बाद अगर लड़ाई फिर से शुरू होती है तो क्या वो उस देश के लड़ाकू विमानों को निशाना बनाने का रिस्क लेगा, जिस पर वो शांति प्रक्रिया में भरोसा करता है?
सिडनी यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में दक्षिण एशिया सुरक्षा शोधकर्ता मुहम्मद फैसल के अनुसार, 'पाकिस्तानी वायुसेना की यह तैनाती रक्षात्मक है और यह सऊदी अरब को भरोसा देने के लिए किया गया है. सऊदी अरब अपने पूर्वी प्रांत के तेल क्षेत्रों पर ईरानी हमलों से पहले ही अस्थिर हो चुका है.'
उन्होंने कहा कि सऊदी अरब में पाकिस्तानी वायुसेना की मौजूदगी ईरान के सामने धर्मसंकट पैदा कर सकती है क्योंकि अब ईरान को हमले के वक्त पाकिस्तानी विमानों को होने वाले नुकसान को ध्यान में रखना होगा.
सऊदी, ईरान को एक साथ साधने की पाकिस्तान की चाल
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान पाकिस्तान को नाराज नहीं करना चाहेगा. पिछले हफ्ते पाकिस्तान में सऊदी वित्त मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुल्ला अल-जदान पाकिस्तान गए थे. उसी समय ईरानी प्रतिनिधिमंडल वहां पहुंचा जो इस बात का संकेत हो सकता है कि पाकिस्तान ईरान और सऊदी अरब के बीच समानांतर मध्यस्थता भी कर रहा है.
हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि यह संभावना कम है कि ईरान को खाड़ी के ऊपर पाकिस्तान वायुसेना विमानों की तैनाती की पहले से जानकारी दी गई हो. सोशल मीडिया पर विमान गतिविधियों पर नजर रखने वाले पर्यवेक्षकों ने शुक्रवार को उत्तरी खाड़ी क्षेत्र में तीन PAF C-130 परिवहन विमान और दो Il-78 ईंधन भरने वाले टैंकर देखे. लड़ाकू विमान नजर नहीं आए, क्योंकि शायद उनके ट्रांसपोंडर बंद थे.
सऊदी रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को PAF की तैनाती की पुष्टि की. आधिकारिक बयान के अनुसार, 'इस तैनाती से सऊदी और पाकिस्तानी सशस्त्र बलों के बीच सैन्य समन्वय मजबूत होगा और क्षेत्रीय व वैश्विक सुरक्षा को समर्थन मिलेगा.'
पाकिस्तान के पास अमेरिकी F-16, चीनी J-10C और JF-17 जैसे लड़ाकू विमान हैं, साथ ही स्वीडिश Saab 2000 Erieye निगरानी विमान भी हैं. हाल ही में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों के पाकिस्तान यात्रा के दौरान इन विमानों का डिप्लोमैटिक इस्तेमाल भी किया गया. पाकिस्तानी वायुसेना के F-16 विमानों ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति के विमान को एस्कॉर्ट किया, जबकि JF-17 ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को तेहरान तक छोड़ा.
सऊदी में क्या करेंगे पाकिस्तान के फाइटर जेट
पाकिस्तान के फाइटर जेट सऊदी अरब में सैन्य रणनीति, एक्सरसाइज और पेट्रोलिंग जैसे काम कर सकता है. फिलहाल इसका ध्यान पूर्वी प्रांत और तेल ढांचे की हवाई सुरक्षा पर रहेगा.
विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान की यह तैनाती खाड़ी देशों के लिए एक 'टेस्ट केस' की तरह देखी जा रही है, क्योंकि वे अपनी डिफेंस पार्टनरशिप में विविधता लाने पर विचार कर रहे हैं. गल्फ इंटरनेशनल फोरम की निदेशक दानिया थाफर के अनुसार, भविष्य में बहरीन जैसे देश भी पाकिस्तान से इसी तरह की रक्षात्मक मदद पर विचार कर सकते हैं.
वो कहती हैं, 'बहरीन इस तरफ कदम उठा सकता है लेकिन अभी इस बारे में कुछ कहना बहुत जल्दबाजी होगी.'
वो कहती हैं कि हालांकि, कतर संभवतः अपनी सुरक्षा के लिए तुर्की के साथ संबंधों को प्राथमिकता देगा.
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