'लोगों पर हमलों को तत्काल...', लेबनान पर इजरायली अटैक की PAK पीएम शहबाज शरीफ ने की निंदा

शहबाज शरीफ ने लेबनान पर इजरायल के हमलों की कड़ी निंदा करते हुए नवाफ सलाम से बात की और शांति बहाली का भरोसा दिया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ईरान-अमेरिका वार्ता के जरिए क्षेत्र में तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है. यह बयान अहम बातचीत से ठीक पहले आया है.

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पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने कहा कि मैंने शांति प्रयासों को आगे बढ़ाने के प्रति पाकिस्तान की प्रतिबद्धता को दोहराया (File Photo- Reuters) पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने कहा कि मैंने शांति प्रयासों को आगे बढ़ाने के प्रति पाकिस्तान की प्रतिबद्धता को दोहराया (File Photo- Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 10:07 PM IST

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इजरायल के खिलाफ कड़ा बयान दिया है. उन्होंने लेबनान पर इजरायल के लगातार हमलों की निंदा करते हुए कहा कि इससे हजारों लोगों की जान गई है और क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ी है.

शहबाज शरीफ ने यह बयान ऐसे समय में दिया है जब अमेरिका और ईरान के बीच संभावित सीजफायर और तनाव कम करने को लेकर अहम बातचीत होने वाली है. यह वार्ता शनिवार को इस्लामाबाद में होनी है, जिसे क्षेत्रीय शांति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि उन्होंने लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम से बातचीत की और लेबनान में हो रहे हमलों पर गहरा दुख जताया और इजरायल की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की. 

उन्होंने लिखा, 'आज शाम मैंने लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम से बात की. मैंने लेबनान के खिलाफ इजरायल की लगातार जारी आक्रामकता की कड़ी निंदा की और इन हिंसक झड़पों के परिणामस्वरूप लेबनान में हज़ारों कीमती जानें जाने पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं.'

उन्होंने आगे लिखा, 'मैंने शांति प्रयासों को आगे बढ़ाने के प्रति पाकिस्तान की प्रतिबद्धता को दोहराया, जिसमें इस्लामाबाद में होने वाली आगामी ईरान-अमेरिका वार्ता के माध्यम से बातचीत को सुगम बनाना भी शामिल है. मैं प्रधानमंत्री नवाफ सलाम का आभारी हूं, जिन्होंने पाकिस्तान के शांति प्रयासों की सराहना की और लेबनान व वहां के लोगों को निशाना बनाने वाले हमलों को तत्काल बंद कराने में हमारे निरंतर समर्थन की आवश्यकता पर जोर दिया.'

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गौरतलब है कि अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस्लामाबाद में होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता क्या कोई ठोस नतीजा निकाल पाती है या नहीं. अगर यह बातचीत सफल रहती है, तो मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है. 

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