पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, जो ट्रंप की कृपा पाने के लिए बेताब रहते हैं, वो उनके किसी प्रस्ताव को कैसे नकार सकते थे. बीते रविवार को ट्रंप ने पाकिस्तान को 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने का न्योता भेजा और पाकिस्तान ने उसे स्वीकार भी कर लिया है. ट्रंप के प्रस्ताव को खुशी-खुशी स्वीकार करते हुए पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान गाजा में 'शांति' की हर कोशिश का हिस्सा बनना चाहेगा.
पाकिस्तान की शहबाज-मुनीर की हाइब्रिड सरकार ने भले ही ट्रंप के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया हो लेकिन वहां के एक्सपर्ट्स, एक्स डिप्लोमैट्स और बुद्धिजीवी सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध कर रहे हैं.
अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की राजदूत रह चुकी मलीहा लोधी पाकिस्तान सरकार के फैसले के खिलाफ हैं. उन्होंने बोर्ड ऑफ पीस की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए और कहा कि यह लंबे समय तक नहीं टिक पाएगा.
मलीहा लोधी ने पाकिस्तान के बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा, 'पाकिस्तान ने एक ऐसे संगठन (बोर्ड ऑफ पीस) में शामिल होने का फैसला किया है, जिसे डोनाल्ड ट्रंप संयुक्त राष्ट्र के विकल्प की तरह पेश कर रहे हैं. यह पहल सीधे तौर पर ट्रंप से जुड़ी है और उनका कार्यकाल खत्म होने के बाद इसके टिके रहने की संभावना नहीं दिखती. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ट्रंप को खुश करना सिद्धांतों पर टिके रहने से ज्यादा अहम हो गया है?'
एक और ट्वीट में पाकिस्तान की पूर्व डिप्लोमैट ने लिखा कि पाकिस्तान एक ऐसे बोर्ड का हिस्सा बन रहा है जिसमें इजरायल भी शामिल है. उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. पाकिस्तान ने अब तक इजरायल को मान्यता नहीं दी है और दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण रिश्ते रहे हैं.
एक अन्य ट्वीट में मलीहा लोधी ने गाजा से जुड़ी एक खबर पोस्ट की है जिसमें लिखा है कि सुबह से कम से कम 11 फिलिस्तीनी जिनमें दो बच्चे और तीन पत्रकार शामिल हैं, इजरायली हमले में मारे गए हैं. इस खबर के साथ ट्वीट में मलीहा लोधी ने सवाल किया, ' बोर्ड ऑफ पीस क्या इस तरह की शांति को प्रमोट करेगा?'
पाकिस्तान के पूर्व कानून मंत्री बाबर अवान ने शहबाज शरीफ सरकार की आलोचना करते हुए लिखा, 'सिर्फ ट्रंप को खुश करने के लिए बोर्ड ऑफ पीस में बैठ जाना, और युद्ध अपराधों के लिए बदनाम नेतन्याहू जैसे अंतरराष्ट्रीय अपराधी को जवाबदेह ठहराए बिना उसके साथ मंच साझा करना, फिलिस्तीनी मुद्दे के साथ गद्दारी है. यह कदम कायद-ए-आजम के आदेश की खुली अवहेलना और एक ऐतिहासिक भूल है. शहबाज शरीफ की बूट-पॉलिश की आदत ने पाकिस्तान को कहां से कहां पहुंचा दिया है.'
पाकिस्तान के पत्रकार बकीर सज्जाद ने एक्स पर लिखा, 'अफसोस, यही वो शांति है जो कुछ मुस्लिम देश बेबस फिलिस्तीनियों के लिए हासिल कर पाए हैं- ट्रंप की खुशामद और चापलूसी करके. और फिर भी इन्हें इतनी ढिठाई है कि लोगों को बताते हैं कि जो कुछ किया जा रहा है, वो फिलिस्तीन के हित में है. यह मुस्लिम दुनिया की सबसे बड़ी पाखंड वाली राजनीति की मिसाल है.'
पाकिस्तान के पूर्व सीनेटर और वकील मुस्तफा नवाज खोखर ने एक्स पर लिखा है, 'पाकिस्तान का बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का फैसला बिना किसी पब्लिक डिबेट और संसद की राय के लिया गया है. इससे साफ पता चलता है कि मौजूदा शासन को पाकिस्तानी जनता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बिल्कुल परवाह नहीं है.'
पाकिस्तानी वकील ने तर्क देते हुए कहा कि यह फैसला गलत है. उन्होंने लिखा कि बोर्ड ऑफ पीस एक औपनिवेशिक प्रोजेक्ट है, जिसका मकसद सिर्फ गाजा पर शासन करना नहीं बल्कि संयुक्त राष्ट्र के समानांतर एक नई व्यवस्था खड़ी करना भी है. वो कहते हैं कि ट्रंप के पास पूरी ताकत होगी और वो इस ताकत का इस्तेमाल व्यक्तिगत और अमेरिकी एजेंडे को बढ़ाने के लिए कर सकते हैं.
अंत में वो बोर्ड ऑफ पीस के लिए ली जाने वाली राशि पर सवाल उठाते हुए कहते हैं, 'स्थायी सीट के लिए एक अरब डॉलर की एंट्री फीस इसे असल में अमीरों का क्लब बना देती है. और ऐसे क्लब अक्सर किस तरह काम करते हैं, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है.'
बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शरीफ आर्मी चीफ मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार के साथ दावोस पहुंचे हैं. यहां से उन्होंने अपनी एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, 'बोर्ड ऑफ पीस के हस्ताक्षर समारोह में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर के साथ दावोस पहुंचा हूं.'
उनकी इस पोस्ट पर भी पाकिस्तानी उन्हें टार्गेट कर रहे हैं. पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थक एक यूजर ने लिखा, 'फिलिस्तीन में सालों से फिलिस्तीनियों के खिलाफ जारी लड़ाई में इजरायल के साथ खड़े होने की यह साइनिंग सेरेमनी बेहद शर्मनाक है. फिलिस्तीनियों को लगातार मारा जा रहा है और उन्हें भूखा रखा जा रहा है.'
बहुत से एक्स यूजर पाकिस्तान के इस फैसले को शर्मनाक बताते हुए लिख रहे हैं, 'लानत है तुम लोगों पर.' एक्स पर खुद को पूर्व सैनिक बताने वाले यूजर उमर महमूद हयात लिखते हैं, 'पाकिस्तान सरकार ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने को लेकर सहज नजर आती है, जहां उसे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ भी मंच शेयर करना होगा.'
उन्होंने आगे लिखा, 'नेतन्याहू पर युद्ध अपराधों के आरोप हैं और वो भी इस बोर्ड का हिस्सा होंगे. ऐसे में पाकिस्तान के इस फैसले पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह कदम उसके सिद्धांतों और नैतिकता से मेल खाता है.'
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