'पाकिस्तान ट्रंप के आगे झुकता है, भरोसे लायक नहीं...', ईरान ने बताए Trust Issues, मध्यस्थता पर उठाए सवाल

ईरानी सांसद इब्राहिम रेजाई ने कहा कि पाकिस्तान एक अच्छा मित्र और पड़ोसी तो है, लेकिन शांति वार्ता के लिए मध्यस्थ के रूप में भरोसे लायक नहीं है. पाकिस्तान हमेशा अमेरिका के आगे झुकता है.

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इब्राहिम रजाई ने कहा- एक मध्यस्थ को निष्पक्ष रहना चाहिए. (File photo: ITG) इब्राहिम रजाई ने कहा- एक मध्यस्थ को निष्पक्ष रहना चाहिए. (File photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 7:20 AM IST

अमेरिका‑ईरान संघर्ष को विराम देने के लिए पाकिस्तान ने मध्यस्थता की भूमिका निभाने की कोशिश जरूर की, लेकिन वह दोनों पक्षों की बातचीत को सफल बनाने में नाकाम रहा. इस बीच ईरान ने पाकिस्तान पर भरोसा जताने से इनकार कर दिया है. ईरानी सांसद इब्राहिम रेजाई का कहना है कि पाकिस्तान मध्यस्थ के रूप में भरोसा खो चुका है और हमेशा अमेरिका की ओर झुकता है.

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इब्राहिम रेजाई ने कहा कि पाकिस्तान एक अच्छा मित्र और पड़ोसी तो है, लेकिन भरोसे की कमी के कारण वह वार्ता के लिए उपयुक्त मध्यस्थ नहीं है. रेजाई ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान लगातार डोनाल्ड ट्रंप के हितों का समर्थन करता है और अमेरिका के खिलाफ कोई ठोस रुख अपनाने से बचता है.

उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान उन मामलों को उजागर करने से कतराता है, जहां अमेरिका ने पहले प्रस्ताव स्वीकार किए थे. जैसे कि पाकिस्तान से जुड़े प्रस्ताव, लेकिन बाद में पीछे हट गया.

इब्राहिम रजाई, जो ईरान की संसद के सुरक्षा आयोग के प्रवक्ता भी हैं, आगे बताते हैं कि पाकिस्तान लेबनान से संबंधित अमेरिका की अधूरी कमिटमेंट्स या अवरुद्ध संपत्तियों के बारे में बात नहीं करता.

उन्होंने पाकिस्तान की भूमिका की आलोचना करते हुए कहा, “एक मध्यस्थ को निष्पक्ष रहना चाहिए और किसी एक पक्ष की ओर नहीं झुकना चाहिए."

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इब्राहिम रजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि, पाकिस्तान हमारा अच्छा मित्र और पड़ोसी है, लेकिन वह वार्ता के लिए उपयुक्त मध्यस्थ नहीं है और मध्यस्थता के लिए आवश्यक विश्वसनीयता का अभाव है. वे हमेशा ट्रंप के हितों को ध्यान में रखते हैं और अमेरिकियों की इच्छाओं के विरुद्ध एक शब्द भी नहीं बोलते.

रजाई ने आगे लिखा, उदाहरण के लिए, वे दुनिया को यह बताने को तैयार नहीं हैं कि अमेरिका ने पहले पाकिस्तान के प्रस्ताव को स्वीकार किया था, लेकिन बाद में अपने वादे से मुकर गया. वे यह भी नहीं कहते कि अमेरिका ने लेबनान के मुद्दे या अवरुद्ध संपत्तियों के संबंध में कमिटमेंट्स की थीं, लेकिन उन्हें पूरा करने में विफल रहा. एक मध्यस्थ को निष्पक्ष होना चाहिए, न कि हमेशा एक पक्ष की ओर झुकाव रखना चाहिए.

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