ईरान-UAE तनाव से तेल बाजार में भारी उछाल, कीमतों में 6% की बढ़ोतरी

ईरान और यूएई के बीच गहराते टकराव के बीच तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है, जिसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ा और कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ उछाल देखने को मिला.

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ईरान-यूएई तनाव के बीच मिडिल ईस्ट में बड़ा संकट ईरान-यूएई तनाव के बीच मिडिल ईस्ट में बड़ा संकट

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 मई 2026,
  • अपडेटेड 7:42 AM IST

अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 6% की तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई. दरअसल, ईरान ने पिछले 24 घंटों में संयुक्त अरब अमीरात और मध्य पूर्व की खाड़ी में जहाजों पर हमले तेज कर दिए हैं. यह घटना अप्रैल की शुरुआत में अमेरिका-ईरान युद्धविराम लागू होने के बाद अब तक की सबसे गंभीर स्थिति मानी जा रही है.

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ब्रेंट क्रूड 6.27 डॉलर यानी 5.8% बढ़कर 114.44 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 4.48 डॉलर यानी 4.4% बढ़कर 106.42 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया.

रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने सोमवार को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कई जहाजों को निशाना बनाया और UAE के एक प्रमुख तेल बंदरगाह पर हमला कर आग लगा दी. इस घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया और तेल आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंता बढ़ गई.

बताया जा रहा है कि हमले के दौरान संयुक्त अरब अमीरात, दक्षिण कोरिया और अन्य देशों के कई जहाजों को भी निशाना बनाया गया. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अमेरिकी नौसेना ने हस्तक्षेप किया और मिसाइलों तथा ड्रोन हमलों को रोकने की कोशिश की.

ईरान ने सोमवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कई जहाजों पर हमला किया और संयुक्त अरब अमीरात के एक प्रमुख तेल बंदरगाह में आग लगा दी. यह घटनाक्रम तब सामने आया जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी नौसेना की तैनाती के प्रयास किए गए, जिससे चार सप्ताह पहले घोषित युद्धविराम के बाद अब तक की सबसे बड़ी सैन्य तनाव वृद्धि देखी गई.

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इस बीच, वैश्विक तेल आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए OPEC+ ने उत्पादन लक्ष्य बढ़ाने की योजना बनाई है. वहीं, संयुक्त अरब अमीरात ने भी स्पष्ट किया है कि वह बाजार की जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है, खासकर तब जब वह पहले ही OPEC से अलग होने का फैसला कर चुका है.

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव और बढ़ता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजारों में और अधिक अस्थिरता देखने को मिल सकती है और तेल की कीमतों में आगे भी तेजी जारी रह सकती है.

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