अमेरिकी अखबार NYT ने आखिर ऐसा क्या लिख दिया, जिसे आसिम मुनीर ने पाकिस्तान में छपने नहीं दिया

न्यूयॉर्क टाइम्स की 'शिया नाराजगी' पर आधारित रिपोर्ट को लेकर दावा है कि इसे पाकिस्तान के प्रिंट एडिशन से हटा दिया गया, जबकि अंतरराष्ट्रीय संस्करणों में यह प्रमुखता से प्रकाशित हुई. इस मुद्दे पर अब मीडिया सेंसरशिप और संवेदनशीलता को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

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शिया मुद्दे पर सेंसरशिप का आरोप मुनीर पर लगा है (Photo: ITG) शिया मुद्दे पर सेंसरशिप का आरोप मुनीर पर लगा है (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 9:52 PM IST

अमेरिका की सबसे बड़ी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स यानी NYT ने एक बहुत बड़ी रिपोर्ट छापी थी. ये रिपोर्ट पाकिस्तान के अंदर की स्थिति के बारे में थी. खासकर पाकिस्तान में रहने वाले शिया मुसलमानों के गुस्से के बारे में थी. 

ये रिपोर्ट अमेरिका और दुनिया भर में छपी. लेकिन जब ये रिपोर्ट पाकिस्तान के अंदर प्रिंट होकर बिकने वाली NYT की कॉपी में जानी चाहिए थी, तो वहां से ये रिपोर्ट गायब कर दी गई. मतलब पाकिस्तान में बिकने वाली NYT में ये खबर ही नहीं थी.

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NYT के पाकिस्तान और अफगानिस्तान ब्यूरो चीफ एलियन पेल्टियर ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ये बात बताई. उन्होंने लिखा कि हमारी ये रिपोर्ट अमेरिका और बाकी दुनिया में तो छपी, लेकिन पाकिस्तान की प्रिंट एडिशन से हटा दी गई. और इसकी वजह बताई गई कि ये रिपोर्ट पाकिस्तान के अंदर संप्रदायिक तनाव यानी शिया और सुन्नी के बीच के टकराव को लेकर संवेदनशील है.

NYT ने क्या रिपोर्ट छापी थी?

NYT ने एक फ्रीलांस लेखक जिया उर रहमान की रिपोर्ट छापी थी. ये लेखक पाकिस्तान का ही रहने वाला है और NYT के लिए लिखता है. इस रिपोर्ट का टाइटल था शिया एंगर इन पाकिस्तान यानी पाकिस्तान में शियाओं का गुस्सा.

इस रिपोर्ट में क्या लिखा था?

इस रिपोर्ट में लिखा था कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने खुद शिया धर्मगुरुओं की एक मीटिंग बुलाई थी. इस मीटिंग का मकसद था कि शिया समुदाय का गुस्सा शांत किया जाए. कहीं ऐसा न हो कि पाकिस्तान के अंदर शिया और सुन्नी के बीच बड़ा टकराव हो जाए. आसिम मुनीर ने शिया मौलवियों से बात की, उन्हें समझाया, और कहा कि सब्र रखो, स्थिति कंट्रोल में है.

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यह भी पढ़ें: मुनीर की वो 5 हरकतें जिससे ईरान की नजर में खटकने लगा पाकिस्तान, ट्रंप-परस्ती का आरोप

ये रिपोर्ट पाकिस्तान की एक और बड़ी समस्या भी बता रही थी. पाकिस्तान अभी अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में बिचौलिया यानी मीडिएटर बना हुआ है. अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बात नहीं हो रही. तो दोनों देश इस्लामाबाद में बैठकर बात कर रहे हैं. पाकिस्तान कह रहा है कि मैं दोनों को मिला रहा हूं, मैं शांति ला रहा हूं. लेकिन अंदर से पाकिस्तान की अपनी हालत खराब है. शिया समुदाय नाराज है. अगर अंदर ही आग लगी रही तो बाहर शांति की बात कैसे करोगे? ये दुहरी मुश्किल थी जिसके बारे में NYT ने लिखा.

पाकिस्तान में 3.5 करोड़ शिया मुसलमान रहते हैं

पाकिस्तान में करीब 35 मिलियन यानी 3.5 करोड़ शिया मुसलमान रहते हैं. ये बहुत बड़ी तादाद है. और पिछले कुछ समय से पाकिस्तान के शिया समुदाय में बहुत ज्यादा गुस्सा है. इसकी वजह क्या है? ईरान में ईरान के टॉप लीडरशिप और धर्मगुरुओं की हत्या हुई थी. ईरान में जब ये हुआ तो उसका असर पाकिस्तान के शियाओं पर भी पड़ा. वो गुस्से में आ गए. उन्होंने प्रदर्शन किए. सड़कों पर उतरे. और पाकिस्तान सरकार को लगा कि अगर ये गुस्सा बढ़ा तो बड़ा धमाका हो सकता है.

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