अरब सागर में उतारी परमाणु पनडुब्बी, अमेरिका को मिलिट्री बेस... मिडिल ईस्ट जंग में ब्रिटेन की भी एंट्री?

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है. इस बीच अमेरिका लगातार ईरान को धमकियां दे रहा है और ईरान भी इन धमकियों का जवाब दे रहा है. इस जारी संघर्ष में अब ब्रिटेन की भागीदारी भी बढ़ती हुई नजर आ रही है.

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क्या मिडिल ईस्ट के युद्ध में अब ब्रिटेन की भी सक्रिय भागीदारी शुरू हो गई है?  (Photo: Pixabay) क्या मिडिल ईस्ट के युद्ध में अब ब्रिटेन की भी सक्रिय भागीदारी शुरू हो गई है? (Photo: Pixabay)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 8:06 AM IST

मिडिल ईस्ट में जंग लगातार जारी है. 20 से अधिक दिनों से चल रहे इस युद्ध में हमले थमने का नाम नहीं ले रहे. अब इस संघर्ष में ब्रिटेन की भागीदारी भी बढ़ती दिखाई दे रही है. ब्रिटेन ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए अरब सागर में एक परमाणु संचालित पनडुब्बी तैनात की है.

'डेली मेल' की रिपोर्ट के अनुसार, HMS Anson नामक यह पनडुब्बी टॉमहॉक ब्लॉक IV क्रूज मिसाइलों से लैस है, जो सैकड़ों मील दूर स्थित लक्ष्यों पर हमला करने की क्षमता रखती है.

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बता दें, ब्रिटेन ने अपनी नीति में बड़ा बदलाव करते हुए अमेरिका को ईरान के खिलाफ अपने सैन्य बेस इस्तेमाल करने की अनुमति दी है. अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों को निशाना बना रहे ईरानी ठिकानों को तबाह करने के लिए अमेरिकी ब्रिटिश ठिकानों का उपयोग कर सकता है.

इस बीच ब्रिटेन मैरीटाइम अथॉरिटी ने जानकारी दी है कि यूएई के तट के पास एक कमर्शियल जहाज को निशाना बनाया गया है. UKMTO ने बताया कि यूएई के शारजाह से लगभग 15 नॉटिकल मील उत्तर में एक घटना की जानकारी मिली है.

एक बल्क कैरियर के कप्तान ने बताया कि जहाज के पास किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल के कारण धमाका हुआ. हालांकि सभी क्रू मेंबर्स सुरक्षित बताए जा रहे हैं.

ट्रंप की धमकी, ईरान का पलटवार

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तनाव लगातार गहराता जा रहा है. अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टिमेटम दिया है. ट्रंप ने आक्रामक रुख अपनाते हुए ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन दी है.  ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान ने होर्मुज को बिना किसी खतरे के पूरी तरह से नहीं खोला, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स (बिजली केंद्रों) को निशाना बनाकर उन्हें खत्म कर देगा.

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ट्रंप की इस धमकी के जवाब में ईरानी सशस्त्र बलों के संयुक्त कमांड का कहना है कि अगर ईरान के ईंधन और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमला किया गया तो क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी ऊर्जा बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया जाएगा. 

ईरान कर रहा लंबी दूरी की मिसाइलों की इस्तेमाल 

इजरायली अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि ईरानी बलों ने पहली बार लंबी दूरी की मिसाइलें दागी हैं, जिससे मध्य पूर्व के बाहर भी हमलों का खतरा बढ़ गया है.

इजरायली सेना के प्रमुख ने जानकारी दी कि ईरान ने अमेरिकी‑ब्रिटिश सैन्य ठिकाने डिएगो गार्सिया पर दो 4,000 किलोमीटर दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं.

इजरायली सेना ने बताया कि यह पहली बार है, जब ईरान ने इस संघर्ष में लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल किया है. यह मध्य पूर्व से परे उनका पहला हमला है.,जब से अमेरिका और इज़रायल ने 28 फरवरी से ईरान पर हमले शुरू किए.

वहीं, ईरान ने ब्रिटेन के डिएगो गार्सिया स्थित सैन्य बेस को निशाना बनाने से इनकार किया है. ईरान ने जानकारी दी है कि वहां हुए मिसाइल हमले के पीछे उसका हाथ नहीं है. बता दें, यह सैन्य बेस फिलहाल अमेरिका द्वारा ईरान के साथ चल रहे युद्ध में “रक्षात्मक अभियानों” के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है.

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