वेस्ट एशिया में जारी जंग का दायरा बढ़ता जा रहा है. हालात तेजी से बेकाबू होते दिख रहे हैं. ताजा घटनाक्रम में ईरान ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है. इसके बाद बौखलाए सऊदी ने चेतावनी दी है कि वो अब सीधे सैन्य कार्रवाई में उतर सकता है.
इस बात की आशंका बढ़ गई है कि यदि सऊदी अरब युद्ध में उतरता है, तो पाकिस्तान को भी शामिल होना पड़ेगा. दोनों देशों के बीच मौजूद रक्षा समझौता उसको इसके लिए मजबूर कर सकता है. बुधवार को तुर्की, यूएई, कतर समेत एक दर्जन देशों के विदेश मंत्री रियाद के एक होटल में जुटे थे.
वे मध्य-पूर्व में तेजी से बढ़ते तनाव पर चर्चा कर रहे थे. इसी दौरान ईरान ने रियाद को मिसाइलों से निशाना बना दिया. विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला सिर्फ सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि एक बड़ा रणनीतिक संदेश भी है. अब तक रियाद को अपेक्षाकृत सुरक्षित शहर माना जाता था.
ईरान के हमले ने कई धारणाएं तोड़ दी हैं. इससे साफ है कि युद्ध अब सऊदी अरब के प्रशासनिक केंद्र तक पहुंच चुका है. विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि यदि सऊदी अरब जवाबी कार्रवाई करता है, तो वह पाकिस्तान के साथ अपने रक्षा समझौते को सक्रिय कर सकता है.
ऐसी स्थिति में इस्लामाबाद का इस संघर्ष में शामिल होना लगभग तय माना जा रहा है. सऊदी अरब ने अमेरिका से भी ईरान पर हमले जारी रखने का आग्रह किया है. एक सऊदी विशेषज्ञ ने कहा कि रक्षा समझौता सक्रिय होने का मतलब सऊदी को एक तरह का 'न्यूक्लियर अंब्रेला' मिलना होगा.
लेबनानी-ऑस्ट्रेलियाई विश्लेषक मारियो नौफल ने इस हमले को बेहद सोची-समझी रणनीति का हिस्सा बताया है. उनके मुताबिक, यह समय, लक्ष्य और तीव्रता, तीनों ही स्तर पर योजनाबद्ध था. हमले के बाद सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है.
उन्होंने कहा कि सऊदी अरब का सब्र अब टूट रहा है. यदि हमले आगे भी जारी रहे तो वो सैन्य कार्रवाई का अधिकार इस्तेमाल करेगा. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के साथ भरोसा अब बुरी तरह टूट चुका है. पिछले तीन हफ्तों से यह संघर्ष ईरान, अमेरिका और इजरायल के इर्द-गिर्द घूम रहा था.
ईरान ने यूएई, बहरीन, कुवैत और कतर जैसे देशों को भी निशाना बनाया, लेकिन सऊदी अरब अब तक सीधे हमलों से काफी हद तक बचा हुआ था. अब हालात बदल गए हैं. बुधवार को ईरान ने रियाद में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया, जिसमें एक रिफाइनरी भी शामिल थी.
रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी एयर डिफेंस सिस्टम ने ज्यादातर मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया. इस दौरान चार बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराया गया. हालांकि, उनके मलबे शहर के दक्षिण में एक रिफाइनरी के पास गिरे. उस रिफाइनरी में रोजाना करीब 1.30 लाख बैरल तेल प्रोसेस होता है.
सऊदी विदेश मंत्री ने कहा कि हमलों की सटीकता यह दिखाती है कि यह पूरी तरह योजनाबद्ध कार्रवाई थी. 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान लगातार सऊदी अरब को निशाना बना रहा है. 1 मार्च को प्रिंस सुल्तान एयर बेस और रियाद एयरपोर्ट पर मिसाइलें दागी गईं, जिन्हें रोक दिया गया.
2 मार्च को ड्रोन ने रास तनुरा रिफाइनरी को निशाना बनाया, जिससे उसे अस्थायी तौर पर बंद करना पड़ा. 8 मार्च को अल-खर्ज में एक रिहायशी इमारत पर ड्रोन हमला हुआ, जिसमें दो लोगों की मौत और 12 घायल हुए. 14 मार्च को प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर अमेरिकी विमानों को नुकसान पहुंचाया गया.
सुशीम मुकुल