ट्रंप को मिला 'सेकेंड हैंड नोबेल', अब क्या मचाडो से प्राइज कमेटी छीन लेगी पुरस्कार?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आखिरकार नोबेल शांति पुरस्कार मिल गया है जिसे वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो ने जीता था. मचाडो ने अपने पुरस्कार का मेडल ट्रंप को दिया है जिसे ट्रंप ने खुशी से स्वीकार किया है.

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वेनेजुएला की विपक्षी नेता मचाडो ने अपना नोबेल पुरस्कार मेडल ट्रंप को दे दिया है (Photo: Reuters/White House) वेनेजुएला की विपक्षी नेता मचाडो ने अपना नोबेल पुरस्कार मेडल ट्रंप को दे दिया है (Photo: Reuters/White House)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:38 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति को आखिरकार शांति का नोबेल पुरस्कार मिल ही गया है. वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो ने 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार जीता था जिसके लिए ट्रंप बार-बार दावा कर रहे थे. पिछले साल शांति पुरस्कारों की घोषणा से पहले ट्रंप कई बार सात युद्ध रुकवाने का दावा कर चुके थे. वो कह रहे थे कि एक 'पीसमेकर' होने के नाते उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार दिया जाना चाहिए. लेकिन जब यह पुरस्कार उनके बजाए वेनेजुएला की विपक्षी नेता को मिल गया तो वो बेहद नाराज हुए थे.

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तब व्हाइट हाउस की तरफ से कहा गया था कि नोबेल समिति ने शांति के बजाए राजनीति को तवज्जो दी है. अब जब मचाडो ने खुद अपने नोबेल पुरस्कार का मेडल ट्रंप को दे दिया है तो वो बेहद खुश हैं. व्हाइट हाउस में मुलाकात के बाद ट्रंप ने वेनेजुएला की नेता की जमकर तारीफ की और कहा कि 'मेरे काम से खुश होकर उन्होंने अपना शांति पुरस्कार मुझे सौंपा है.'

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'वो एक अद्भुत महिला हैं, जिन्होंने बहुत कुछ सहा है.' उन्होंने यह भी कहा कि मचाडो का उन्हें अपना मेडल देना 'आपसी सम्मान का एक बेहद खूबसूरत संकेत' है.

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि ट्रंप नोबेल शांति पुरस्कार के मेडल को अपने पास रखने का इरादा रखते हैं.

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मचाडो ने अपना शांति पुरस्कार ट्रंप को क्यों दिया?

वेनेजुएला में विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो निकोलस मादुरो की सरकार में लंबे समय से दमन का शिकार रही हैं. वो मादुरो की कार्रवाई से बचने के लिए छिपकर रह रही थीं. 

ट्रंप को अपना नोबेल देने के लिए वॉशिंगटन यात्रा से पहले मचाडो सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आई थीं. वो पिछले महीने नॉर्वे गई थीं, जहां उनकी बेटी ने उनकी ओर से शांति पुरस्कार प्राप्त किया था. इससे पहले मचाडो वेनेजुएला में 11 महीने तक छिपकर रही थीं.

लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने साल की शुरुआत में मादुरो को उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस समेत गिरफ्तार कर लिया था. मादुरो की गिरफ्तारी के बाद मचाडो को यकीन था कि ट्रंप वेनेजुएला की सत्ता में उन्हें आगे करेंगे लेकिन ट्रंप ने वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज, जो कि अब कार्यवाहक राष्ट्रपति बना दी गई है, को समर्थन देने का फैसला किया है.

माना जा रहा है कि मचाडो ट्रंप को अपना नोबेल मेडल देकर अपने पक्ष में करना चाहती हैं. मचाडो को अपने देश की लोकतांत्रिक नेता-इन-वेटिंग माना जाता रहा है, लेकिन ट्रंप का निकोलस मादुरो को हटाने और फिर उनके डिप्टी का समर्थन करने के बाद उनकी स्थिति कमजोर हुई है.

क्या मचाडो अपना नोबेल पुरस्कार किसी और को दे सकती हैं?

नोबेल संस्थान का कहना है कि मचाडो अपना पुरस्कार ट्रंप को नहीं दे सकतीं, भले ही ट्रंप इस सम्मान को पाने की इच्छा लंबे समय से जताते रहे हों.

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भले ही यह कदम केवल प्रतीकात्मक ही क्यों न हो, फिर भी यह असाधारण है, क्योंकि ट्रंप ने से मचाडो को हाशिये पर डाल दिया है, जो लंबे समय से वेनेजुएला में प्रतिरोध की सबसे प्रमुख चेहरा रही हैं.

ट्रंप को नोबेल मेडल देने के बाद प्राइज कमेटी मचाडो से अवॉर्ड वापस ले सकती है?

द नोबेल पीस प्राइज की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, नोबेल शांति पुरस्कार को वापस लेना संभव नहीं है. न तो अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत में और न ही नोबेल फाउंडेशन के नियमों में ऐसी किसी संभावना का उल्लेख है.

नोबेल फाउंडेशन के नियमों की धारा 10 के अनुसार, 'किसी पुरस्कार को दिए जाने के संबंध में पुरस्कार देने वाली संस्था के फैसले के खिलाफ कोई अपील नहीं की जा सकती.'

स्टॉकहोम और ओस्लो में स्थित किसी भी पुरस्कार समिति ने आज तक कभी किसी दिए जा चुके पुरस्कार को वापस लेने पर विचार नहीं किया है.

सिद्धांत के तौर पर, नॉर्वेजियन नोबेल समिति इस बात पर कोई टिप्पणी नहीं करती कि शांति पुरस्कार प्राप्त करने वाले व्यक्ति पुरस्कार मिलने के बाद क्या कहते या उसका क्या करते हैं. समिति का दायरा केवल नामित उम्मीदवारों के उस कार्य और प्रयासों के मूल्यांकन तक सीमित है, जो उस समय तक किए गए हों जब यह तय किया जाता है कि किसी साल का नोबेल शांति पुरस्कार किसे दिया जाएगा.

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पुरस्कार विजेताओं की गतिविधि पर नजर रखती है नोबेल समिति लेकिन...

किसी भी नोबेल पुरस्कार को न तो वापस लिया जा सकता है, न साझा किया जा सकता है और न ही किसी अन्य व्यक्ति को ट्रांसफर किया जा सकता है. एक बार पुरस्कार की घोषणा हो जाने के बाद, यह निर्णय हमेशा के लिए अंतिम होता है.

हालांकि, इसका मतलब ये नहीं कि पुरस्कार दे दिए जाने के बाद समिति पुरस्कार विजेताओं के आगे की गतिविधियों पर करीबी नजर नहीं रखती. वो नजर रखती है लेकिन पुरस्कार विजेता से संबंधित चिंता या फिर उसकी सराहना को सार्वजनिक रूप से व्यक्ति नहीं करती.

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