डोनाल्ड ट्रंप ने जब ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी का ऐलान किया, तो कई लोगों ने मान लिया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से किसी भी जहाज का आना-जाना बंद हो जाएगा. ट्रंप के एक सोशल मीडिया पोस्ट से यह भ्रम और बढ़ गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि 'सभी को अंदर आने और बाहर जाने की अनुमति' होगी. हालांकि हकीकत इससे काफी अलग है.
होर्मुज पूरी तरह बंद नहीं है और न ही सभी जहाजों की आवाजाही रुकी है. यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के बयान ने स्थिति कुछ हद तक स्पष्ट की, लेकिन कुछ बातें अब भी अस्पष्ट हैं. सेंटकॉम के बयान में कहा गया कि नाकेबंदी सभी देशों के उन जहाजों पर समान रूप से लागू होगी जो ईरानी बंदरगाहों या उसके तटीय क्षेत्रों में एंट्री या वहां से एक्जिट कर रहे हैं. हालांकि, जिन जहाजों का ईरान से कोई लेना देना नहीं होगा उनकी आवाजाही में बाधा नहीं डाली जाएगी.
अमेरिकी नौसेना के सेंट्रल कमांड (NAVCENT) ने अपडेट जारी करते हुए बताया कि सभी ईरानी जहाज, ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) द्वारा प्रतिबंधित जहाज और संदिग्ध सामान ले जा रहे जहाजों की जांच की जाएगी. आजतक की OSINT टीम ने होर्मुज और आसपास के क्षेत्रों में जहाजों की आवाजाही पर नजर रखी. डेटा के मुताबिक, 13 अप्रैल से लागू नाकेबंदी के पहले तीन दिनों में होर्मुज से गुजर रहे कम से कम 10 जहाजों को रोका गया है.
होर्मुज में यू-टर्न लेने वाले जहाज
आजतक की OSINT टीम ने अपनी रिसर्च में पाया कि Rich Starry, Christianna और Ostria जैसे जहाजों ने पहले 48 घंटों में ही यू-टर्न ले लिया. ईरानी झंडे वाला Kashan जहाज, जो होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहा था, वह भी वापस लौट गया. सेंटकॉम के मुताबिक, बंदर अब्बास से निकलने के बाद एक ईरानी जहाज को अमेरिकी युद्धपोत USS Spruance ने रोककर वापस भेज दिया. OSINT की ट्रैकिंग से पता चलता है कि यह जहाज Kashan ही था.
किन जहाजों को मिल रही है छूट?
होर्मुज में अमेरिका की नाकेबंदी के बावजूद जहाजों की आवाजाही पूरी तरह नहीं रुकी है. बल्कि चयनित रूप से कुछ जहाजों को गुजरने दिया जा रहा है. जो जहाज नाकेबंदी लागू होने से पहले ईरानी जलक्षेत्र में प्रवेश कर चुके थे, उन्हें अपनी यात्रा पूरी करने की अनुमति दी गई है. बिना कार्गो वाले जहाजों पर कम सख्ती देखी गई. ईरान से जुड़े लेकिन अन्य देशों की ओर जा रहे जहाजों को भी रोका नहीं जा रहा, जैसे Agios Fanourios I (इराक के बसरा की ओर) और Peace Gulf.
ईरानी तट के पास चलने वाले जहाजों की गतिविधि भी जारी है. Golbon जैसे जहाज तट के पास चलते हुए Chabahar बंदरगाह तक पहुंचे. कार्गो का प्रकार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. Rosalina जैसे जहाज, जो संभवतः खाद्य सामग्री ले जा रहे थे, उन्हें रोका नहीं गया. इस विश्लेषण से साफ है कि नाकेबंदी पूरी तरह सख्त नहीं है, बल्कि यह कई लेवल पर और चयनात्मक तरीके से लागू की जा रही है, जिसमें सुरक्षा, कार्गो और गंतव्य जैसे कारकों के आधार पर निर्णय लिए जा रहे हैं.
बिदिशा साहा