इजरायली सैन्य बलों ने रविवार-सोमवार की दरमियानी रात को चलाए ऑपरेशन में तेहरान के अंदर घुसकर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. इजरायल का कहना है कि उसने रात भर चले इस ऑपरेशन में मेहराबाद एयरपोर्ट पर एक विशेष विमान को नष्ट कर दिया है, जिसका इस्तेमाल ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई और अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों द्वारा किया जाता था. इस हमले का उद्देश्य ईरान की सैन्य संचार और पुनर्निर्माण क्षमताओं को कमजोर करना है. इजरायल ने चेतावनी दी है कि वह ईरान में सैन्य वाहनों और उपकरणों को निशाना बनाना जारी रखेगा. यह कार्रवाई ईरानी शासन की सुरक्षा-व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, इजरायली सेना ने बताया कि इस विमान इस्तेमाल ईरानी शासन के वरिष्ठ अधिकारियों, सैन्य नेताओं और सशस्त्र बलों के सदस्य घरेलू और इंटरनेशनल उड़ानों के लिए कर रहे थे. इसी विमान का इस्तेमाल ईरान के सैन्य खरीद, संचार तथा सहयोगी देशों (एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस) के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए होता था.
सेना ने बताया कि इस हमले का मुख्य उद्देश्य ईरानी नेतृत्व की संचार क्षमताओं और सैन्य पुनर्निर्माण की शक्ति को कमजोर करना है. इजरायल ने चेतावनी दी है कि वह पूरे ईरान में सैन्य बलों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले किसी भी वाहन को निशाना बनाना जारी रखेगा.
रणनीतिक संपत्ति को नुकसान
इजरायली सेना ने इस विमान को ईरान की एक 'रणनीतिक संपत्ति' करार दिया है. उनके बयान के मुताबिक, इस विमान के नष्ट होने से ईरानी शासन की अपने सहयोगी देशों के साथ तालमेल बिठाने की क्षमता को गहरा धक्का लगा है. विमान का इस्तेमाल न केवल सैन्य अधिकारियों की आवाजाही के लिए होता था, बल्कि ये सैन्य उपकरणों की खरीद और एक्सिस देशों के साथ संचार प्रबंधन का भी मुख्य जरिया था.
इजरायल का मानना है कि इस प्रहार से ईरान की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने की प्रक्रिया काफी धीमी हो जाएगी.
ईरान को IDF की चेतावनी
इस हमले के बाद इजरायली सेना ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं. सैन्य बयान में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ईरान के अंदर कहीं भी सैन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहनों और विमानों को बख्शा नहीं जाएगा.
मेहराबाद एयरपोर्ट जैसी सुरक्षित जगह पर इस तरह की स्ट्राइक करना ईरान की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है.
इजरायल इस कार्रवाई को ईरानी शासन की रीढ़ तोड़ने और उसकी पुनर्निर्माण क्षमता को सीमित करने की दिशा में एक बड़ा कदम बता रहा है.
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