पश्चिम एशिया में जंग थमने का नाम नहीं ले रही. एक तरफ ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले जारी हैं, दूसरी तरफ लेबनान से हिजबुल्लाह लगातार इजराइल पर रॉकेट और मिसाइलें दाग रहा है. इसी बीच इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सा'र ने एक बेहद तीखा बयान दिया है जिसने लेबनान की राजनीति पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
दरअसल पिछले हफ्ते लेबनान के विदेश मंत्रालय ने ईरानी राजदूत को "पर्सोना नॉन ग्राटा" यानी अवांछित व्यक्ति घोषित कर दिया था और उन्हें देश छोड़ने के लिए एक समय सीमा दी थी. वह समय सीमा 29 मार्च को खत्म हो गई. लेकिन 30 मार्च की सुबह ईरानी राजदूत अभी भी बेरूत में बैठकर आराम से चाय पी रहे हैं. उन्होंने जाने की कोई जल्दी नहीं दिखाई.
इजरायली विदेश मंत्री सा'र ने इस पर तंज कसते हुए एक्स पर लिखा कि ईरानी राजदूत बेरूत में बैठकर मेजबान देश का मजाक उड़ा रहे हैं. इतना ही नहीं हिजबुल्लाह के मंत्री अभी भी लेबनान की सरकार में बने हुए हैं.
लेबनान एक कठपुतली देश है: इजरायल
सा'र ने साफ कहा कि लेबनान एक नाम का देश है, असल में वहां ईरान का कब्जा है. यह कब्जा छिपा हुआ नहीं है बल्कि खुला है, लेकिन दुनिया इस पर बात नहीं करती. उन्होंने याद दिलाया कि 2 मार्च को हिजबुल्लाह ने नवंबर 2024 के सीजफायर समझौते को तोड़ते हुए इजरायल पर हमला किया. तब से अब तक लेबनान की धरती से इजरायल पर 5,000 से ज्यादा मिसाइलें, रॉकेट और ड्रोन दागे जा चुके हैं.
यह भी पढ़ें: क्या अमेरिकी ग्राउंड ऑपरेशन से पहले कुर्द ईरान पर हमला करेंगे? तीन तरफा अटैक की तैयारी
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि लेबनानी सेना ने जनवरी में खुद दावा किया था कि लिटानी नदी के दक्षिण के इलाके पर उसका "ऑपरेशनल कंट्रोल" है. लेकिन इसी इलाके से हिजबुल्लाह लगातार इजरायल पर हमले करता रहा.
इजराइल की सीधी चेतावनी
सा'र ने अपने बयान में साफ कहा कि जब तक लेबनान खुद यह फैसला नहीं करता कि वह ईरान के कब्जे और उसके हथियारबंद गुट हिजबुल्लाह का सामना करेगा, तब तक लेबनान को अपनी संप्रभुता वापस नहीं मिलेगी.
यह बयान ऐसे वक्त आया है जब इजरायल लेबनान में जमीनी अभियान चला रहा है और लिटानी नदी तक के इलाके पर कब्जे का ऐलान कर चुका है. जंग में फंसे लेबनान के लिए यह बयान एक साफ संदेश है कि इजरायल अब पुराने हालात में वापस जाने को तैयार नहीं है.
aajtak.in